Mukesh Khanna on Love and Marriage: अभिनेता मुकेश खन्ना जाना माना नाम हैं। शक्तिमान औऱ भीष्म पिता माह की भूमिका निभाकर वह घर-घर में लोकप्रिय हो गए थे। कुछ दिनों पहले मुकेश खन्ना ने प्यार और शादी को लेकर अपनी बात रखी थी। 67 साल के मुकेश खन्ना ने 'द फिल्मी चर्चा' नाम के एक पॉडकास्ट में बताया था कि सच्चा प्यार क्या होता है और उन्होंने शादी क्यों नहीं की।
पॉडकास्ट में बात करते हुए मुकेश खन्ना ने कहा था कि, 'सच्चा प्यार जिंदगी में सिर्फ एक ही बार होता है। इसके अलावा जो कुछ भी होता है, वह केवल आकर्षण या शारीरिक इच्छा है। यदि आप एक इंसान को आई लव यू कहते हैं और फिर दूसरे के पास चले जाते हैं, तो आप धोखेबाज हैं।'
ताउम्र शादी ना करने की बात पर मुकेश खन्ना ने साफ किया था कि वह शादी की संस्था का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं आम लोगों से कहीं ज्यादा शादी की व्यवस्था पर विश्वास रखता हूँ। लोग सोचते हैं कि अगर किसी ने शादी नहीं की, तो वह शादी का विरोधी है, पर ऐसा नहीं है। पत्नी कोई अचानक या संयोग से नहीं आती, वह भाग्य में लिखी होती है। अगर मेरी किस्मत में शादी होनी लिखी होती, तो अब तक हो चुकी होती। जिस महिला से मेरी शादी होनी तय है, वह कहीं न कहीं मौजूद जरूर होगी। जब नियति हमें साथ लाएगी, तब शादी अपने आप हो जाएगी।'
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मुकेश खन्ना के इस बयान से दो बातें निकलकर आती हैं। पहला तो ये कि क्या सच्चा प्यार बस एक बार होता है और ये कि क्या शादी वाकई भाग्य का खेल है। इन दोनों ही बातों पर बहुस से रिलेशनशिप कोच और मनोवैज्ञानिक अपनी राय रख चुके हैं। आइए जानते हैं कि क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स:
क्या शादी वाकई भाग्य का खेल है?
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि भाग्य या किसी एक खास इंसान की थ्योरी पर विश्वास करने से लोगों को रिश्तों में एक उम्मीद और भावनात्मक सुरक्षा मिलती है। यह विचार लोगों की चिंता को कम करता है कि उन्हें सही पार्टनर मिलेगा या नहीं। हालांकि, इसके कुछ नुकसान भी हैं। भाग्य के भरोसे बैठे रहने से इंसान रिश्तों में निष्क्रिय हो जाता है और बातचीत, आपसी समझ व मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलुओं को नजरअंदाज कर देता है।
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क्या सच्चा प्यार सिर्फ एक बार होता है?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह सोचना पूरी तरह सही नहीं है कि प्यार सिर्फ एक बार होता है। रिलेशनशिप साइकोलॉजी के शोध बताते हैं कि इंसान अपने जीवनकाल में अलग-अलग पड़ावों पर गहरे और सार्थक रोमांटिक रिश्ते बनाने में पूरी तरह सक्षम है। उम्र के साथ प्यार का स्वरूप बदल जाता है। ये कहते हैं कि शुरुआती उम्र का प्यार जहां उत्साह और आकर्षण से भरा होता है, वहीं ढलती उम्र का प्यार स्थिरता, भरोसे और आपसी देखभाल पर आधारित होता है।
