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रिजल्ट हो जाए खराब तो करें ये काम, प्रेमानंद महाराज ने बताया असफलता हैंडिल का मूलमंत्र

What To do after failing exams : वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने एग्जाम में फेल होने वाले बच्चों को इस स्थिति से निपटने का मूलमंत्र दिया है। आइए जानते हैं कि वह क्या है।

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प्रेमानंद महाराज ने बताया सफलता का सूत्र

What To do after failing exams : इन दिनों देशभर में बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट आ रहे हैं। कई स्टूडेंट्स अच्छे अंक लाते हैं, वहीं, कुछ बच्चे असफल भी हो जाते हैं। ऐसे समय में कई बार बच्चे निराशा, तनाव और डिप्रेशन में चले जाते हैं। इसी विषय पर संत प्रेमानंद महाराज ने एक प्रवचन में स्टूडेंट्स और अभिभावकों को महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं होती, बल्कि यह खुद को सुधारने का अवसर होती है। दिल्ली से आईं एक भक्त ने जब महाराज जी से पूछा कि मई -जून बच्चों के रिजल्ट घोषित होने का समय है। कुछ बच्चे असफल हो जाते हैं तो व्याकुल होकर या डिप्रेशन में आकर कुछ भयावह कृत्य कर लेते हैं तो ऐसे में उनके अंदर आध्यात्मिक बल कैसे लाया जाए।

इन कारणों से फेल हो जाते हैं बच्चे

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि कोई भी स्टूडेंट तभी फेल होता है, जब वह अपने विषय पर पर्याप्त अभ्यास नहीं करता। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों का ध्यान पढ़ाई से ज्यादा मोबाइल, गलत संगति और समय बर्बाद करने वाली आदतों में जा रहा है। घंटों मोबाइल चलाना, गंदे कंटेंट देखना, नशे की तरफ बढ़ना और कम उम्र में रिलेशनशिप जैसी चीजें स्टूडेंट्स की एकाग्रता को कमजोर कर रही हैं। इसी कारण बच्चे पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाते और परीक्षा में अच्छे परिणाम नहीं ला पाते हैं।

पढ़ाई में एकाग्रता जरूरी

उन्होंने कहा कि परीक्षा के प्रश्न उसी विषय से आते हैं, जो पूरे साल पढ़ाया जाता है। अगर कोई बच्चा उस विषय को मजबूत नहीं करेगा तो परेशानी होना स्वाभाविक है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह खुद को खत्म करने या डिप्रेशन में जाने जैसी गलती करे। महाराज जी ने कहा कि अगर इस साल सफलता नहीं मिली तो अगले साल मेहनत करके बेहतर परिणाम लाए जा सकते हैं।

आध्यात्मिक शिक्षा भी उतनी ही जरूरी

प्रेमानंद महाराज ने स्टूडेंट्स को आध्यात्मिकता से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक शिक्षा भी जरूरी है। गीता, भागवत और अच्छे संस्कार बच्चों के जीवन को सही दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि पहले गुरुकुलों में बच्चों को संयम, ब्रह्मचर्य और अनुशासन सिखाया जाता था। इसी कारण वहां से निकले विद्यार्थी बुद्धिमान, स्मृतिवान और समाज के लिए उपयोगी बनते थे।

माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान जरूरी

उन्होंने कहा कि आज के समय में कई बच्चे माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान तक नहीं करते हैं। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना और विरोध करना आम होता जा रहा है। ऐसे में परिवार और समाज दोनों परेशान हो रहे हैं। महाराज जी के अनुसार यदि बच्चों को बचपन से आध्यात्मिक शिक्षा और अच्छे संस्कार दिए जाएं तो उनमें बड़ा बदलाव आ सकता है।

खानपान और दिनचर्या का भी पड़ता है असर

उन्होंने भोजन और दिनचर्या को लेकर भी बात की। उनका कहना था कि पवित्र भोजन, मन का संयम और इंद्रियों पर नियंत्रण पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाता है। जब मन स्थिर रहता है, तभी स्मरण शक्ति मजबूत होती है और स्टूडेंट्स परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं।

असफल हो जाएं तो करें ये काम

प्रेमानंद महाराज ने यह भी कहा कि जीवन बहुत अनमोल है। इसे केवल एक परीक्षा के परिणाम से नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि वे असफलता से सीख लें, खुद को सुधारें और नई शुरुआत करें। निराशा में गलत कदम उठाना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा कब, कहां और किस पर हो जाए, यह कोई नहीं जानता है, इसलिए मनुष्य को हमेशा सकारात्मक रहकर प्रयास करते रहना चाहिए। मेहनत, संयम और अच्छे संस्कार ही जीवन को सफल बनाते हैं।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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