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Poems on Women in Hindi: उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे.., पढ़ें नारी के सम्मान में लिखी कुछ मशहूर कविताएं

Poems on Women (नारी पर कविता): हमारी भारतीय संस्कृति में भी महिलाओं के महत्व को बताया गया हैं एवं उन्हें देवी का रुप बताया है। हिन्दू शास्त्रों और पुराणों में भी महिलाओं की अदम्य शक्ति का वर्णन किया गया है। हम सभी को महिलाओं को महत्व समझना चाहिए एवं उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए। महिला दिवस पर महिलाओं पर लिखीं गईं यह सुंदर कविताएं वाकई दिल छू जाने वाली हैं।

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Womens Day Poem in Hindi

Poems on Women (नारी पर कविता): महिलाओं की अलौकिक शक्ति का भारतीय इतिहास भी गवाह रहा है। जब-जब-पुरुष ने खुद को असहाय, हताश और निराश पाया है, तब-तब वो नारी के शरण में आया है। भले ही पुरुष अपने अहंकार के कारण नारी को कमजोर और अबला कहता रहा हो, लेकिन नारी की शक्ति का एहसास तो उसे भी है। इसलिए महिला शक्तिकरण की दिशा में आज कई अभियान चलाए जा रहे हैं, महिलाओं को उनकी शक्ति का एहसास करवाया जा रहा है। इसी कड़ी में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस भी मनाया जाता है। महिलाओं पर तमाम कविताएं लिखी गई हैं जिनमें उनकी शक्ति, संघर्ष औऱ बलिदान की गाथा है। आइए पढ़ते हैं नारी पर चंद बेहतरीन कविताएं:

1. उनको भी है जीने का अधिकार उन्हें भी जीने दो

देना या मत देना अपना प्यार उन्हें भी जीने दो ।

नारी की ताकत को नर ने कम करके पहचाना

रचा महाभारत देती वो जब-जब उसने ठाना

वो दुर्गा है, वो लक्ष्मी, वो सरस्वती वो सीता

जब सीता का प्यार मिला हर युद्ध राम ने जीता

सीता विमुख हुईं तो खाई लव-कुश से भी हार ।

उन्हें भी जीने दो ।

– उदयप्रताप सिंह

2. कद्र अब तक तेरी तारीख ने जानी ही नहीं,

रौशनी भी तेरी आँखों में है, पानी ही नहीं,

हार तूने कभी तकदीर से मानी ही नहीं।

तू हकीकत भी है, दिलचस्प कहानी ही नहीं।

हर अदा तेरी क़यामत है, जवानी ही नहीं।

अपनी तारीख का उनवान बदलना है तुझे,

उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे।

-कैफी आजमी

3. औरतें कहतीं भविष्यत की अगर कुछ बात,

नर उन्हें डाइन बताकर दंड देता है।

पर, भविष्यत का कथन जब नर कहीं करता,

हम उसे भगवान का अवतार कहते हैं।

-रामधारी सिंह दिनकर

4. नारी तुम आस्था हो तुम प्यार, विश्वास हो,

टूटी हुयी उम्मीदों की एक मात्र आस हो,

अपने परिवार के हर जीवन का तू आधार हो,

इस बेमानी से भरी दुनिया में एक तुम ही एक मात्र प्यार हो,

चलो उठों इस दुनिया में अपने अस्तित्व को संभालो,

सिर्फ एक दिन ही नहीं,

बल्कि हर दिन नारी दिवस मना लो।

5. कौन कहता हैं की,

नारी कमज़ोर होती है।

आज भी उसके हाथ में,

अपने सारे घर को चलाने की डोर होती है।

वो तो दफ्तर भी जाती हैं,

और अपने घर परिवार को भी संभालती हैं।

एक बार नारी की ज़िंदगी जीके तो देखों,

अपने मर्द होने के घमंड यु उतर जायेंगा,

अब हौसला बन तू उस नारी का,

जिसने ज़ुल्म सहके भी तेरा साथ दिया।

तेरी ज़िम्मेदारियों का बोझ भी,

ख़ुशी से तेरे संग बाट लिया।

चाहती तो वो भी कह देती, मुझसे नहीं होता।

उसके ऐसे कहने पर,

फिर तू ही अपने बोझ के तले रोता।

6. नारी ईश्वर का चमत्कार

नारी सरस्वती का रूप हो तुम

नारी लक्ष्मी का स्वरुप हो तुम

बढ़ जाये जब अत्याचारी

नारी दुर्गा-काली का रूप हो तुम।

नारी खुशियों का संसार हो तुम

नारी प्रेम का आगार हो तुम

जो घर आँगन को रोशन करती

नारी सूरज की सुनहरी किरण हो तुम।

नारी ममता का सम्मान हो तुम

नारी संस्कारों की जान हो तुम

स्नेह, प्यार और त्याग की

नारी इकलौती पहचान हो तुम।

नारी कभी कोमल फूल गुलाब हो तुम

नारी कभी शक्ति के अवतार हो तुम

तेरे रूप अनेक

नारी ईश्वर का चमत्कार हो तुम।

महिला दिवस पर इस तरह की कविताओं से प्रेऱणा लेकर सभी महिलाओं को आत्मसम्मान के साथ जीने एवं अपने अधिकारों के प्रति लड़ने का प्रण लेना चाहिए।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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