जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी काम शानदार चल रहा होता है, तो कभी अचानक ऐसी स्थिति आ जाती है जहां समझ नहीं आता कि आगे क्या करना है। असफलता, नुकसान या किसी बड़े झटके के बाद मन भारी होना बिल्कुल सामान्य है। ऐसे समय में कुछ लोग खुद को लोगों से दूर कर लेते हैं, कुछ बार-बार उसी घटना के बारे में सोचते रहते हैं और कुछ तुरंत किसी समाधान की तलाश शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या मुश्किल दौर से निकलने का कोई आसान तरीका हो सकता है?
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हाल ही में रणवीर इलाहाबादिया के साथ बातचीत में अशनीर ग्रोवर ने अपने नजरिए से बताया कि जिंदगी के सबसे खराब दौर में वह किस तरह खुद को संभालते हैं। उनकी बातों में कोई बहुत मुश्किल या पेचीदा फार्मूला नहीं था। बल्कि उनका नजरिया काफी सीधा था - जो हुआ, उस पर लगातार बैठे रहने के बजाय धीरे-धीरे दोबारा अपने काम की तरफ लौटना।
एक चीज सोचना जरूरी नहीं..
अशनीर ग्रोवर के मुताबिक, लो मोमेंट में वह खुद को यह सोचकर नहीं बैठाते कि उनके साथ ही ऐसा क्यों हुआ। उनका झुकाव दोबारा काम शुरू करने की तरफ रहता है। यानी समस्या को नजरअंदाज करना नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा को सिर्फ परेशानी के बारे में सोचते रहने से निकालकर किसी रचनात्मक काम में लगाना।
खुद पर भरोसा बना रहना जरूरी
रणवीर इलाहाबादिया के साथ बातचीत में अशनीर ने अपनी एक मजबूत धारणा का जिक्र किया। उन्हें भीतर से विश्वास रहता है कि वह “बड़ी चीजों” के लिए बने हैं।
इस सोच का मतलब घमंड नहीं, बल्कि मुश्किल समय में अपनी क्षमता पर भरोसा बनाए रखना है। जब बाहर की परिस्थितियां आपके पक्ष में नहीं होतीं, तब यही आत्मविश्वास आपको दोबारा कोशिश करने की ताकत दे सकता है।
Low Phase में सुस्ती महसूस होना भी हो सकता है
अशनीर ने यह भी बताया कि बुरे दौर में मन उदास और शरीर सुस्त महसूस कर सकता है। यानी मुश्किल समय में हर वक्त पहले जैसा उत्साह महसूस होना जरूरी नहीं है। ऐसे में खुद से यह उम्मीद करना कि अगले ही दिन सब कुछ बिल्कुल सामान्य हो जाए, शायद सही तरीका नहीं। कभी-कभी धीरे चलना भी आगे बढ़ना होता है।
काम करो वाली सोच का असली मतलब
उनकी बात का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि मेहनत को उन्होंने मुश्किल दौर से बाहर निकलने की अपनी उम्मीद से जोड़ा। उनका मानना है कि अगर इंसान कोशिश करता रहे और मेहनत करता रहे, तो आगे कुछ बड़ा बनाया जा सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर परेशानी को सिर्फ काम में डुबो देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर आराम करना, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना और मदद लेना भी उतना ही जरूरी है।
मुश्किल वक्त में एक छोटी शुरुआत करें
रणवीर इलाहाबादिया और अशनीर ग्रोवर की इस बातचीत से एक आसान बात समझी जा सकती है, बुरा दौर आपकी पूरी कहानी नहीं होता। आज कुछ बिगड़ा है तो इसका मतलब यह नहीं कि आगे भी सब वैसा ही रहेगा। जब मन तैयार न हो, तब भी बहुत बड़ा लक्ष्य उठाने के बजाय एक छोटा काम शुरू किया जा सकता है। शायद वही छोटी शुरुआत धीरे-धीरे आपको फिर अपनी लय में ले आए।
