अध्यात्म

Aadi Masam 2026: आदि मास 2026 कब से शुरू होगा- जानें दक्षिण भारत के इस पवित्र महीने का महत्व, परंपराएं और प्रमुख पर्व

Aadi Masam 2026: आदि मास 2026 की शुरुआत 17 जुलाई और समापन 17 अगस्त को होगा। जानें तमिल कैलेंडर के इस पवित्र महीने का महत्व, विशेष तिथियां और इस महीने में विवाह क्यों नहीं किए जाते।

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आदि मास कब से शुरू होगा, क्या है इसका महत्व (AI Image)

Aadi Masam 2026: उत्तर भारत में जिस तरह सावन का इंतजार भगवान शिव के भक्तों को रहता है, उसी तरह दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में लोग आदि मासम (Aadi Masam) का बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह महीना देवी शक्ति की आराधना, मंदिरों में विशेष उत्सव और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है। पूरे महीने तमिलनाडु के कई प्रसिद्ध अम्मन मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और घरों में भी पूजा-पाठ का विशेष माहौल देखने को मिलता है।

Aadi Masam 2026 Start and End Date

साल 2026 में आदि मासम 17 जुलाई, शुक्रवार से शुरू होकर 17 अगस्त, सोमवार तक रहेगा। तमिल सौर पंचांग के अनुसार इसकी शुरुआत उस दिन होती है, जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है। यही वजह है कि इस महीने को आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

आदि मासम 2026 कब से कब तक रहेगा

विवरणतिथि
आदि मासम की शुरुआत17 जुलाई 2026, शुक्रवार
आदि मासम का समापन17 अगस्त 2026, सोमवार

आदि मासम क्या होता है

अगर आपने कभी तमिलनाडु या दक्षिण भारत की धार्मिक परंपराओं को करीब से देखा है, तो आपने महसूस किया होगा कि आदि मासम वहां सिर्फ एक महीना नहीं, बल्कि आस्था का उत्सव होता है। इस दौरान देवी अम्मन के मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है, सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना होती है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

इस महीने का संबंध केवल धार्मिक मान्यताओं से ही नहीं, बल्कि प्रकृति और खेती-किसानी से भी है। दरअसल, यही वह समय होता है जब दक्षिण भारत में मानसून अपनी रफ्तार पकड़ता है और किसान नई फसल की तैयारी शुरू करते हैं। इसलिए तमिल संस्कृति में आदि मासम को नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।

आदि मासम का क्या महत्व है

आदि मासम को देवी शक्ति की उपासना का महीना कहा जाता है। मां पार्वती, दुर्गा, काली, मारियम्मन और आंडाल के मंदिरों में पूरे महीने विशेष पूजा होती है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई आराधना से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की परेशानियां दूर होने का आशीर्वाद मिलता है।

इसी कारण कई महिलाएं पूरे महीने या फिर मंगलवार और शुक्रवार का व्रत रखती हैं। देवी को हल्दी, कुमकुम, नारियल, फूल और मीठे प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। गांवों से लेकर शहरों तक इस महीने का धार्मिक उत्साह साफ दिखाई देता है।

आदि मासम में कौन-कौन से बड़े पर्व आते हैं

आदि मासम की खास बात यह है कि पूरे महीने अलग-अलग तिथियों पर कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं।

  1. आदि वेल्ली यानी महीने का हर शुक्रवार देवी लक्ष्मी और अम्मन की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मंदिरों में विशेष अभिषेक और श्रृंगार किया जाता है।
  2. आदि चेव्वई यानी मंगलवार देवी दुर्गा और मारियम्मन की आराधना को समर्पित होता है। कई महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस दिन व्रत रखती हैं।
  3. आदि पेरुक्कु इस महीने का सबसे लोकप्रिय त्योहार माना जाता है। यह जल, नदियों और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। वर्ष 2026 में यह 3 अगस्त को मनाया जाएगा।
  4. वहीं आदि अमावसै पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस साल यह 12 अगस्त को पड़ेगी।
  5. इसी महीने आदि पूरम का पर्व भी आता है, जिसे श्रीवैष्णव परंपरा में देवी आंडाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

आदि मासम में विवाह क्यों नहीं होते हैं

यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। दरअसल, तमिल समाज में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि आदि मासम में विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्यक्रम नहीं रखे जाते। लेकिन इसे धार्मिक निषेध मानना पूरी तरह सही नहीं होगा।

जानकार बताते हैं कि पुराने समय में यह खेती की तैयारी का मौसम होता था। परिवार कृषि कार्यों में व्यस्त रहते थे, इसलिए विवाह जैसे बड़े आयोजन टाल दिए जाते थे। धीरे-धीरे यही सामाजिक परंपरा धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन गई। आज भी कई परिवार अपनी पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने विवाह नहीं करते, जबकि कुछ समुदाय शुभ मुहूर्त मिलने पर विवाह भी संपन्न कराते हैं।

Medha Chawla
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

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