पिछले दिनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा अपने बड़े बेटे तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से अलग करने की खबर काफी चर्चा में रही। तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर अनुष्का यादव संग अपने रिलेशनशिप की बात लिखी थी जिसके बाद लालू प्रसाद ने ये फैसला लिया था। हालांकि बाद में तेज प्रताप ने लिखा कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था और किसी लड़की के साथ उनकी फेक तस्वीरें पोस्ट की गई थीं। फिर भी यह मामला खूब सुर्खियों में रहा। सोशल मीडिया में लोग इस मामले पर बंटे दिखे। कुछ लोगों का मानना था कि लालू यादव ने ठीक किया तो वहीं बहुत से ऐसे लोग भी थे जिनका मानना है कि बतौर पिता लालू को इतना सख्त कदम नहीं उठाना चाहिए।
क्या कहती है सही पैरेंटिंग
जब कोई बच्चा परिवार की मर्जी के खिलाफ कोई फैसला लेता है या किसी से रिश्ता रखता है, तो एक पिता के लिए यह स्थिति भावनात्मक और सामाजिक रूप से कठिन हो सकती है। लेकिन इस नाजुक दौर में संवेदनशीलता, समझदारी और धैर्य से ही सही रास्ता निकल सकता है। नीचे कुछ सुझाव हैं जो एक पिता को अपनाने चाहिए:
1. बातचीत बंद न करें:
पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चा अगर अपने मन की कर रहा है तो उससे नाराज़ होकर दूरी बनाना समस्या को बढ़ा सकता है। जरूरत है कि पिता अपने बच्चे से खुलकर, लेकिन बिना गुस्से के संवाद करें।
2. सुनें भी, सिर्फ बोलें नहीं:
आदर्श पेरेंटिंग कहती है कि माता-पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वह पहले यह समझने की कोशिश करें कि बच्चा उस रिश्ते में क्यों है। क्या वह रिश्ता सच्चे प्यार, समझदारी और भरोसे पर टिका है?
3. आत्ममंथन करें:
पेरेंट्स को जरूरत है कि स्थिति का सही से आकलन करें। उन्हें आत्ममंथन भी करना होगा। उन्हें ये देखना होगा कि क्या वह सिर्फ जाति, धर्म, सामाजिक प्रतिष्ठा या "लोग क्या कहेंगे" के कारण विरोध कर रहे हैं? उन्हें ये भी सोचना होगा कि क्या वह बच्चे की खुशी से ज़्यादा समाज की सोच को तो महत्व नहीं दे रहे हैं?
4. खुले मन से संवाद करें:
अगर पेरेंट्स को लगता है कि उनका बेटा गलत रिलेशनशिप में है तो उससे बात करें और उसे बताएं कि ये रिश्ता क्यों गलत है। केवल "हमें पसंद नहीं" कहने से बात नहीं बनेगी। अगर आपको वाकई उस रिश्ते में कोई गंभीर कमी दिखती है, तो बच्चे को शांत दिमाग से समझाएं।
5. अपनी परेशानी बताएं:
ऐसी किसी भी परिस्थिति में पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने बच्चों को बताएं कि आप उस रिलेशनशिप को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं। आपकी चिंता जो भी हो बच्चों से खुलकर बात करें। लेकिन यह सच्चाई से करें, ना कि इमोशनली ब्लैकमेल करके नहीं।
6. अपने रिश्ते को सबसे ऊपर रखें:
अगर पेरेंट्स को किसी भी कारण से रिश्ता स्वीकार करना कठिन लगता है, तो बच्चे से समय मांगें, लेकिन रिश्ता तोड़ने के लिए दबाव न डालें। धीरे-धीरे परिस्थितियां साफ हो सकती हैं। हमेशा ध्यान रखें कि कोई भी रिश्ता टूट सकता है, लेकिन पिता-पुत्र/पुत्री का रिश्ता जिंदगी भर का होता है। अगर आप अपने बच्चे को खो देंगे, तो बाकी सब अर्थहीन लगेगा।
7. कोशिश करें लेकिन हकीकत को समझें:
आपसे अगर बच्चा समझ नहीं पा रहा है तो किसी ऐसे रिश्तेदार, गुरु या समझदार व्यक्ति से बात करवाएं जिसे बच्चा भी सम्मान देता हो। लेकिन इस हकीकत को भी ध्यान में रखें कि आज की पीढ़ी खुद निर्णय लेना चाहती है। उन्हें नियंत्रित करने की बजाय उनका मार्गदर्शन करें।
एक पिता का धर्म है बच्चे की भलाई चाहना, न कि अपनी ज़िद को सबसे आगे रखना। अगर उन्हें लगता है कि बच्चे का फैसला वाकई गलत है, तो प्यार से समझाइए ना कि उससे मुंह मोड़ लिजिए। अगर फैसला ठीक है, तो दिल बड़ा कीजिए, क्योंकि सच्ची परवरिश का मतलब होता है अपने बच्चों को खुद से बेहतर इंसान बनते देखना, भले वो आपके रास्ते से न जाएं।
