दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सोमवार को पूर्व राज्यसभा सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) शिकायत को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह मामला महाराष्ट्र के 'बांदेर कोल ब्लॉक' आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ था। अदालत के इस फैसले के साथ ही 27 मार्च 2014 को दर्ज किए गए कोयला ब्लॉक आवंटन के सबसे पुराने लंबित मामलों में से एक पर पूरी तरह से पर्दा गिर गया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज शिकायत को खारिज करते हुए बेहद महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की।
बुनियाद ही खत्म हो गई: अदालत ने कहा, "चूंकि मुख्य अपराध (Predicate Offence) का ट्रायल पहले ही बरी होने (Acquittal) के साथ समाप्त हो चुका है, इसलिए PMLA की धारा 3 और धारा 70 के तहत कार्यवाही का आधार ही पूरी तरह समाप्त (Vanished) हो गया है। इसके मद्देनजर, इस कार्यवाही को बंद किया जाता है और शिकायत खारिज की जाती है।"
मुख्य अपराध के बिना PMLA का वजूद नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध मूल अपराध से स्वतंत्र और अलग है, लेकिन इसका अस्तित्व मुख्य (अनुसूचित) अपराध और उससे पैदा हुई काली कमाई (Proceeds of Crime) पर ही निर्भर करता है। एक बार जब आरोपी मुख्य अपराध से बरी हो जाता है, तो किसी भी प्रकार की 'Proceeds of Crime' का सवाल ही पैदा नहीं होता।
इन्हें भी मिली बड़ी राहत
इसी साल 27 मार्च को विशेष सीबीआई अदालत ने मुख्य मामले में विजय दर्डा और अन्य को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि कोल ब्लॉक्स का आवंटन एक उच्च-स्तरीय समिति (High-Powered Panel) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का एक "नीतिगत फैसला" था। मुख्य मामले में बरी होने के बाद, अब कोर्ट ने ईडी की इस शिकायत को भी खारिज कर दिया है। इस फैसले से विजय दर्डा और उनके बेटे देवेंद्र दर्डा के अलावा मैसर्स एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड (M/s AMR Iron and Steel Private Limited), मनोज कुमार जायसवाल और अन्य आरोपियों को भी पूरी तरह से राहत मिल गई है।
