लाइफस्टाइल

Shayari of the Day: आज की शायरी में पढ़ें सागर निजामी का मशहूर शरे, जानें क्या कहती है ये खूबसूरत शायरी

Shayari of the day (आज की शायरी): सागर निजामी की शायरी सरल, प्रवाहपूर्ण और दिल को छूने वाली होती थी जिसमें प्रेम की मस्ती, वफा की हैरत और ईश्वरीय समर्पण साफ साफ झलकता था। ऐसा ही उनका एक मशहूर शेर है: सज्दे मिरी जबीं के नहीं इस क़दर हक़ीर, कुछ तो समझ रहा हूं तिरे आस्तां को मैं..

Image

आज की शायरी

Shayari of the day (आज की शायरी): आज की शायरी में हम पढ़ेंगे सागर निजामी का एक बड़ा ही चर्चित शेर और समझेंगे कि इस खूबसूरत सी शायरी के असली मायने क्या हैं। सागर निजामी उर्दू गजल के प्रमुख शायरों में से एक हैं। वह 20 वीं सदी में 'जिगर', 'फ़िराक़' और 'जोश' के समकालीन बेहद लोकप्रिय शायर थे। उनकी शायरी में इश्क, सूफी, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना का सुंदर मिश्रण मिलता है। सागर राष्ट्रीय आंदोलन में भी सक्रिय रहे और देशभक्ति की कई मशहूर नज्में लिखीं। 1969 में साहित्यिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित हुए।

सागर निजामी की शायरी सरल, प्रवाहपूर्ण और दिल को छूने वाली होती थी जिसमें प्रेम की मस्ती, वफा की हैरत और ईश्वरीय समर्पण साफ साफ झलकता था। ऐसा ही उनका एक मशहूर शेर है:

"सज्दे मिरी जबीं के नहीं इस क़दर हक़ीर, कुछ तो समझ रहा हूं तिरे आस्तां को मैं"

सागर निजामी का यह शेर सूफियाना और इश्क़-ए-इलाही (ईश्वरीय प्रेम) की गहन अभिव्यक्ति है, जहां आशिक अपनी खुदा (माशूक/ईश्वर) के सामने अपनी स्थिति को समझता है।

आशिक कहता है कि मेरे माथे के सजदे इतने तुच्छ या बेकार नहीं हैं जितने लोग समझते हैं। मैं अब तेरे आस्ताने (ईश्वर/माशूक के द्वार) की असली अहमियत को समझने लगा हूं। इस शेर में सूफी संदेश छिपा है। यहां सजदा करना खुद को समर्पित करना है। दुनिया में लोग इसे हक़ीर (नीचा) समझते हैं, कि बंदा इतना छोटा क्यों हो जाता है? लेकिन आशिक अब जान चुका है कि यह दरबार इतना बड़ा और पवित्र है कि उसका सजदा कोई मामूली बात नहीं। मेरे सजदे की क़द्र इसलिए है क्योंकि मैं तेरे दरबार की गरिमा को पहचान रहा हूं।

यह शेर अहंकार के त्याग, विनम्रता और ईश्वर की महानता के अहसास को दर्शाता है। आशिक कह रहा है कि मेरा सजदा इसलिए मूल्यवान है क्योंकि अब मैं समझ गया हूं कि तेरा आस्ताना कितना ऊंचा है। मेरी जबीन का झुकना तुच्छ नहीं, बल्कि तेरी श्रेष्ठता का प्रमाण है।

यह इश्क की परिपक्व अवस्था है, जहां प्रेमी अब सिर्फ मांग नहीं करता, बल्कि समझता है कि समर्पण ही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। सागर निज़ामी की यह पंक्ति दिल को छू लेती है, क्योंकि यह दिखाती है कि सच्चा प्रेम अहंकार को मिटाकर ही पूर्ण होता है।

यह शेर बताता है कि ईश्वर या प्रेम के सामने झुकना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी समझ और शक्ति है। जब हम आस्ताने की कद्र समझ लेते हैं, तब हमारे सजदे हकीकत में बदल जाते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article