Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: भगवान जगन्नाथ की पूजा में आरती का विशेष महत्व माना जाता है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान देशभर के मंदिरों और घरों में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विधि-विधान से पूजा करते हैं। पूजा के अंत में भगवान की आरती गाने की परंपरा है, जिसे अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से आरती करने पर भगवान जगन्नाथ भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। आगे पढ़ें जगन्नाथ जी की आरती (Lord Jagannath Aarti) के लिरिक्स...
पूजा के बाद करें जगन्नाथ जी की आरती
यदि आपने भगवान जगन्नाथ की पूजा, भोग और पुष्प अर्पित कर लिए हैं, तो अंत में श्रद्धापूर्वक 'ॐ जय जगन्नाथ प्रभु' का गायन करना चाहिए।
भगवान जगन्नाथ जी की आरती लिरिक्स
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु, स्वामी जय जगन्नाथ प्रभु।
बेड़ा पार करा दे, बेड़ा पार करा दे,
भवसागर से तू॥
भक्त खड़ा तेरे द्वारे, आस लिए देवा।
स्वामी आस लिए देवा।
चाहूँ मैं केवल, अपना तुच्छ-सा फल-मेवा॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
सिंह द्वार पर आया, लेकर तेरा नाम।
स्वामी लेकर तेरा नाम।
यहीं से तूने लिया था, दासिया को फलधाम॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
नील चक्र जो देखा, मन में हर्ष हुआ।
स्वामी मन में हर्ष हुआ।
पतित-पावन तेरा, भंजन कष्ट किया॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
गरुड़ स्तंभ के पीछे, भक्तन की लगी भीड़।
स्वामी भक्तन की लगी भीड़।
पाकर दर्श प्रभु के, नैनों से बही नीर॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
रत्न वेदी पर साजे, भाई-बहन के संग।
स्वामी भाई-बहन के संग।
शंख, घंट, मंजीरा, और बाजे हैं मृदंग॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
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भेद न जात-धर्म का, नाथ तेरे आगे।
जगन्नाथ तेरे आगे।
सब भक्तिवश होकर, महिमा तेरी गावे॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
योगक्षेम की चिंता, पथ में ना कोई आए।
कभी पथ में ना कोई आए।
बंधु महंत को तूने, हाथों से खिलवाए॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
भक्तों से मिलने को, रथ पर प्रभु आए।
स्वामी रथ पर प्रभु आए।
सागर की लहरों संग, भक्त उमड़ आए॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
दुख हर लो दुखियों के, जगत के पालनहार।
स्वामी जगत के पालनहार।
जगत के नाथ हो, स्वामी करो जग का उद्धार॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
कुंदन दीन पुकारे, नाथ सुनो दुखड़ा मेरा।
नाथ सुनो दुखड़ा मेरा।
प्राण छूटे जब घट से, देखूँ तेरा मुखड़ा॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु॥
ॐ जय जगन्नाथ प्रभु, स्वामी जय जगन्नाथ प्रभु।
बेड़ा पार करा दे, बेड़ा पार करा दे,
भवसागर से तू॥
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जगन्नाथ जी की आरती के लिरिक्स (Shree Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics)
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।
मंगलकारी नाथ आपदा हारी,
कंचन को धूप दीप ज्योत जगमगारी।
अगर कपूर बाती भाव से धारी,
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी।
घर-घरन बजता बाजे बंसुरी,
झांझ और मृदंग बाजे, ताल खनजरी।
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।
निरखत मुखारविंद, परसत चरणारविंद,
जगन्नाथ स्वामी के गूंजे वेद की वाणी।
जगन्नाथ स्वामी के भोग लागे बैकुंठपुरी,
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी।
इंद्रदमन सिंह गजे, रोहिणी खड़ी,
मार्कंडेय संग गंगा आनंद भरी।
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।
शरणागत मुनि द्वारे ब्रह्म-वेद बखानी,
धन्य-धन्य हो प्रभु, आनंद की निशानी।
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
आरती श्री बैकुंठ मंगलकारी।
जगन्नाथ जी की आरती करते समय किन बातों का ध्यान रखें
रथयात्रा के दिन जगन्नाथ जी की आरती करते समय भगवान के समक्ष घी या कपूर का दीपक जलाएं। शांत मन से भगवान का ध्यान करें और पूरे परिवार के साथ आरती गाएं। आरती के बाद भगवान को भोग अर्पित करें और अंत में प्रसाद सभी श्रद्धालुओं में बांटें। मान्यता है कि श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ की गई आरती भगवान जगन्नाथ को शीघ्र प्रसन्न करती है तथा भक्त के जीवन में सुख, शांति और मंगल का संचार करती है।
