Goat Shayari in Hindi: शेर-ओ-शायरी उर्दू साहित्य की एक अनमोल विधा है, जो भावनाओं को बेहद खूबसूरत और असरदार अंदाज़ में अभिव्यक्त करती है। शायरी सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से निकला एहसास होती है। मीर, ग़ालिब, फिराक़, जौन, साहिर, फैज़ जैसे शायरों ने अपने कलाम से इस विधा को अमर बना दिया। शायरी में प्रेम, दर्द, विरह, खुशी, समाज, सियासत और ज़िंदगी के तमाम रंगों को दो पंक्तियों में समेटने की ताक़त होती है। बकरीद आने को है। दुनिया के तमाम देशों में कुर्बानी की तैयारी है। कई मशहूर शायरों ने बकरों पर बेहद उम्दा शेर लिखे हैं। आइए पढ़ें बकरीद के माहौल में बकरी पर लिखे कुछ चुनिंदा शेर:
Goat Shayari | Goat Par Shayari | बकरे पर शायरी
1. यूं सजा रक्खा था क़ुर्बानी का बकरा शोख़ ने
दिल हमारा देखते ही देखते बकरी हुआ
- ज़फ़र इक़बाल

Goat Shayari in Hindi 2 line
2. गिलहरी, सांप, बकरी और चीता साथ होते हैं
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है
- ज़ेहरा निगाह
3. जिस के पंजे से कोई ख़ुश-नसीब ही छूटता है
मुझे बरसों पहले गांव में अपनी चितकबरी बकरी याद आ गई
- मोहम्मद हनीफ़ रामे
4. अपनी बकरी का मुंह चिड़ाते वक़्त
क्या ख़ुश आती है ये तुम्हारी ''में''
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा

Goat Par Shayari
5. मसलख़-ए-इश्क़ में खिंचती है ख़ुश-इक़बाल की खाल
भेड़ बकरी से है कम-क़द्र बद-आमाल की खाल
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
6. मैं शिकार हूं किसी और का मुझे मारता कोई और है
मुझे जिस ने बकरी बना दिया वो तो भेड़िया कोई और है
- ज़ियाउल हक़ क़ासमी
7. किसी नद्दी के पास इक बकरी
चरते चरते कहीं से आ निकली
- अल्लामा इक़बाल
8. हम ने बकरी के बच्चों को कमरों में नचाना छोड़ दिया
नाराज़ न हो अम्मी हम ने हर शौक़ पुराना छोड़ दिया
- राजा मेहदी अली ख़ां

Shayari on Goat in Hindi
9. गाय जब रम्भाती आई
बकरी कुछ शरमाती आई
- हैदर बयाबानी
10. मुल्क में मेरे अम्न की ख़्वाहिश जान-ए-मन
बकरी जैसे बीच में सौ क़स्साबों के
- फ़रहत शहज़ाद
11. ज़ैद से ज़ैदी बना और बक्र से बकरी हुआ
सामना बुज़दिल से था मैं इस लिए बकरी हुआ
- ज़फ़र इक़बाल
12. ये सआदत उस को 'अली' ने दी जो वज़ीर-ए-आज़म-ए-हिन्द है
कि बदौलत उस की जहान में नहीं ख़ौफ़ बकरी को बाग से
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा

Goat Shayari Hindi
13. नफ़रतों की जंग में देखो तो क्या क्या खो गया
सब्ज़ियां हिन्दू हुईं बकरा मुसलमां हो गया
- साग़र ख़य्यामी
14. क़ामत में बकरा ऊंट की क़ीमत का हम-ख़याल
दिल बैठता है उठते ही क़ुर्बानी का सवाल
- सय्यद मोहम्मद जाफ़री
15. चला आता है ख़ुद अंजाम से अंजान है बकरा
नहीं हरगिज़ नहीं किस ने कहा नादान है बकरा
- शाहीन इक़बाल असर

बकरे पर शायरी
16. ताला लगा के बांध रखा था रक़ीब ने
बकरा खड़ा है चोर मगर खाल ले गए
- ज़फ़र इक़बाल
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