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World Breastfeeding Week: स्तनपान से जुड़े 10 बड़े मिथ और उनके फैक्ट, नई मांओं के लिए जानना क्यों है जरूरी?

World Breastfeeding Week: विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर जानिए स्तनपान से जुड़े 10 सबसे बड़े मिथ और उनके पीछे के फैक्ट। नई मांओं को जरूर जाननी चाहिए बच्चे के पोषण से जुड़ी ये कंप्लीट गाइड...

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विश्व स्तनपान सप्ताह

World Breastfeeding Week: विश्व स्तनपान सप्ताह (1–7 अगस्त) केवल एक जागरूकता अभियान नहीं है, बल्कि मां और शिशु के सेहत से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण पहल है। भारत में आज भी स्तनपान को लेकर कई ऐसी पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं जो वैज्ञानिक तथ्यों से मेल नहीं खातीं हैं। कई परिवारों में जन्म के बाद शहद, घुट्टी या पानी पिलाने की सलाह दी जाती है, तो कहीं पहले पीले दूध (कोलोस्ट्रम) को फेंक दिया जाता है। इन गलत धारणाओं का असर सीधे नवजात की सेहत पर पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ (UNICEF) और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) की गाइडलाइंस स्पष्ट कहती हैं कि जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देना शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और संपूर्ण पोषण है। आइए जानते हैं स्तनपान से जुड़े 10 बड़े मिथ, उनके पीछे का विज्ञान और विशेषज्ञों की सलाह।

1. मिथ: पहला पीला दूध (कोलोस्ट्रम) गंदा होता है, इसे फेंक देना चाहिए

फैक्ट - कोलोस्ट्रम को चिकित्सा विज्ञान में 'Liquid Gold' कहा जाता है। यह सामान्य दूध से कम मात्रा में बनता है, लेकिन इसमें Secretory Immunoglobulin A (IgA), Lactoferrin, Leukocytes, Growth Factors और Vitamin A भरपूर होते हैं।

क्यों है जरूरी?

  • बच्चे की आंतों पर सुरक्षा परत बनाता है।
  • संक्रमण और दस्त का खतरा कम करता है।
  • नवजात की पहली प्राकृतिक वैक्सीन की तरह काम करता है।

2. मिथ: छोटे स्तनों वाली महिलाओं का दूध कम बनता है

फैक्ट - दूध बनने का संबंध स्तनों के आकार से नहीं, बल्कि Milk-Producing Glands और हार्मोन प्रोलैक्टिन (Prolactin) तथा ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) से होता है। जब बच्चा सही तरीके से बार-बार दूध पीता है, तब शरीर को अधिक दूध बनाने का संकेत मिलता है। इसे Supply and Demand Mechanism कहा जाता है।

3. मिथ: मां को सर्दी-जुकाम है तो स्तनपान रोक देना चाहिए

फैक्ट - सामान्य वायरल संक्रमण या सर्दी-जुकाम में अधिकांश मामलों में स्तनपान जारी रखा जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि जब मां का शरीर वायरस से लड़ता है तो बनने वाली एंटीबॉडी दूध के माध्यम से बच्चे तक पहुंचती हैं और उसकी सुरक्षा बढ़ाती हैं।

4. मिथ: पतला दूध मतलब कमजोर दूध

फैक्ट - मां का दूध समय के साथ बदलता रहता है। Foremilk अधिक पानी वाला और बच्चे की प्यास बुझाता है। जबकि Hindmilk अधिक फैट और कैलोरी वाला जो बच्चे के वजन बढ़ाने और मस्तिष्क के विकास में मददगार होता है। यानी दूध का पतला दिखना उसकी गुणवत्ता का पैमाना नहीं है।

5. मिथ: छह महीने से पहले बच्चे को पानी, शहद या घुट्टी देनी चाहिए

फैक्ट - यह भारत में सबसे आम और सबसे खतरनाक मिथकों में से एक है। WHO और IAP के अनुसार छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध देना चाहिए। मां के दूध में लगभग 87 प्रतिशत पानी होता है, इसलिए अलग पानी की जरूरत नहीं होती है।

6. मिथ: नौकरी करने वाली मां स्तनपान नहीं करा सकती

फैक्ट - आज Breast Pump और Milk Storage तकनीक के कारण कामकाजी महिलाएं भी सफलतापूर्वक स्तनपान करा सकती हैं।

