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'किसी भी दुर्घटना के लिए मकानमालिक जिम्मेदार नहीं', दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही इमारत के PG एग्रीमेंट में क्या-क्या लिखा था

Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने के हादसे ने छात्रों की सुरक्षा, अवैध निर्माण और भवनों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद सामने आए पीजी रेंट एग्रीमेंट में प्रबंधन ने कथित तौर पर दुर्घटना, चोट या जान-माल के नुकसान की जिम्मेदारी से खुद को अलग किया था। हादसे में 12 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें 7 की इलाज के दौरान मौत हो गई।

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सत्य निकेतन हादसे के बाद PG एग्रीमेंट पर बड़ा सवाल।

Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक ढहने से हुई मौतों ने राजधानी में छात्रों की सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद अब उस इमारत में चल रहे पेइंग गेस्ट यानी पीजी का रेंट एग्रीमेंट भी चर्चा में आ गया है। सामने आए एग्रीमेंट की एक शर्त में कथित तौर पर पीजी प्रबंधन ने किसी भी दुर्घटना, चोट या जान-माल के नुकसान की जिम्मेदारी से खुद को अलग कर लिया था।

रिपोर्टों के मुताबिक, एग्रीमेंट में यह उल्लेख था कि पीजी प्रबंधन किरायेदारों के साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ एक रेंट एग्रीमेंट में ऐसी शर्त लिख देने से किसी भवन मालिक या PG संचालक की कानूनी और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी खत्म हो सकती है?

सत्य निकेतन में क्या हुआ?

सत्य निकेतन इलाके में स्थित करीब पांच मंजिला इमारत रविवार को अचानक भरभराकर गिर गई। यह इमारत छात्रों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के बाद मलबे में कई लोग फंस गए और बचाव दलों ने घंटों अभियान चलाकर लोगों को बाहर निकाला। हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोगों को बचाया गया। बचाव अभियान में दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल समेत कई एजेंसियां शामिल रहीं।

यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के करीब है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में हादसे ने राजधानी में छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है।

रेंट एग्रीमेंट में क्या लिखा था?

हादसे के बाद सामने आए पीजी रेंट एग्रीमेंट की एक कॉपी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। रिपोर्टों के मुताबिक, एग्रीमेंट में एक ऐसी शर्त शामिल थी जिसमें PG प्रबंधन ने किरायेदारों को होने वाले नुकसान या किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी लेने से इनकार किया था। एग्रीमेंट में कथित तौर पर लिखा था कि “PG authorities are not responsible against any casualties or risk to me.”

यानी समझौते में यह संकेत दिया गया था कि अगर PG में रहने वाले व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना होती है या उसकी जान को खतरा पैदा होता है, तो इसके लिए PG प्रबंधन जिम्मेदार नहीं होगा। यही शर्त अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि जिस इमारत में यह समझौता हुआ था, वही इमारत हादसे का शिकार हो गई और लोगों की जान चली गई।

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रेंट एग्रीमेंट से खुले कई अहम राज।

क्या एग्रीमेंट से मालिक की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?

यह इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। किसी भी रेंट या PG एग्रीमेंट में जिम्मेदारी से संबंधित शर्तें हो सकती हैं, लेकिन इससे यह अपने आप तय नहीं हो जाता कि भवन मालिक या संचालक कानून के तहत हर जिम्मेदारी से मुक्त हो गया। खासकर अगर जांच में अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, लापरवाही या भवन की खतरनाक स्थिति सामने आती है, तो सिर्फ एग्रीमेंट की कोई शर्त जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण नहीं करती।

सत्या निकेतन मामले में पुलिस ने भवन मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। रिपोर्टों के मुताबिक, मामला गैर-इरादतन हत्या और भवन की मरम्मत या निर्माण में लापरवाही से जुड़े प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि अब जिम्मेदारी सिर्फ एग्रीमेंट की भाषा से नहीं, बल्कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी।

इमारत में निर्माण और मरम्मत को लेकर भी सवाल

हादसे की वजह को लेकर शुरुआती जांच में कई सवाल सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत से जुड़ा काम चल रहा था। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि इमारत पुरानी थी और उसमें अतिरिक्त मंजिलों तथा निर्माण संबंधी बदलावों को लेकर सवाल उठे हैं। अगर किसी पुरानी इमारत में संरचनात्मक बदलाव किए जा रहे हों और उसके साथ पर्याप्त सुरक्षा जांच न की जाए, तो इससे भवन की मजबूती प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इमारत किस स्थिति में थी, वहां किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था और क्या जरूरी अनुमति एवं सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

सिर्फ एक पीजी नहीं, पूरे इलाके पर नजर

सत्या निकेतन में हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों को लेकर भी सख्ती शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, अवैध निर्माण वाले कई भवनों पर कार्रवाई की तैयारी की गई है और चार मंजिल से अधिक के अवैध निर्माण को सील करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे यह सवाल भी सामने आया है कि अगर इलाके में लंबे समय से अनधिकृत निर्माण या असुरक्षित भवन मौजूद थे, तो उनकी समय रहते जांच क्यों नहीं हुई?

पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा कितनी पक्की?

सत्य निकेतन जैसे इलाकों में हजारों छात्र और युवा निजी पीजी में रहते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास हॉस्टल की सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी आवास का सहारा लेना पड़ता है। हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पीजी में कमरा लेते समय छात्र किन सुरक्षा मानकों की जांच करें और प्रशासन इन भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था करता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ किराये का एग्रीमेंट और कुछ शर्तें पर्याप्त हैं या PG संचालकों को भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा और अन्य जरूरी मानकों का प्रमाण भी देना चाहिए?

दिल्ली सरकार ने लिया बड़ा फैसला

सत्या निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर नई व्यवस्था बनाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, पीजी स्कूल, नर्सिंग होम और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों के लिए नियमित संरचनात्मक ऑडिट और सुरक्षा प्रमाणन अनिवार्य करने की नीति पर काम किया जा रहा है।

बताते चलें कि 12 लोगों को भर्ती कराया गया। इनमें से 7 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसमें एक मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। वहीं, 5 घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है, जिनमें से 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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