बॉलीवुड एक्ट्रेस Alia Bhatt अपनी शानदार एक्टिंग और स्टाइल के लिए जानी जाती हैं, लेकिन इन दिनों वह अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में हैं। एक सफल एक्ट्रेस होने के साथ-साथ आलिया एक मां भी हैं। बेशक ही मां की भूमिका में आलिया भट्ट अपना 100 प्रतिशत देती आई हैं। लेकिन उनकी भी अपनी चिंताएं हैं और हाल ही में उन्होंने अपनी बेटी राहा को लेकर अपनी चिंताओं को खुलकर साझा किया। हाल ही में आलिया आध्यात्मिक गुरु Sadhguru Jaggi Vasudev से मिली थी और वहां पर उन्होने पैरेंटिंग से जुड़े कई सवाल पूछे। आइए जानते हैं इस बातचीत से जुड़ी अहम बातें, जो हर मां के लिए जरूरी हो सकती है।
'मैं एक चिंतित मां हूं' – आलिया भट्ट
आलिया ने बातचीत के दौरान कहा कि वह अपनी बेटी राहा को लेकर अक्सर चिंतित रहती हैं। उनके मन में कई बार यह सवाल आता है कि क्या वह एक अच्छी मां हैं और क्या वह अपनी बेटी के लिए सही फैसले ले रही हैं। इस पर सद्गुरु ने जवाब देते हुए कहा कि ज्यादा चिंता करने वाले माता-पिता अच्छे मार्गदर्शक नहीं बन पाते। उनका मानना है कि बच्चों को सिखाने से ज्यादा जरूरी है कि माता-पिता खुद अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करें।
बच्चों से सीखने की जरूरत
सद्गुरु ने समझाया कि बच्चे स्वभाव से खुश और जिज्ञासु होते हैं। ऐसे में माता-पिता को उनसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पैरेंटिंग का मतलब केवल सिखाना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार से सही माहौल बनाना है। अगर माता-पिता तनाव में रहेंगे, तो बच्चे भी वही अपनाएंगे।
बच्चे के भविष्य को लेकर क्या करें?
जब आलिया ने पूछा कि बच्चों को भविष्य के लिए कैसे तैयार करें, तो सद्गुरु ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और खुशहाल वातावरण देना सबसे जरूरी है। उन्होंने बताया कि बच्चों को हर चीज सिखाने के बजाय उन्हें खुद अनुभव करने देना चाहिए, ताकि वे स्वाभाविक रूप से सीख सकें और विकसित हो सकें।
हार-जीत को कैसे समझाएं?
आलिया ने अपनी बेटी के बारे में बताया कि वह हमेशा जीतना चाहती है और हारने पर उसे गलत मानती है। इस पर सद्गुरु ने सलाह दी कि बच्चों को हार-जीत का पाठ पढ़ाने के बजाय माता-पिता को खुद सही व्यवहार दिखाना चाहिए। जब बच्चे देखेंगे कि बड़े हार और जीत को सहजता से लेते हैं, तो वे भी वैसा ही सीखेंगे।
बच्चों के सवालों को कैसे हैंडल करें?
बच्चों के अनगिनत सवालों पर सद्गुरु ने कहा कि हर बार परफेक्ट जवाब देना जरूरी नहीं है। अगर किसी सवाल का जवाब न पता हो, तो बच्चों के साथ मिलकर उसे खोजने की कोशिश करनी चाहिए। इससे उनकी जिज्ञासा बनी रहती है और वे सीखने के लिए प्रेरित होते हैं।
अच्छी पैरेंटिंग का असली मतलब
सद्गुरु के अनुसार, “पैरेंटिंग” को बोझ की तरह नहीं लेना चाहिए। माता-पिता को बच्चों के साथ दोस्त और मार्गदर्शक की तरह रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह परफेक्ट बनने की दौड़ नहीं है, बल्कि एक साथ सीखने और बढ़ने का सफर है। जब आप खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं, तो अपने आप एक अच्छे पैरेंट बन जाते हैं।
