बिहार को बड़ी रेल सौगात, इस इलाके में बिछेगी तीसरी रेल लाइन, खर्च होंगे 962 करोड़

Bihar Railway Project, Kiul-Jhajha Third Rail Line: बिहार को रेलवे के क्षेत्र में एक और बड़ी सौगात मिली है। भारतीय रेलवे ने किउल से झाझा के बीच 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर करीब 962 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेलवे का कहना है कि इससे हावड़ा-दिल्ली रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों के साथ-साथ मालगाड़ियों की आवाजाही भी ज्यादा आसान और तेज होगी। यह परियोजना बिहार के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Authored by: रामानुज सिंहUpdated May 20 2026, 11:16 IST
​हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर को मिलेगा बड़ा फायदा​Image Credit : Istock01 / 07

​हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर को मिलेगा बड़ा फायदा​

किउल-झाझा रेलखंड देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है। यह मार्ग हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल लाइन का अहम हिस्सा है। अभी इस रूट पर दोहरी रेल लाइन मौजूद है, लेकिन ट्रेनों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि लाइन अपनी क्षमता से ज्यादा इस्तेमाल हो रही है। ऐसे में तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों का दबाव कम होगा और संचालन बेहतर तरीके से हो सकेगा।

​यात्रियों को मिलेगी राहत​Image Credit : Istock02 / 07

​यात्रियों को मिलेगी राहत​

नई तीसरी लाइन बनने के बाद ट्रेनों की लेटलतीफी कम होने की उम्मीद है। अभी इस मार्ग पर अक्सर ट्रेनों को रुकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है। रेलवे का मानना है कि अतिरिक्त लाइन बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी और समय पर ट्रेन संचालन में मदद मिलेगी। इससे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा।

​माल ढुलाई होगी आसान और तेज​Image Credit : Istock03 / 07

​माल ढुलाई होगी आसान और तेज​

यह रेलखंड केवल यात्री ट्रेनों के लिए ही नहीं बल्कि मालगाड़ियों के लिए भी बेहद अहम माना जाता है। इस मार्ग से कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों से सामान उत्तर भारत और नेपाल तक पहुंचाया जाता है। रक्सौल और नेपाल की ओर जाने वाली मालगाड़ियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण रास्ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामानों की ढुलाई और तेजी से हो सकेगी।

​उद्योग और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा​Image Credit : Istock04 / 07

​उद्योग और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा​

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र में औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी। बेहतर रेल संपर्क होने से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और उद्योगों को फायदा होगा। बिहार और आसपास के क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। रेलवे का मानना है कि यह परियोजना पूर्वी और उत्तरी भारत के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी।

​बड़े औद्योगिक केंद्रों को मिलेगा लाभ​Image Credit : Istock05 / 07

​बड़े औद्योगिक केंद्रों को मिलेगा लाभ​

यह रेल मार्ग कई बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़ा हुआ है। बाढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट, जवाहर सुपर थर्मल पावर प्लांट और बीरगंज आईसीडी जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों की माल ढुलाई इसी मार्ग से होती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक और बढ़ेगा। इसलिए अभी से अतिरिक्त बुनियादी ढांचा तैयार करना जरूरी था। तीसरी लाइन इस जरूरत को पूरा करेगी।

​पटना-कोलकाता कनेक्टिविटी होगी मजबूत​Image Credit : Istock06 / 07

​पटना-कोलकाता कनेक्टिविटी होगी मजबूत​

इस परियोजना से पटना और कोलकाता के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा। यात्रियों को बेहतर और तेज यात्रा सुविधा मिल सकेगी। साथ ही माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। रेलवे का कहना है कि यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है ताकि लंबे समय तक इस रूट पर ट्रेनों का संचालन बिना बाधा जारी रह सके।

​बिहार के विकास में मील का पत्थर बनेगी परियोजना​Image Credit : Istock07 / 07

​बिहार के विकास में मील का पत्थर बनेगी परियोजना​

किउल-झाझा तीसरी रेल लाइन परियोजना बिहार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे न केवल रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी। यात्रियों को बेहतर सुविधा, उद्योगों को तेज परिवहन और व्यापार को मजबूत कनेक्टिविटी मिलने से बिहार को विकास की नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। रेलवे की यह परियोजना आने वाले समय में राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

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