Elderly Women Mental Health: जब भी हम बुढ़ापे के बारे में सोचते हैं, तो सबसे पहले बीमारियों का ख्याल आता है। घुटनों का दर्द, कमजोर नजर, शुगर या ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं अक्सर चर्चा का हिस्सा बनती हैं। लेकिन एक ऐसी परेशानी भी है जो दिखती नहीं, फिर भी अंदर ही अंदर इंसान को तोड़ सकती है। यह परेशानी है अकेलापन और भावनात्मक तनाव।
खासकर बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह समस्या और भी बड़ी हो सकती है। जीवनभर परिवार, बच्चों और घर की जिम्मेदारियां निभाने वाली कई महिलाएं उम्र बढ़ने के साथ खुद को अकेला महसूस करने लगती हैं। उनकी बातें सुनने वाला कोई नहीं होता, उनकी भावनाओं को समझने वाला भी कम ही मिलता है। यही वजह है कि आज बुजुर्ग महिलाओं की मानसिक सेहत पर बात करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
बच्चे दूर चले जाते हैं घर तो रहता है लेकिन रौनक नहीं
एक समय था जब घर बच्चों की आवाजों से गूंजता था। लेकिन पढ़ाई, नौकरी या शादी के बाद बच्चे अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं। वे फोन पर बात तो करते हैं, लेकिन रोज साथ बैठकर बातें करने वाली बात अलग होती है।
ऐसे में कई बुजुर्ग महिलाएं दिन का बड़ा हिस्सा अकेले बिताती हैं। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन मन के अंदर खालीपन घर कर जाता है। यही अकेलापन धीरे-धीरे मानसिक परेशानी की वजह बन सकता है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: डायबिटीज ही नहीं, इन बीमारियों में भी रात में बार-बार आती है पेशाब
जीवनसाथी का साथ छूटना सबसे बड़ा झटका होता है
कई बुजुर्ग महिलाओं के लिए पति सिर्फ जीवनसाथी नहीं, बल्कि सबसे अच्छे दोस्त और हर सुख-दुख के साथी होते हैं। जब उनका निधन हो जाता है, तो जिंदगी अचानक बदल जाती है।
सालों से बनी दिनचर्या टूट जाती है। घर वही रहता है, लेकिन साथ चलने वाला व्यक्ति नहीं रहता। इस दर्द को शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। कई महिलाएं इस दुख को चुपचाप सहती रहती हैं और किसी से खुलकर बात भी नहीं कर पातीं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: Monsoon में आपके शरीर को वास्तव में क्या चाहिए होता है, आयुर्वेद के अनुसार कैसा होना चाहिए समर रुटीन
दूसरों का ख्याल रखते-रखते खुद को भूल जाती हैं
दिलचस्प बात यह है कि उम्र बढ़ने के बाद भी कई महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियां निभाती रहती हैं। वे पोते-पोतियों को संभालती हैं, घर के कामों में मदद करती हैं या परिवार के किसी बीमार सदस्य की देखभाल करती हैं।
पूरी जिंदगी दूसरों का ख्याल रखने की आदत के कारण वे अपनी भावनाओं और जरूरतों को पीछे छोड़ देती हैं। लेकिन हर इंसान को प्यार, अपनापन और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। जब यह नहीं मिलता, तो मन पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
शरीर के कुछ संकेतों को नजरअंदाज न करें
डॉ. आकांक्षा गुप्ता बताती हैं कि कई बार शरीर हमें पहले ही संकेत देने लगता है कि कुछ ठीक नहीं है। अगर किसी बुजुर्ग महिला को लगातार थकान महसूस हो रही है, नींद ठीक से नहीं आ रही, सिर भारी रहता है या बिना वजह शरीर में दर्द बना रहता है, तो इसे सिर्फ बढ़ती उम्र कहकर टालना सही नहीं है।
कई बार ये संकेत मन में चल रही चिंता, तनाव या अकेलेपन की ओर भी इशारा कर सकते हैं। ऐसे में परिवार और डॉक्टर दोनों की मदद लेना जरूरी होता है।
प्यार, बातचीत और साथ ही सबसे बड़ी दवा है
अच्छी बात यह है कि इस समस्या का समाधान सिर्फ दवाओं में नहीं छिपा है। परिवार का साथ, अपनेपन भरी बातें और सामाजिक जुड़ाव किसी भी बुजुर्ग महिला की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है।
अगर परिवार के लोग रोज कुछ समय उनके साथ बिताएं, उनकी बातें सुनें और उन्हें फैसलों में शामिल करें, तो वे खुद को महत्वपूर्ण महसूस करती हैं। आज कई बुजुर्ग महिलाएं नई चीजें सीख रही हैं, दोस्तों से जुड़ रही हैं और अपनी पसंद के कामों में समय बिता रही हैं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और मन भी खुश रहता है।
बुढ़ापा सिर्फ शरीर के कमजोर होने का नाम नहीं है। यह जिंदगी का वह पड़ाव भी है जहां भावनात्मक सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए बुजुर्ग महिलाओं की मानसिक सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनकी बातें सुनना, उनके साथ समय बिताना और उनकी भावनाओं को समझना शायद वह सबसे बड़ा उपहार है जो हम उन्हें दे सकते हैं। आखिर उम्र बढ़ने के साथ दवाओं से ज्यादा जरूरत अपनेपन और साथ की होती है।
