मुहर्रम (Muharram) इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है, लेकिन इसे खुशी के त्योहार की तरह नहीं बल्कि इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मनाया जाता है। इस दौरान लोग इबादत करते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और कई जगहों पर सबील लगाकर पानी या मीठा शरबत पिलाते हैं। अलग-अलग राज्यों और परिवारों में मुहर्रम के मौके पर कुछ खास पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं, जिन्हें जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है। देखें मुहर्रम पर कौन-कौन सी खास चीजें बनाई जाती हैं, मुहर्रम पर क्या खाते हैं।
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मुहर्रम पर क्या बनता है
1. खिचड़ा (हलीम)
मुहर्रम के दौरान खिचड़ा या हलीम बनाया जाता है। इसे गेहूं, दाल, चावल और मांस (कुछ जगहों पर शाकाहारी रूप में भी) को लंबे समय तक धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है। इसका स्वाद गाढ़ा और पौष्टिक होता है। कई जगह इसे लोगों में बांटने की परंपरा भी है।

Haleem Khichda
2. मीठे रोट
मीठे रोट आटा, गुड़ या चीनी, घी और सौंफ जैसी चीजों से बनाए जाते हैं। यह उत्तर भारत के कई इलाकों में मुहर्रम के दौरान बनने वाला पारंपरिक पकवान है। इसे घर में बनाकर परिवार और आसपास के लोगों के साथ बांटा जाता है। मुहर्रम के रोट को चोंगे भी कहा जाता है। इन मोटे रोट को हाथों से चपटा करकर बनाया जाता है और ऊपर से ड्राय फ्रूट्स लगाकर या तो तवे पर सेंकते हैं या फ्राई करते हैं।
3. मलीदा
मलीदा एक पारंपरिक मीठा व्यंजन है। इसे रोटी को तोड़कर उसमें घी, चीनी या गुड़, सूखे मेवे और इलायची मिलाकर तैयार किया जाता है।

Muharram Par kya banta hai
4. मीठा शरबत
मुहर्रम के दौरान कई स्थानों पर सबील लगाई जाती है, जहां राहगीरों को ठंडा मीठा शरबत और पानी पिलाया जाता है। इस मीठे शरबत में पानी, दूध, रूह अफजा होता है, जो गर्मी के मौसम में खूब राहत देता है। इस शरबत को शर्बत ए खास भी कहा जाता है।
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मुहर्रम के दौरान इस तरह का पारंपरिक भोजन बनाकर उसे जरूरतमंदों, पड़ोसियों और आने वाले लोगों में बांटना कई समुदायों की परंपरा का हिस्सा है। यह आपसी भाईचारे, करुणा और इंसानियत का संदेश देता है।
