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Psychology: कैसे होते हैं बिना पॉलिश किए जूते पहनने वाले लोग? जानिए क्या कहता है मनोविज्ञान

Psychology: मनोविज्ञान कहता है कि किसी भी व्यक्ति का आकलन केवल एक आदत के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उसके व्यवहार, बातचीत, काम करने के तरीके और दूसरों के प्रति रवैये को भी समान महत्व देना जरूरी है।

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क्या सच में लापरवाह होते हैं बिना पॉलिश के जूते पहनने वाले लोग?

Psychology of unpolished shoes: किसी व्यक्ति की पहली छवि उसके कपड़ों और जूतों से बनती है। यही वजह है कि कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को समझना हो तो उसके जूतों पर भी नजर डालनी चाहिए। बहुत से लोग चकाचक पॉलिश वाले जूते पहनते हैं तो वहीं कुछ लोग बिना पॉलिश के ही जूते पहन लते हैं। हालांकि बिना पॉलिश किए जूते पहनना हमेशा लापरवाही का संकेत नहीं होता। मनोविज्ञान के अनुसार इसके पीछे कई अलग-अलग वजहें और व्यक्तित्व की विशेषताएं छिपी होती हैं।

क्या यह लापरवाही की निशानी है?

जरूरी नहीं। अगर कोई व्यक्ति हमेशा गंदे जूते पहनता है और अपनी व्यक्तिगत साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखता, तो यह अव्यवस्थित जीवनशैली या आत्म-देखभाल की कमी का संकेत हो सकता है। लेकिन केवल पॉलिश न करना किसी के व्यक्तित्व का अंतिम पैमाना नहीं हो सकता।

सादगी पसंद व्यक्तित्व

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि कुछ लोग जानबूझकर बहुत साधारण जीवनशैली अपनाते हैं। वे ब्रांड, फैशन या बाहरी दिखावे के बजाय अपने विचारों और व्यवहार को ज्यादा अहमियत देते हैं। ऐसे लोगों के लिए बिना पॉलिश के जूते कोई बड़ी बात नहीं होती।

रचनात्मक सोच वाले लोग

कुछ शोधों में यह पाया गया है कि रचनात्मक या क्रिएटिव लोग अक्सर अपने विचारों में इतने व्यस्त रहते हैं कि बाहरी सजावट पर कम ध्यान देते हैं। उनके लिए नए आइडिया और काम ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि यह हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता।

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काम को प्राथमिकता देने वाले

कुछ लोग अपने बाहरी दिखावे से ज्यादा काम और जिम्मेदारियों को महत्व देते हैं। उनके लिए जूतों की चमक से ज्यादा जरूरी समय पर ऑफिस पहुंचना या जरूरी काम पूरा करना होता है। ऐसे लोग व्यावहारिक सोच वाले होते हैं और छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते।

व्यस्त दिनचर्या का असर

हर दिन भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोगों के पास जूतों की देखभाल का समय ही नहीं होता। इसका मतलब यह नहीं कि वे गैर-जिम्मेदार हैं। कई बार परिवार, नौकरी और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच वे छोटी-छोटी चीजों को नजरंदाज कर देते हैं।

व्यक्तित्व को समझने में जल्दबाजी न करें

मनोविज्ञान कहता है कि किसी भी व्यक्ति का आकलन केवल एक आदत के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उसके व्यवहार, बातचीत, काम करने के तरीके और दूसरों के प्रति रवैये को भी समान महत्व देना जरूरी है। हो सकता है कि बिना पॉलिश के जूते पहनने वाला व्यक्ति अपने क्षेत्र का बेहद अनुशासित और सफल इंसान हो।

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तो किसी को जज करने से पहले हमेशा ध्यान रखें कि बिना पॉलिश किए जूते पहनना कई बार केवल एक आदत या समय की कमी का परिणाम होता है, न कि व्यक्तित्व की कमजोरी। कुछ लोग सादगी पसंद होते हैं, कुछ व्यस्त और कुछ दिखावे से दूर रहना पसंद करते हैं। इसलिए किसी की पहचान उसके जूतों की चमक से नहीं, उसके विचारों, व्यवहार और कर्मों से करना अधिक उचित है। वैसे भी व्यक्तित्व की असली चमक इंसान के चरित्र में होती है, जूतों की पॉलिश में नहीं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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