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ये आसान सा आसन दूर करेगा थकान और सुस्ती, जानें क्या करने से बढ़ेगी शरीर में चुस्ती

रुटीन के तनाव और काम में हम भले ही शरीर से न थके हों लेकिन मानसिक थकान बहुत होती है। ऐसे में शरीर भी थकान और सुस्ती महसूस करता है। ऐसे में एक आसन या क्रिया आपकी मदद कर सकती है। इसे करने से बॉडी में रक्त संचार बढ़ता है और एनर्जी फील होती है।

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कौन सा आसन करने से दूर होगी थकान और सुस्ती

Yoga Tips: भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे नित्य योग अभियान के अंतर्गत लोगों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ आसान लेकिन असरदार योग अभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में एक सरल योग क्रिया 'भुजबन्ध-शक्ति-विकासक' को विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है। यह अभ्यास उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, जो कंधों, भुजाओं और ऊपरी शरीर की कमजोरी, थकान या जकड़न से परेशान रहते हैं। नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक शक्ति में इजाफा होता है, बल्कि दिनभर बनी रहने वाली सुस्ती भी दूर होती है और शरीर में ताजगी महसूस होती है।

भुजबन्ध-शक्ति-विकासक योग क्या है और क्यों है खास

भुजबन्ध-शक्ति-विकासक एक ऐसी योग क्रिया है, जो सीधे तौर पर हाथों और कंधों की मांसपेशियों को सक्रिय करती है। इस अभ्यास के दौरान भुजाओं की निरंतर गति से ऊपरी शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे मांसपेशियों को पोषण मिलता है। इसका नियमित अभ्यास करने से हाथ मजबूत और लचीले बनते हैं, साथ ही शरीर का पोश्चर भी धीरे-धीरे सुधरने लगता है। आज के समय में जब ज़्यादातर लोग घंटों कंप्यूटर या मोबाइल के सामने बैठे रहते हैं, ऐसे में यह योग अभ्यास कंधों की जकड़न और भारीपन को कम करने में मददगार साबित होता है।

भुजबन्ध-शक्ति-विकासक करने का तरीका और इसके फायदे

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस योग अभ्यास को घर पर बेहद आसानी से किया जा सकता है और इसके लिए किसी भी तरह के उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। इसे करने के लिए सबसे पहले दोनों पैरों को मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं और शरीर को ढीला छोड़ दें। अब दोनों हाथों की मुट्ठियां बांध लें और भुजाओं को कोहनी से मोड़ते हुए इस तरह रखें कि कोहनी और कंधे के बीच लगभग 90 डिग्री का कोण बन जाए। इसके बाद मुट्ठियों को सीध में रखते हुए हाथों को तेज गति से छाती के सामने लाएं और फिर पीछे की ओर ले जाएं। इस प्रक्रिया को लगातार आगे-पीछे दोहराएं। शुरुआत में 20 से 30 बार करना पर्याप्त होता है, बाद में अभ्यास बढ़ाया जा सकता है।

इस योग क्रिया से कई तरह के लाभ मिलते हैं। कंधों और भुजाओं की मांसपेशियां मज़बूत और गठीली बनती हैं। ऊपरी शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ने से थकान और आलस कम होता है। कंधों के दर्द और अकड़न में राहत मिलती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। नियमित अभ्यास से हाथों की ताकत बढ़ती है, आत्मविश्वास आता है और दिनभर सक्रिय रहने में मदद मिलती है।

Input: IANS

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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