लाइफस्टाइल

इतने सालों में बनकर तैयार हुई Nita Ambani की ये वायरल साड़ी, एक-एक चीज है खास

नीता अंबानी की साड़ियों का कलेक्शन अक्सर ही चर्चा में रहता है। हाल ही में एक इवेंट के लिए पहुंची नीता अंबानी ने ट्रेडिशनल पश्चिम बंगाल की जामदानी साड़ी पहनी। देखें नीता अंबानी साड़ी डिजाइन, ब्लाउज, मीनाकारी जामदानी साड़ी फोटो।

Image

Nita Ambani Tribal lore Jamdani Saree

जब बात फैशन की होती है, तो कुछ लोग सिर्फ ट्रेंड फॉलो करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो ट्रेंड सेट करते हैं। बेशक ही नीता अंबानी का नाम हमेशा ट्रेंड सेट करने वाली हस्तियों की लिस्ट में आता है। हाल ही में एक बार नीता अंबानी ने अपनी खूबसूरत सी साड़ी से इस कथन को साबित कर दिया। दरअसल TIME100 Summit जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब नीता अंबानी नजर आईं, तो उनकी मौजूदगी सिर्फ एक बिजनेस लीडर के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की प्रतिनिधि के रूप में भी दिखी।

उन्होंने जो साड़ी पहनी, वह कोई आम परिधान नहीं था, बल्कि पश्चिम बंगाल की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा का एक जीवंत उदाहरण थी। इस खास जामदानी साड़ी ने न सिर्फ लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की बारीकी और सुंदरता को भी दुनिया के सामने रखा। हर धागे में छुपी कहानी, हर डिजाइन में दिखती मेहनत—यह साड़ी अपने आप में एक कला का नमूना है, जिसने फैशन और परंपरा को खूबसूरती से जोड़ दिया।

जामदानी साड़ी: परंपरा और कारीगरी का संगम

जामदानी साड़ी भारत की सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन बुनाई शैलियों में से एक मानी जाती है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल के फुलिया क्षेत्र में यह कला पीढ़ियों से चली आ रही है। यह साड़ी हाथ से बुनी जाती है, जिसमें हर डिजाइन को अलग से धागों के जरिए जोड़ा जाता है। यही वजह है कि इसे तैयार करने में महीनों नहीं, बल्कि सालों तक लग सकते हैं।

24 महीनों की मेहनत का नतीजा

नीता अंबानी द्वारा पहनी गई यह खास जामदानी साड़ी लगभग 24 महीनों में तैयार की गई। इसे पद्म श्री सम्मानित कारीगर बीरेन कुमार बसाक ने अपने कौशल से बुना। इस साड़ी में ‘मीनाकारी जमदानी’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो रंगों और डिजाइन को और भी जीवंत बनाती है।

डिजाइन में छुपी कहानी

इस साड़ी की सबसे खास बात इसका डिजाइन है, जो एक कहानी की तरह नजर आता है। पल्लू पर बने दृश्य, मानव आकृतियां, जानवर और पेड़-पौधे इसे एक ‘नैरेटिव टैपेस्ट्री’ का रूप देते हैं। हर मोटिफ में एक सांस्कृतिक और पारंपरिक संदेश छुपा होता है।

साड़ी के बॉर्डर पर बने मछली के डिजाइन को भारतीय संस्कृति में शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं, साड़ी के बॉडी पर बने हल्के पेस्टल स्ट्राइप्स इसे संतुलित और एलिगेंट लुक देते हैं।

क्यों है यह साड़ी खास?

यह साड़ी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक विरासत है। इसमें कारीगरों की महीनों की मेहनत, उनकी कला और परंपरा की झलक साफ नजर आती है। यही वजह है कि इसे एक ‘हीरलूम पीस’ कहा जाता है, जिसे पीढ़ियों तक संभालकर रखा जा सकता है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

और पढ़ें
End of Article