Women Safety Tips: आप बस या कैब में सफर कर रही हैं। अचानक गाड़ी तय रास्ते से मुड़ जाती है। ड्राइवर का व्यवहार आपको ठीक नहीं लगता या आसपास का माहौल असुरक्षित महसूस होता है। ऐसे समय में क्या करें? किसे फोन लगाएं और अपनी लोकेशन कैसे बताएं? इन सवालों के जवाब आपको सफर शुरू करने से पहले मालूम होने चाहिए।
दरअसल, हाल की दो घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा पर फिर डर भरे सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ दिन पहले करीना कपूर खान की आने वाली फिल्म ‘दायरा’ का ट्रेलर आया है जिसमें यौन हिंसा, पुलिस जांच और न्याय व्यवस्था से जुड़ा ज्वलंत मुद्दा उठाया गया है। वहीं 4 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में चलती निजी स्लीपर बस में एक नाबालिग से गैंगरेप की घटना ने महिला सुरक्षा की चिंता फिर बढ़ा दी है। पुलिस ने बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन, GPS और panic button जैसी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे हैं।
ऐसे में घर से निकलते हुए महिलाओं में डर होना लाजमी है। ऐसे में 112, Emergency SOS और live location जैसी सुविधाओं की जानकारी संकट के समय हम तक जल्दी मदद पहुंचाने में सहायक हो सकती है।
1. फोन में 112 सेव करें, लेकिन इसे याद भी रखें
भारत में 112 पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता के लिए एकीकृत इमरजेंसी नंबर है। इसे अपने मोबाइल में EMERGENCY 112 नाम से सेव कर लें। नंबर याद रखना भी जरूरी है। क्योंकि हो सकता है जरूरत के समय आपका फोन बंद हो जाए या आपको किसी दूसरे व्यक्ति के मोबाइल से कॉल करनी पड़े।
कॉल लगने पर पूरी घटना शुरू से बताने के बजाय पहले साफ-साफ कहें- मैं खतरे में हूं। इसके तुरंत बाद अपनी जगह और वाहन की जानकारी दें।
आप इस क्रम में बात कर सकती हैं:
- मैं बस या कैब में हूं।
- वाहन का नंबर यह है।
- गाड़ी इस दिशा में जा रही है।
- मैंने आखिरी बार यह landmark देखा था।
- मुझे पुलिस सहायता चाहिए।
यदि आपको अपनी सही लोकेशन नहीं मालूम तो आसपास दिखाई दे रहे पेट्रोल पंप, टोल प्लाजा, मेट्रो स्टेशन, फ्लाईओवर या दुकान का नाम बताएं।
2. अभी चेक करें कि आपके फोन में Emergency SOS कैसे चलता है
आपात स्थिति में फोन अनलॉक करके नंबर खोजने का समय नहीं भी मिल सकता। इसलिए Emergency SOS पहले से सक्रिय रखें।
Android फोन में यह विकल्प आमतौर पर Settings > Safety and Emergency > Emergency SOS में मिलता है। iPhone में Settings > Emergency SOS पर जाकर Call with 5 Presses जैसे ऑप्शन ऑन किए जा सकते हैं। फोन के मॉडल के अनुसार तरीका अलग हो सकता है।
सेटिंग चालू करने के बाद यह भी देखें कि SOS किस बटन से शुरू होगा और अलर्ट किन लोगों के पास जाएगा। जरूरत पड़ने से पहले इसका तरीका समझ लें। फोन बदलने या software update के बाद सेटिंग दोबारा जांचना भी अच्छा रहेगा।
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3. सफर शुरू होते ही Live Location साझा कर दें
साधारण location pin केवल उस समय की जगह दिखाता है। Live location आपके आगे बढ़ने के साथ बदलती रहती है। इसलिए चलती बस या कैब में यह ज्यादा उपयोगी हो सकती है। यदि आप देर रात या लंबी दूरी का सफर कर रही हैं तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति को ये जानकारियां भेज दें:
- वाहन और नंबर प्लेट की फोटो
- बस या कैब कंपनी का नाम
- टिकट या booking details
- बैठने और उतरने की जगह
- पहुंचने का अनुमानित समय
- WhatsApp या Maps की live location
