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US Midterms Election: रिपब्लिकन को मिड-टर्म इलेक्शन की चिंता, ट्रंप को अपनी विरासत की! आखिर अमेरिका में चल क्या रहा है?

US Midterms Election: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा माने जा रहे हैं। ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट, महंगाई और अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की नाराजगी रिपब्लिकन उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा रही है। इस चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर फैसला होगा।

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US Midterm Election 2026: पढ़ें मिड-टर्म इलेक्शन से पहले रिपब्लिकन के लिए क्यों बढ़ी टेंशन। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated Aug 30, 2026, 12:15 IST
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US Midterms Election: अमेरिका में 3 नवंबर को मिड टर्म इलेक्शन होने हैं। मिडटर्म चुनाव करीब आते ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट और अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की नाराजगी का असर नवंबर के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, ट्रंप का ध्यान पार्टी की चुनावी रणनीति से ज्यादा इस बात पर है कि इतिहास उन्हें किस रूप में याद रखेगा।

मिडटर्म चुनाव क्या है?

अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है। इसके बीच, यानी राष्ट्रपति के कार्यकाल के लगभग दो साल बाद होने वाले कांग्रेस चुनाव को मिडटर्म इलेक्शन (Midterm Election) कहा जाता है। इस चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए वोट नहीं डाला जाता। इसके बजाय अमेरिकी मतदाता कांग्रेस के सदस्यों को चुनते हैं। 2026 के चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव होना है। वहीं, सीनेट की 35 सीटें भी चुनाव के लिए मैदान में हैं। यानी अमेरिकी मतदाता यह तय करेंगे कि अगले चरण में कांग्रेस पर किस पार्टी का कितना नियंत्रण रहेगा।

2026 का मिडटर्म चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कांग्रेस पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण दांव पर है। अगर डेमोक्रेट्स दोनों में से किसी एक सदन में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। वहीं, दोनों सदनों पर नियंत्रण गंवाने की स्थिति में प्रशासन को कड़ी राजनीतिक जांच और विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

इस साल नवंबर महीने में होना है मिड-टर्म इलेक्शन। AP

इस साल नवंबर महीने में होना है मिड-टर्म इलेक्शन। AP

क्या है कांग्रेस की ताकत?

कांग्रेस अमेरिका की संघीय विधायिका है और इसके दो सदन हैं, प्रतिनिधि सभा, सीनेट। कांग्रेस का सबसे प्रमुख काम कानून बनाना है। लेकिन इसकी भूमिका सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं है।

कांग्रेस के पास संघीय बजट की निगरानी, राष्ट्रपति की ओर से नामित महत्वपूर्ण अधिकारियों और न्यायाधीशों की नियुक्ति की पुष्टि या अस्वीकृति जैसे अधिकार भी हैं। इसके अलावा युद्ध की घोषणा का संवैधानिक अधिकार भी कांग्रेस के पास है। यही कारण है कि राष्ट्रपति के पास व्हाइट हाउस की ताकत होने के बावजूद कांग्रेस में अपनी पार्टी का बहुमत होना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

राष्ट्रपति की पार्टी हार गई तो क्या होगा?

यहीं से मिडटर्म चुनाव की असली अहमियत समझ आती है। मान लीजिए राष्ट्रपति की पार्टी कांग्रेस के किसी एक सदन में बहुमत खो देती है। तब राष्ट्रपति के लिए अपने एजेंडे को कानून का रूप देना कठिन हो सकता है। विपक्षी पार्टी के पास विधायी प्रक्रिया को प्रभावित करने और सरकार के फैसलों की जांच करने की ज्यादा ताकत आ जाती है। अगर राष्ट्रपति की पार्टी हाउस और सीनेट दोनों में बहुमत खो देती है, तो स्थिति और मुश्किल हो सकती है। राष्ट्रपति को अपने कानूनों और नीतियों के लिए विपक्ष का समर्थन हासिल करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, कांग्रेस प्रशासन के कामकाज की जांच के लिए समितियों और सुनवाई का इस्तेमाल कर सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फोटो।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फोटो।

रिपब्लिकन क्यों परेशान हैं?

रिपब्लिकन नेताओं की चिंता मुख्य रूप से ट्रंप की गिरती अप्रूवल रेटिंग, महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतों और विदेश नीति को लेकर है। हाल के सर्वेक्षणों में ट्रंप की अपनी पार्टी के भीतर भी लोकप्रियता में गिरावट के संकेत मिले हैं। एक्सियोस (Axios) के मुताबिक एक Economist/YouGov सर्वे में रिपब्लिकन मतदाताओं के बीच ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 79 प्रतिशत रही, जो उनके दूसरे कार्यकाल का अब तक का सबसे निचला स्तर था। वहीं, महंगाई और ईरान युद्ध को लेकर भी रिपब्लिकन मतदाताओं में असंतोष बढ़ा है।

इसके अलावा, मतदाताओं के लिए महंगाई और रोजमर्रा की लागत बड़ा मुद्दा बन चुकी है। रॉयटर्स/इप्सोस के हालिया सर्वे में 36 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि जीवन-यापन की बढ़ती लागत से निपटने के लिए डेमोक्रेट्स की योजना बेहतर है, जबकि 28 प्रतिशत ने रिपब्लिकन को बेहतर माना।

पढ़ें क्या है मिड-टर्म चुनाव का महत्व।

पढ़ें क्या है मिड-टर्म चुनाव का महत्व।

ट्रंप का फोकस चुनाव से ज्यादा ‘लीगेसी’ पर?

