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दुनिया के सबसे बड़े घर की रानी का रॉयल लुक है खास, 150 साल पुरानी डिजाइन की साड़ी में जीता दिल.. राजकुमारियां भी लगीं प्यारी

वडोदरा की महारानी राधिका राजे गायकवाड़ का साड़ी-ब्लाउज कलेक्शन बहुत ही ज्यादा खास है। हाल ही में महारानी साहिबा ने पारसी गारा साड़ी पहनकर खास फोटोज शेयर की, जिसमें वे बेटियों के साथ काफी सुंदर लगीं। देखें राधिका जी का साड़ी कलेक्शन, पारसी गारा साड़ी का इतिहास, गारा साड़ी क्या होती है।

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Maharani Radhika Raje Gaekwad Parsi Gara Saree

वडोदरा की महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ ने पारसी गारा कढ़ाई की टाइमलेस कला को खास अंदाज में पेश किया है। पारंपरिक और बेहद सूक्ष्म इस कढ़ाई में पर्शियन और भारतीय कला का खूबसूरत मेल दिखता है, जो आज दुर्लभ होती जा रही है। मगर बॉलीवुड और रॉयल फैशन व सांस्कृतिक प्रेमियों के बीच पारसी गारा साड़ियां एक बार फिर चर्चा में है। महारानी राधिका के पास ट्रेडिशनल इंडियन हैंडलूम वाली साड़ियों का शानदार कलेक्शन हैं। वे खुद पारंपरिक साड़ियों को और कला को प्रमोट करती हैं, जिससे हस्तशिल्प को नई पहचान मिलती है।

पारसी गारा कढ़ाई का इतिहास

पारसी गारा कढ़ाई का इतिहास भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों से जुड़ा है। पारसी व्यापारी चीन जाते थे, जहां वे भारतीय कपास और अफीम का व्यापार करते थे और बदले में चाय लाते थे। इस व्यापार के दौरान, उन्होंने चीन से फूलों और जीव-जंतुओं की कढ़ाई वाली वस्तुएं भी वापस लाईं। गारा कढ़ाई की शुरुआत तब हुई जब इन कढ़ाइयों को साड़ी के रूप में तैयार किया गया। समय के साथ, इन डिजाइनों में विविधता आई और पारसी महिलाओं ने इन्हें और भी आकर्षक बनाया।

Parsi Gara Embroidery (Photo Credit - Radhika Raje Gaekwad)

Parsi Gara Embroidery (Photo Credit - Radhika Raje Gaekwad)

गारा कढ़ाई की खासियत

गारा कढ़ाई में नाजुकता और बारीकी से काम किया जाता है। यह कढ़ाई हाथ से की जाती है और इसे पारसी समुदाय में विरासत के रूप में माना जाता है। पारसी गारा साड़ी में सबसे लोकप्रिय डिजाइन 'चीना चीनी' है, जिसमें चीनी पुरुषों और महिलाओं के चित्र होते हैं। इस कढ़ाई में फूलों के मोटिफ भी शामिल होते हैं, जो ज़ोरोस्टियन संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं।

समकालीन फैशन में गारा कढ़ाई

Natasha Poonawala Met Gala (Photo Credit - Manish Malhotra)

Natasha Poonawala Met Gala (Photo Credit - Manish Malhotra)

हाल के वर्षों में, पारसी गारा कढ़ाई ने समकालीन फैशन में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। उदाहरण के लिए, बिजनेसवुमन नताशा पूनावाला ने मेट गाला में डिजाइनर मनीष मल्होत्रा द्वारा तैयार की गई एक ड्रेस पहनी थी, जो दो प्राचीन पारसी गारा साड़ियों से बनी थी। इस ड्रेस में एक फिशटेल स्कर्ट, कॉर्सेट-कमरबंद और फ्रेंच लेस ब्रालेट शामिल थे, जो पारसी कढ़ाई की सुंदरता को आधुनिकता के साथ जोड़ते हैं।

महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ का योगदान

महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ ने पारसी गारा कढ़ाई को न केवल अपने फैशन में शामिल किया है, बल्कि उन्होंने इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके पास साड़ियों का एक अद्भुत संग्रह है, जिसमें 100 साल पुरानी साड़ियाँ भी शामिल हैं। उनका फैशन सेंस और पारंपरिक कपड़ों के प्रति प्रेम उन्हें इस कला का सच्चा प्रतिनिधि बनाता है।

पारसी गारा कढ़ाई न केवल एक कला है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ जैसे व्यक्तित्वों के माध्यम से, यह कला आज भी जीवित है और इसे नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाया जा रहा है। इस तरह की कढ़ाई और पारंपरिक कपड़े हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में मदद करते हैं और हमें हमारे अतीत से जोड़ते हैं।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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