World Elder Abuse Awareness Day: घर के बुजुर्ग सिर्फ परिवार के सदस्य नहीं होते, बल्कि पूरे परिवार का अनुभव और सहारा होते हैं। उन्होंने जिंदगी भर अपने बच्चों और परिवार के लिए मेहनत की होती है। लेकिन कई बार बढ़ती उम्र के साथ उन्हें सम्मान और देखभाल के बजाय उपेक्षा, ताने या गलत व्यवहार का सामना करना पड़ता है। चिंता की बात यह है कि ऐसे संकेत शुरुआत में बहुत छोटे और सामान्य लगते हैं, इसलिए परिवार के लोग भी उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
हर साल 15 जून को विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि बुजुर्गों के साथ होने वाला गलत व्यवहार सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं होता, बल्कि अनदेखी, अपमान, डराना या आर्थिक शोषण भी इसका हिस्सा हो सकता है। अगर शुरुआती संकेत (elder abuse signs hindi) रहते पहचान लिए जाएं, तो कई परेशानियों को रोका जा सकता है।
पहले की तरह खुश न दिखना
अगर घर के बुजुर्ग अचानक चुपचाप रहने लगें, बातचीत कम कर दें या हमेशा उदास दिखाई दें, तो इसे सिर्फ उम्र का असर समझकर टालना नहीं चाहिए। कई बार लगातार अपमानित महसूस करने या अनदेखा किए जाने की वजह से वे खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। यह बुजुर्गों के साथ गलत व्यवहार का शुरुआती संकेत हो सकता है।
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बार-बार चोट लगने की बात कहना
अगर किसी बुजुर्ग के शरीर पर अक्सर चोट के निशान दिखें या वे बार-बार गिरने की बात कहें, तो मामले को गंभीरता से देखना जरूरी है। हर चोट सिर्फ दुर्घटना नहीं होती। ऐसे मामलों में परिवार को ध्यान देना चाहिए कि कहीं उनके साथ गलत व्यवहार तो नहीं हो रहा।
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साफ-सफाई और देखभाल में अचानक कमी
जब किसी बुजुर्ग के कपड़े गंदे रहने लगें, समय पर खाना न मिले या दवाइयों का ध्यान न रखा जाए, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि उनकी अनदेखी का संकेत भी हो सकता है। कई बार बुजुर्ग अपनी जरूरतें बताने में झिझकते हैं, इसलिए परिवार को खुद इस पर ध्यान देना चाहिए।
पैसों को लेकर बढ़ती चिंता
अगर कोई बुजुर्ग अचानक पैसों की कमी की बात करने लगे, अपने खर्चों को लेकर परेशान दिखे या बैंक से जुड़े मामलों में असहज महसूस करे, तो यह भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। कई मामलों में बुजुर्गों पर आर्थिक दबाव डाला जाता है या उनकी जमा पूंजी का गलत इस्तेमाल किया जाता है।
किसी खास व्यक्ति से डरना
कुछ बुजुर्ग घर के किसी सदस्य या देखभाल करने वाले व्यक्ति के सामने असहज हो जाते हैं। वे खुलकर बात नहीं करते या घबराए हुए नजर आते हैं। अगर ऐसा बार-बार दिखे, तो परिवार को इसकी वजह समझने की कोशिश करनी चाहिए। कई बार डर के कारण बुजुर्ग अपनी परेशानी बता नहीं पाते।
समय रहते पहचानना है सबसे जरूरी
बुजुर्गों के साथ गलत व्यवहार का असर सिर्फ उनके शरीर पर नहीं, बल्कि उनके मन पर भी पड़ता है। इसलिए परिवार के लोगों को उनके व्यवहार, आदतों और भावनाओं में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। रोज कुछ समय उनके साथ बैठकर बात करना, उनकी बातें सुनना और उन्हें सम्मान देना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। याद रखिए, बुजुर्गों को इस उम्र में दवाइयों से ज्यादा अपनेपन और सम्मान की जरूरत होती है।