यदि गाड़ी तय रास्ते से हटती दिखे तो पहले ड्राइवर से सामान्य तरीके से कारण पूछें। जवाब ठीक न लगे तो तुरंत किसी अपने को संदेश भेजें- रूट बदल रहा है, मेरी लोकेशन देखते रहना। खतरा बढ़ता महसूस हो तो 112 या SOS का इस्तेमाल करें।
4. तीन लोग और एक Code Word तय करें
Emergency contact के लिए केवल एक व्यक्ति पर निर्भर न रहें। हो सकता है वह किसी जरूरी काम में हो या समय पर फोन न देख पाए। परिवार, दोस्त और सहकर्मी में से कम से कम तीन ऐसे लोगों को चुनें, जो आपकी सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई कर सकें।
इन लोगों के साथ एक छोटा code word भी तय करें। यह कोई ऐसा सामान्य शब्द हो सकता है, जिसे सुनते या पढ़ते ही वे समझ जाएं कि आप खुलकर बात नहीं कर पा रही हैं।
Code word तय करते समय यह भी बता दें कि उसके बाद उन्हें क्या करना है। उन्हें आपकी live location देखनी है, वाहन का नंबर नोट करना है और जरूरत पड़ने पर 112 को सूचना देनी है। केवल code word बना लेना काफी नहीं है, उसके बाद का emergency plan भी साफ होना चाहिए।
5. खतरा महसूस हो तो किस तरह मदद मांगें
यदि वाहन गलत रास्ते पर जा रहा है तो Maps पर route देखें और ड्राइवर से पूछें कि रास्ता क्यों बदला गया है। किसी परिचित को कॉल करके अपनी जगह और गाड़ी का नंबर जोर से बताएं। संभव हो तो पेट्रोल पंप, टोल प्लाजा, पुलिस चौकी या भीड़भाड़ वाले स्थान पर वाहन रुकवाएं।
बस में किसी का व्यवहार असहज लगे तो खाली हिस्से में अकेले बैठने के बजाय दूसरे यात्रियों या किसी परिवार के पास चली जाएं। हेडफोन की आवाज कम रखें और आसपास की गतिविधियों पर ध्यान दें।
यहां इस बात का ध्यान रखें कि मदद मांगते समय केवल - कोई मदद कीजिए कहने से हो सकता है कि कोई जिम्मेदारी ना ले। इसकी किसी एक व्यक्ति से सीधे बोलें- आप 112 पर कॉल कीजिए या कृपया मेरे साथ यहां रुकिए। किसी एक व्यक्ति को स्पष्ट रूप से संबोधित करने पर मदद मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
रटे रटाए सेफ्टी रूल हमेशा ना फॉलो करें क्योंकि हर परिस्थिति अलग होती है। शोर मचाना, वाहन से उतरना, भागना या विरोध करना तभी करें- जब उससे खतरा और न बढ़े। उस समय आपको जो विकल्प सबसे सुरक्षित लगे, उसे चुनें। डर के कारण आवाज न निकलना या शरीर का कुछ देर के लिए जम जाना भी स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है। इसके लिए खुद को दोष न दें और अपनी हिम्मत बढ़ाती रहें।
घटना हो जाए तो आगे क्या करें
सबसे पहले किसी सुरक्षित जगह पर पहुंचें। पुलिस और अपने भरोसेमंद व्यक्ति से संपर्क करें। जरूरत हो तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।
वाहन का नंबर, टिकट, booking details, payment receipt, chats, call log और location history delete न करें। जो बातें आपको याद हैं, उन्हें लिख लें या फोन में voice note बना लें।
यौन हिंसा की स्थिति में संभव हो तो नहाने या कपड़े बदलने से पहले अस्पताल पहुंचें, ताकि जरूरी सबूत सुरक्षित रह सकें। यदि आप कपड़े बदल चुकी हैं या नहा चुकी हैं, तब भी पुलिस में शिकायत करने और इलाज लेने में देरी न करें।
डरकर नहीं, तैयारी से करना है सफर
आपके फोन में SOS, live location और trusted contacts होना उपयोगी है, लेकिन सुरक्षित सफर की पूरी जिम्मेदारी आपकी नहीं है। बस कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, चालू GPS और panic button, जिम्मेदार ट्रांसपोर्ट कंपनियां और समय पर पुलिस सहायता भी जरूरी हैं।
इस Safe Journey Toolkit का उद्देश्य आपको डराना या सफर करने से रोकना नहीं है। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि यदि कभी स्थिति असामान्य लगे तो आपको यह सोचने में समय न गंवाना पड़े कि पहला कदम क्या उठाना है।
