दोनों हाथों की उंगलियां मिलाकर ये मुद्रा करने से क्या होगा, इससे शरीर को क्या फायदा मिलेगा
- Edited by: मेधा चावला
- Updated Jan 29, 2026, 10:07 AM IST
what is kali mudra in Hindi (काली मुद्रा क्या होती है, कैसे करते हैं): सेहतमंद रहने के लिए हस्त मुद्राएं भी बहुत कारगर बताई जाती हैं। ऐसी ही एक मुद्रा है काली मुद्रा जिसमें दोनों हाथों की उंगलियां मिलाकर दोनों तर्जनी उंगलियों को ऊपर की ओर उठाया जाता है। लेकिन इस मुद्रा को करने से होता क्या है - जानते हैं।
काली मु्द्रा करने से क्या होता है (Pic: iStock)
what is kali mudra in Hindi (काली मुद्रा क्या होती है, कैसे करते हैं): क्या आपको भी लाइफ में मन का अशांत होना, डर, घबराहट, नींद न आना और तनाव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल, काम का दबाव और भविष्य की चिंता - ये सब बातें क्या आपको भी अंदर से थका रही हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय योग करने की सलाह देता है। जरूरी नहीं कि आप मुश्किल वाले आसन करें। आसान सी हस्त मुद्रा भी आपको इन परेशानियों से निपटने में सहयोग देगी। इसी में शामिल है काली मुद्रा, जिसे करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बना रहता है।
काली मुद्रा कैसे करते हैं
काली मुद्रा का अभ्यास करना बहुत आसान है। इसे सुखासन में बैठकर या ताड़ासन में खड़े होकर किया जा सकता है। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर तर्जनी उंगलियों को ऊपर की ओर सीधा रखा जाता है। सांस को धीरे-धीरे अंदर लें और बाहर छोड़ते समय मन में नकारात्मक विचारों को छोड़ने का भाव रखें। शुरुआत में दो से तीन मिनट पर्याप्त हैं। बाद में समय बढ़ाया जा सकता है।
काली मुद्रा करने से क्या होता है
आयुष मंत्रालय के अनुसार, काली मुद्रा शरीर को अंदर से ताकतवर बनाती है। यह मुद्रा मन के बोझ को हल्का करने, नकारात्मक सोच को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है।
योग शास्त्र के अनुसार, हमारे शरीर में ऊर्जा के बहाव के लिए नाड़ियां होती हैं। इनमें से सुषुम्ना नाड़ी सबसे मुख्य मानी जाती है, जो रीढ़ के बीच से होकर गुजरती है। जब इस नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह ठीक रहता है, तो मन शांत रहता है और शरीर संतुलन में रहता है। काली मुद्रा इसी ऊर्जा प्रवाह को साफ और सक्रिय करने में सहायक मानी जाती है। नियमित अभ्यास से मन की उलझनें कम होती हैं और ध्यान लगाने में आसानी होती है।
शारीरिक रूप से काली मुद्रा सांस की प्रक्रिया को बेहतर बनाती है। गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़े मजबूत होते हैं और शरीर में ऑक्सीजन का संचार अच्छा होता है। इससे शरीर में जकड़न और थकान कम होती है। लंबे समय तक बैठे रहने या तनाव के कारण अकड़न से भी धीरे-धीरे राहत मिलती है। रक्त संचार बेहतर होने से शरीर हल्का महसूस करता है।
काली मुद्रा का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
मानसिक स्वास्थ्य की बात करें तो काली मुद्रा का प्रभाव काफी गहरा माना जाता है। आजकल बच्चे हों या बड़े, सभी किसी न किसी मानसिक दबाव में रहते हैं। यह मुद्रा दिमाग में छाए धुंधलेपन को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में सहायक होती है। पढ़ाई करने वाले बच्चों और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी यह लाभकारी मानी जाती है।
भावनात्मक स्तर पर काली मुद्रा डर, गुस्सा और बेचैनी जैसी भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करती है। इस मुद्रा के अभ्यास से मन हल्का होता है और भावनाओं का संतुलन बनता है। व्यक्ति खुद को ज्यादा स्थिर और सुरक्षित महसूस करता है।
आध्यात्मिक रूप से काली मुद्रा को मूलाधार चक्र और मणिपुर चक्र से जोड़ा जाता है। मूलाधार चक्र हमें जमीन से जोड़ता है और सुरक्षा की भावना देता है, जबकि मणिपुर चक्र आत्मबल और आत्मविश्वास का केंद्र माना जाता है। इन दोनों चक्रों के सक्रिय होने से व्यक्ति में साहस, स्थिरता और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
इनपुट : आईएएनएस
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