इस नए प्लांट की उत्पादन क्षमता बहुत बड़ी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, यहां हर दिन करीब 10 लाख किलो दही, मिस्टी दही, योगर्ट, लस्सी और छाछ का उत्पादन किया जाएगा। इसके साथ ही यह प्लांट सिर्फ दही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़ा डेयरी कॉम्प्लेक्स होगा।
अमूल के इस प्लांट में हर दिन करीब 15 लाख लीटर दूध को प्रोसेस किया जाएगा। यहां दूध से बनने वाले कई प्रोडक्ट्स भी तैयार होंगे, जैसे कि आइसक्रीम, पनीर, घी, फ्लेवर्ड मिल्क और UHT दूध। यह पूरा सिस्टम आधुनिक तकनीक से लैस होगा, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव होगा।
इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। इसे गुजरात के आनंद स्थित काइरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (जो अमूल ब्रांड का संचालन करता है) द्वारा विकसित किया जाएगा। पहले चरण में मुख्य उत्पादन यूनिट तैयार होंगी और दूसरे चरण में विस्तार किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल का डेयरी बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसकी कीमत करीब 89,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इसमें हर साल 12% से ज्यादा की वृद्धि का अनुमान है। अमूल पहले से ही राज्य में मजबूत स्थिति में है और रोजाना 10 लाख लीटर से ज्यादा दूध बेच रहा है। कंपनी 14 जिलों में दूध संग्रह नेटवर्क चला रही है, जिसमें 1.2 लाख से अधिक महिला दूध उत्पादक जुड़ी हुई हैं।
अमूल इस प्लांट के जरिए खास तौर पर बंगाल के पारंपरिक स्वादों पर ध्यान दे रहा है। यहां की मिस्टी दही और टोक दही की मांग बहुत ज्यादा है। कंपनी का मानना है कि पूर्वी भारत में अभी बड़े पैमाने पर संगठित डेयरी उद्योग की कमी है, इसलिए यह निवेश इस कमी को पूरा करेगा। शुरुआत में यह प्लांट कोलकाता और आसपास के जिलों को सप्लाई देगा, जिससे ताजगी और कम कीमत का फायदा मिलेगा।
अमूल के इस परियोजना से क्षेत्र में हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। अमूल का मॉडल किसानों को सीधे जोड़ता है, जिससे वे सिर्फ दूध बेचने वाले नहीं बल्कि पूरी वैल्यू चेन का हिस्सा बन जाते हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ती है और उन्हें बेहतर दाम मिलते हैं। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, दूध आपूर्ति नेटवर्क भी और मजबूत होगा।
अमूल पहले से ही भारत का सबसे बड़ा फूड ब्रांड माना जाता है, जिसकी वैल्यू करीब 4.1 अरब डॉलर है। यह रोजाना करीब 3.1 करोड़ लीटर दूध प्रोसेस करता है। कंपनी 50 से ज्यादा देशों में अपने उत्पाद निर्यात करती है और अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भी पहुंच बना चुकी है। हाल के वर्षों में वैश्विक संकटों के बावजूद अमूल की बिक्री और निर्यात लगातार बढ़ा है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति और मजबूत हुई है।