International Yoga Day: आज दुनिया के कई देशों में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। ईशा फ़ाउंडेशन ने भी इस मौके पर बड़ी संख्या में योग सत्र आयोजित किये। ईशा फाउंडेशन के तत्वाधान में आयोजित ऐसे ही एक मुफ्त योग सत्र में वहां के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि, ' बारह साल का समय लगभग एक ‘सौर-चक्र’ के बराबर होता है। इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का हमने एक चक्र पूरा कर लिया है। अब इसे और आगे ले जाने का समय आ गया है, ताकि इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति इस बात से अनजान न रहे कि खुद को बेहतर बनाने के तरीके मौजूद हैं।'
योग के असली मकसद पर ज़ोर देते हुए सद्गुरु ने कहा, "जिसे हम योग कहते हैं, वह कोई फिलॉसफी नहीं है, कोई विचारधारा नहीं है, कोई विश्वास प्रणाली नहीं है, या कोई धर्म नहीं है; और निश्चित रूप से, इसका मतलब शरीर को तोडना-मरोड़ना भी नहीं है, जैसा कि बहुत से लोग समझते हैं। ये तो एक रिमाइंडर है। जैसे बाहरी खुशहाली के लिए विज्ञान और तकनीक है, वैसे ही आंतरिक खुशहाली के लिए भी पूरा विज्ञान और तकनीक मौजूद है।"
सद्गुरु ने संदेश दिया कि आज इंसान जिन कई समस्याओं और चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनकी जड़ मानव अनुभव की बुनियादी प्रकृति को ठीक से न समझ पाने में है। उनके अनुसार, हर तरह का मानवीय अनुभव हमारे भीतर ही जन्म लेता है। इसलिए यदि हम अपने अनुभवों और जीवन को उसकी सर्वोच्च संभावना तक पहुंचाना चाहते हैं, तो इसका रास्ता बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर की ओर मुड़ने में है। सद्गुरु कहते हैं कि यही योग का मूल उद्देश्य है— इंसान को अपने आंतरिक जगत से जोड़ना और उसकी पूरी क्षमता को जागृत करना।
बता दें कि आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर ईशा फ़ाउंडेशन ने पूरे भारत में लगभग 1,000 निःशुल्क योग और ध्यान सत्र आयोजित किए। इनमें तमाम क्षेत्रों के करीब 50,000 लोगों ने भाग लिया। अकेले कोयंबटूर के ईशा योग सेंटर में, 700 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। बात बेंगलुरु की करें तो वहां सद्गुरु सन्निधि में, 2,500 से ज्यादा लोगों ने आदियोगी की मौजूदगी में योग और ध्यान सत्रों में भाग लिया। इनमें NCC कैडेट, बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स के जवान, छात्र, ग्रामीण, स्वयंसेवी और आम लोग शामिल थे।
योग सत्र का हिस्सा बनने वाले प्रतिभागियों को आसान योग क्रियाओं और ध्यान की तकनीकों से परिचित कराया गया, जिन्हें शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक खुशहाली और जीवन की समग्र गुणवत्ता को उन्नत बनाने के लिए तैयार किया गया है। इस खास मौके पर, सद्गुरु के निःशुल्क निर्देशित ध्यान के ऐप 'मिरेकल ऑफ़ माइंड' में गुजराती, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, इटैलियन और नेपाली के रूप में 6 और नई भाषाएं जोड़ी गईं।
