Navratri Stories For Kids in Hindi: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का खास महत्व है। मान्यता है कि नवरात्र के इन नौ दिनों में मां दुर्गा इस समय में पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच आती हैं और उनकी सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार करतीं हैं। वहीं नवरात्र के दिनों में कई भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं। साथ ही मां की विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है। वहीं पूजा-अर्चना के बाद व्रत कथा को सुनना भी जरूरी माना जाता है। वहीं आप कथा पड़ने के बाद अपने बच्चे को भी नवरात्र की पौराणिक कहानियां सुनाकर उन्हें साहस, मेहनत और ज्ञान की अहमियत की सिख सिखा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं ये 5 कहानियां।
1.मां दुर्गा और महिषासुर का वध
पौराणिक कथाओं के अनुसार, बहुत समय पहले महिषासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया कि कोई भी देवता उसे कभी भी मार नहीं सकेगा। इस वरदान के कारण वह धीरे-धीरे बेहद घमंडी और अत्याचारी बन गया। उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया और धरती पर लोगों को परेशान करने लगा।
महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता एक साथ आए और अपनी-अपनी शक्तियां मिलाकर एक दिव्य शक्ति का निर्माण किया, जिसे हम मां दुर्गा के रूप में जानते हैं। मां दुर्गा के पास अपार शक्ति, साहस और दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। फिर मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध शुरू हुआ, जो पूरे नौ दिनों तक चला। महिषासुर कभी भैंसे का रूप लेता, तो कभी शेर या इंसान का, ताकि वह बच सके। लेकिन मां दुर्गा ने हर रूप में उसका सामना किया और अंततः दसवें दिन उसका वध कर दिया। इस दिन को हम विजयादशमी या दशहरा के रूप में मनाते हैं।
2. मां शैलपुत्री: सादगी और धैर्य की मिसाल
नवरात्र के पहले दिन पूजी जाने वाली मां शैलपुत्री को देवी दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार,सती भगवान शिव की पत्नी थीं, और उनके पिता राजा दक्ष थे। राजा दक्ष एक महान राजा थे, लेकिन भगवान शिव के प्रति उनका आदरभाव नहीं था। एक बार, राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया और सभी देवताओं को यज्ञ में आमंत्रित किया, किंतु भगवान शिव को निमंत्रण देना उन्होंने उचित नहीं समझा।
जब माता सती को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तो उन्होंने भगवान शिव के मना करने के बावजूद अपने पिता के यज्ञ में जाने का निर्णय ले लिया। यज्ञ में पहुंचने पर, माता सती ने देखा कि उनके पिता ने भगवान शिव का अपमान किया है। अपमान और दुख से व्यथित होकर, सती ने उसी यज्ञ कुंड में खुद को समर्पित कर दिया। इस घटना के बाद भगवान शिव ने तांडव किया और सती के शरीर को लेकर सृष्टि का संतुलन बिगाड़ दिया। माता सती का फिर अगला जन्म हिमालय के घर में हुआ, जहां वे शैलपुत्री के रूप में जन्मी। इस बार भी उन्होंने कठोर तपस्या की और भगवान शिव को फिर से अपने पति के रूप में पा लिया। यह कथा देवी के बलिदान और साहस को दर्शाती है।
3. मां काली और रक्तबीज की कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रक्तबीज नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था। उसे यह वरदान प्राप्त था कि उसके शरीर से गिरने वाली हर रक्त की बूंद से एक नया रक्तबीज उत्पन्न हो जाएगा। इस कारण से उसे हराना लगभग असंभव हो गया था, क्योंकि युद्ध में जितना उसे चोट पहुंचाई जाती, उतनी ही उसकी सेना और बढ़ती जाती।
देवताओं और योद्धाओं के लिए यह स्थिति बहुत कठिन हो गई थी। तब सब ने मिलकर मां दुर्गा से प्रार्थना की, इसके बाद युद्ध में मां काली प्रकट हुई , जो अत्यंत शक्तिशाली थीं। युद्ध के दौरान माँ काली ने अपनी अद्भुत शक्ति का उपयोग करके रक्तबीज को हराने का फैसला किया। उन्होंने रक्तबीज के शरीर से गिरने वाली हर रक्त बूंद को जमीन पर गिरने से पहले ही ग्रहण कर लिया, जिससे कोई नया असुर उत्पन्न नहीं हो सका। अंततः मां काली ने रक्तबीज का वध कर दिया और संसार को उसके आतंक से हमेशा के लिए मुक्त करा दिया।
(यह लेख मूल रूप से गौरंगी (Gaurangi) द्वारा लिखा गया है, वह टाइम्स नाउ नवभारत के साथ बतौर इंटर्न जुड़ी हुई हैं।)