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप अब इस बात पर खास ध्यान दे रहे हैं कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उनकी ऐतिहासिक छवि कैसी होगी। उनके करीबियों के मुताबिक ट्रंप की दिलचस्पी कई ऐसे प्रोजेक्ट्स में बढ़ी है, जो उनके कार्यकाल की स्थायी पहचान बन सकते हैं। इनमें व्हाइट हाउस में नया बॉलरूम, प्रस्तावित ट्रायम्फल आर्च और प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

ट्रंप ने अपने नाम और तस्वीर वाले कई स्मारक उत्पादों पर भी ध्यान दिया है। इनमें सीमित संस्करण वाले पासपोर्ट, नेशनल पार्क पास और जल्द जारी होने वाला स्मारक एक डॉलर का सिक्का शामिल है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने उनकी मौजूदा मानसिकता को लेगेसी मोड यानी विरासत बनाने की कवायद को बताया है।

ट्रंप को क्यों सता रही है ‘विरासत’ की चिंता?

इसके पीछे एक राजनीतिक वजह भी बताई जा रही है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के बाद देखा कि उनके उत्तराधिकारी जो बाइडन ने उनकी कई नीतियों को पलट दिया था। इसलिए अब वह ऐसी चीजें छोड़ना चाहते हैं जिन्हें भविष्य की सरकारों के लिए बदलना मुश्किल हो।

रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप राष्ट्रपति पद के इतिहास में अपनी जगह को लेकर बेहद सजग हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस में पूर्व राष्ट्रपतियों के चित्रों और उनके साथ लगाए गए विवरणों में भी व्यक्तिगत रुचि ली है। यहां तक कि वह अब राष्ट्रपति पद से हटने के बाद बनने वाली अपनी लाइब्रेरी की योजनाओं पर भी खुलकर बात कर रहे हैं।

चुनावी रैली में प्रचार करते ट्रंप की फोटो।

चुनावी रैली में प्रचार करते ट्रंप की फोटो।

रिपब्लिकन चाहते हैं ट्रंप चुनाव पर ध्यान दें

रिपब्लिकन नेताओं को नवंबर के चुनाव की चिंता है। वे चाहते हैं कि ट्रंप पार्टी के कमजोर उम्मीदवारों के लिए प्रचार करें और अपनी राजनीतिक मशीनरी तथा फंड का इस्तेमाल चुनाव में करें। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) से जुड़ी राजनीतिक कार्रवाई समिति (PAC) सुपर पीएसी ‘मागा इंक.’ (PAC MAGA Inc.) के पास 400 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम जमा है, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं की शिकायत है कि यह पैसा अभी तक बड़े पैमाने पर मिडटर्म मुकाबलों में नहीं लगाया गया है।

ट्रंप हालांकि चुनाव से खुद को दूर नहीं रख रहे। वह मिडटर्म चुनाव को अपने लिए भी जनमत संग्रह की तरह पेश कर रहे हैं और समर्थकों से यहां तक कह चुके हैं कि “pretend I’m on the ballot” यानी मानकर चलिए कि मैं भी बैलेट पर हूं।

ट्रंप के लिए मिडटर्म हार कितनी बड़ी समस्या होगी?

अगर रिपब्लिकन पार्टी हाउस या सीनेट में बहुमत खो देती है, तो ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। डेमोक्रेट्स के पास कांग्रेस में बहुमत आने पर प्रशासन की नीतियों और फैसलों की जांच करने की ज्यादा ताकत होगी। ट्रंप के खिलाफ राजनीतिक जांच और संभावित महाभियोग की चर्चा भी फिर जोर पकड़ सकती है। यही वजह है कि रिपब्लिकन नेताओं के लिए मिडटर्म चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या ट्रंप की लोकप्रियता अब रिपब्लिकन के लिए ताकत या कमजोरी?

गौरतलब है कि ट्रंप अब भी रिपब्लिकन पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में हैं और उनका समर्थन किसी उम्मीदवार के लिए प्राथमिक चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन आम चुनाव में कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार अब उनसे अपनी दूरी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ उम्मीदवारों ने अपनी वेबसाइट और प्रचार सामग्री से ट्रंप के संदर्भ कम किए हैं, खासकर उन इलाकों में जहां राष्ट्रपति की लोकप्रियता कमजोर है।

प अब भी रिपब्लिकन पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक। AP

प अब भी रिपब्लिकन पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक। AP

ट्रंप की 'अग्निपरीक्षा?'

2026 का मिडटर्म चुनाव सिर्फ कांग्रेस की सीटों का चुनाव नहीं है। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल पर जनता की प्रतिक्रिया का भी बड़ा परीक्षण होगा। एक तरफ ट्रंप अपनी ऐतिहासिक विरासत को मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं रिपब्लिकन उम्मीदवारों को महंगाई, रोजगार, ईंधन की कीमत और स्थानीय मुद्दों पर मतदाताओं का भरोसा जीतना है। यही वजह है कि रिपब्लिकन पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या ट्रंप की व्यक्तिगत लोकप्रियता पार्टी को मिडटर्म में जीत दिलाएगी या उनकी मौजूदा राजनीतिक छवि रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए बोझ बन जाएगी?

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