सबसे पहले कार के AC फिल्टर की जांच करनी चाहिए। लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद एयर फिल्टर में धूल और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे हवा का फ्लो कम हो जाता है। इसका सीधा असर कूलिंग पर पड़ता है। ऐसे में फिल्टर की सफाई या जरूरत पड़ने पर उसे बदलवाना जरूरी होता है। साफ फिल्टर AC की परफॉर्मेंस को काफी बेहतर बना सकता है।
कार AC की कूलिंग कम होने की एक बड़ी वजह रेफ्रिजरेंट गैस का कम होना भी हो सकती है। अगर AC गैस लीक हो रही हो या उसका लेवल कम हो जाए तो ठंडी हवा आना कम हो जाती है। ऐसे में किसी अच्छे सर्विस सेंटर पर जाकर गैस चेक करवानी चाहिए। जरूरत होने पर गैस रिफिल करवाने से AC की कूलिंग दोबारा बेहतर हो सकती है।
कई बार AC कंडेंसर में धूल, मिट्टी या कचरा जमा हो जाता है। कंडेंसर कार के सामने वाले हिस्से में होता है और इसका काम गर्म हवा को बाहर निकालना होता है। अगर यह गंदा हो जाए, तो AC ठीक से ठंडा नहीं कर पाता। इसलिए समय-समय पर कंडेंसर की सफाई करवाना भी जरूरी है।
अगर कार लंबे समय तक धूप में खड़ी रहती है, तो केबिन का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में AC को पूरी तरह ठंडा करने में ज्यादा समय लगता है। कार में बैठने के बाद पहले कुछ मिनट खिड़कियां खोल दें, ताकि गर्म हवा बाहर निकल जाए। इसके बाद AC चलाने से कूलिंग जल्दी महसूस होगी।
जानकार सलाह देते हैं कि AC ऑन करते समय शुरुआत में कार को रीसर्कुलेशन मोड पर रखें। इससे बाहर की गर्म हवा अंदर नहीं आती और केबिन जल्दी ठंडा हो जाता है। कई लोग हमेशा फ्रेश एयर मोड इस्तेमाल करते हैं, जिससे AC पर ज्यादा दबाव पड़ता है।
कार के AC सिस्टम में कम्प्रेसर की भूमिका भी काफी अहम होती है। अगर कम्प्रेसर सही से काम नहीं कर रहा तो कूलिंग कमजोर हो सकती है। AC से अजीब आवाज आना, हवा का ठीक से ठंडा न होना या बार-बार कूलिंग कम होना कम्प्रेसर खराब होने के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत मैकेनिक से जांच करवानी चाहिए।
समय-समय पर AC सर्विस करवाना भी जरूरी है। नियमित सर्विस से छोटी समस्याएं पहले ही पकड़ में आ जाती हैं और बाद में बड़े खर्च से बचाव हो सकता है। साथ ही कार के AC का इस्तेमाल सर्दियों में भी कभी-कभी करना चाहिए, ताकि सिस्टम सही हालत में बना रहे।