ब्रेस्ट मिल्क सुरक्षित रखने की गाइड

स्थानसुरक्षित अवधि
कमरे का तापमान (25°C तक)लगभग 4 घंटे
रेफ्रिजरेटर (4°C)4 दिन
डीप फ्रीजर (-18°C)6 महीने तक
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - दूध बन रहा है कम और बच्चे का नहीं भर रहा पेट? आज ही सुधार लें ये 5 गलतियां

7. मिथ: फॉर्मूला दूध और मां का दूध बराबर हैं

फैक्ट - फॉर्मूला दूध पोषण का विकल्प हो सकता है, लेकिन मां के दूध की बराबरी नहीं कर सकता। मां के दूध में मौजूद - जीवित एंटीबॉडी, एंजाइम, हार्मोन, प्रीबायोटिक्स स्टेम सेल्स कुछ ऐसे तत्व हैं जो किसी भी कृत्रिम दूध में मौजूद नहीं होते हैं।

8. मिथ: बच्चा बार-बार दूध मांग रहा है, यानी दूध कम बन रहा है

फैक्ट - नवजात में Cluster Feeding सामान्य प्रक्रिया है। बार-बार दूध पीने से शरीर में प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ता है, जिससे भविष्य में अधिक दूध बनने लगता है। यदि लगातार दर्द हो या बच्चा वजन न बढ़ा रहा हो तो IBCLC Lactation Consultant से सलाह लें।

9. मिथ: स्तनपान कराने से मां कमजोर हो जाती है

फैक्ट - संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और आराम के साथ स्तनपान मां के लिए भी लाभकारी है। इससे गर्भाशय जल्दी सामान्य आकार में आता है। प्रसव के बाद रक्तस्राव कम हो सकता है। स्तन और अंडाशय के कैंसर का जोखिम कम होने से जुड़ा पाया गया है। टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम भी कम हो सकता है।

10. मिथ: एक साल के बाद मां का दूध बेकार हो जाता है

फैक्ट - एक वर्ष के बाद भी मां का दूध पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। WHO दो वर्ष या उससे अधिक समय तक, पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह देता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

बाल रोग विशेषज्ञ और IBCLC (International Board Certified Lactation Consultant) का मानना है कि स्तनपान की अधिकांश समस्याएं- जैसे निप्पल में दर्द, दूध कम लगना या बच्चा सही से दूध न पीना- सही तकनीक, सही लैच और समय पर विशेषज्ञ सलाह से काफी हद तक दूर की जा सकती हैं। इसलिए शुरुआती कठिनाइयों के कारण स्तनपान बंद करने के बजाय प्रशिक्षित विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेना बेहतर विकल्प है।

नई मांओं के लिए 7 गोल्डन टिप्स

  1. जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करें।
  2. पहले छह महीने तक केवल मां का दूध दें।
  3. शहद, घुट्टी और पानी देने से बचें।
  4. बच्चे की मांग के अनुसार दूध पिलाएं।
  5. सही लैच सुनिश्चित करें।
  6. पर्याप्त पानी, पौष्टिक भोजन और आराम लें।
  7. किसी भी समस्या पर बाल रोग विशेषज्ञ या प्रमाणित लैक्टेशन कंसल्टेंट से सलाह लें।

स्तनपान सप्ताह का खास संदेश

स्तनपान केवल शिशु का पहला भोजन नहीं, बल्कि उसकी पहली सुरक्षा कवच भी है। कोलोस्ट्रम में मौजूद IgA, Lactoferrin और अन्य प्रतिरक्षा तत्व, मां के शरीर में काम करने वाले Prolactin और Oxytocin जैसे हार्मोन, तथा WHO और IAP की वैज्ञानिक गाइडलाइंस यह स्पष्ट करती हैं कि स्तनपान से जुड़े अधिकांश मिथकों का कोई चिकित्सीय आधार नहीं है। विश्व स्तनपान सप्ताह का सबसे बड़ा संदेश यही है कि परंपराओं का सम्मान करते हुए भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय वैज्ञानिक तथ्यों और विशेषज्ञ सलाह के आधार पर लिए जाएं, ताकि हर नवजात को जीवन की सबसे सुरक्षित और स्वस्थ शुरुआत मिल सके।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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