शुक्रवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान काफी हंगामा हुआ, जब खुद पेश हुए याचिकाकर्ता ने हवा में कागजात उछाले और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। खुद पेश हुए याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच के सामने अपनी पहचान बताई।
कानूनी दलीलें देने के बजाय, उन्होंने कहा, 'मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट (न्यायिक सेवक), मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी विकास नगर और डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें। क्योंकि मैं एक संप्रभु (sovereign) हूं। देश भर में साइबर क्राइम सिंडिकेट से निपटने के लिए यह जरूरी है।'
जस्टिस के वी विश्वनाथन ने पिटीशनर से पूछा, 'आप ऑर्डर दे रहे हैं?' और 'आप हमें ऑर्डर दे रहे हैं?'
पिटीशनर ने अपनी बात जारी रखी और बेंच की तरफ कागजों का बंडल फेंक दिया, जिससे कोर्टरूम में डॉक्यूमेंट बिखर गए, सिक्योरिटी वालों ने तुरंत दखल दिया और उसे रोका, क्योंकि उसने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया।
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क्या हुआ: कोर्ट-रूम में बातचीत
जस्टिस विश्वनाथन: क्या आप पार्टी-इन-पर्सन हैं?
प्रताप ने बेंच से कहा- 'मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं आपको ACP विकास नगर, लखनऊ और डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देता हूं। क्योंकि मैं एक सॉवरेन हूं। देश भर में साइबर क्राइम सिंडिकेट से निपटने के लिए यह जरूरी है।'
'आप मुझे आदेश दे रहे हैं? आप हमें आदेश दे रहे हैं?' जस्टिस विश्वनाथन ने प्रताप से पूछा।
फिर प्रताप ने अचानक हवा में डॉक्यूमेंट्स उछाले और CJI के खिलाफ गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल किया।
इसके तुरंत बाद, पास खड़े सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और खींचकर ले गए। अब दिल्ली पुलिस की सुप्रीम कोर्ट यूनिट उससे पूछताछ कर रही है। कोर्ट के एक सूत्र ने बताया-'हां, उसने असंसदीय और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद सुरक्षाकर्मी उसे वहां से ले गए।'
'हम कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहे हैं। वह परेशान व्यक्ति हैं'
आदेश सुनाते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा-'हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहे हैं। जहां तक मामले के गुण-दोष की बात है, हमने रिकॉर्ड देख लिए हैं। हमें विवादित आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला। स्पेशल लीव पिटिशन खारिज की जाती है।'
'हमारे मन में उनके लिए सिर्फ सहानुभूति है'
सुनवाई के बाद, कोर्ट में मौजूद सीनियर एडवोकेट पी.एस. पटवालिया ने टिप्पणी की- 'कहा जाता है कि जज का काम आसान नहीं होता। कुछ दिनों में यह बात और साफ हो जाती है।' इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा- 'वह बहुत परेशान हैं... यह सब निराशा की वजह से है। हमारे मन में उनके लिए सिर्फ सहानुभूति है।'
