Maharaja Bhupinder Singh of Patiala: जब भी भारत के गौरवशाली इतिहास का जिक्र होता है तो यहां के राजा-महाराजाओं की शौर्यगाथा जरूर याद की जाती है। भारत भूमि एक से बढ़कर एक वीर योद्धा पैदा हुए जिन्होंने भारत के इतिहास को अपने खून से सींचा। जहां कुछ राजा और शहंशाह अपनी वीरता के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हुए तो वहीं कुछ अपनी विलासिता के लिए पूरी दुनिया में जाने गए। 1947 में जब देश अंग्रेजों के गुलामी की जंजीरें तोड़कर आजाद हुआ तो उस वक्त भारत में 550 से ज्यादा देसी रियासतें हुआ करती थीं। सबके अपने राजा, महाराजा, नवाब और निजाम थे। इन राजाओं के शौक भी अनूठे थे, लेकिन इन सबमें पटियाला रियासत के सातवें महाराजा भूपेंद्र सिंह की बात ही कुछ अलग थी।
भूपिंदर सिंह का फेमस हार
महाराजा भूपिंदर सिंह ने जेवर बनाने वाली मशहूर कंपनी कार्टियर से विश्व प्रसिद्ध पटियाला हार बनवाया था। इसमें 2900 से ज्यादा हीरे और कीमती रत्न लगे थे। तब उसकी कीमत 25 मिलियन डॉलर थी। साल में एक बार महाराजा भूपिंदर सिंह नंगे होकर सिर्फ शरीर में यही हार पहनकर प्रजा के सामने आते थे। कहते थे कि उनके लिंग में दैवीय शक्ति है इससे बुरी आत्माएं रियासत से दूर रहेंगी।
महाराजा भूपिंदर सिंह उस वक्त के सबसे अमीर महाराजाओं में हुआ करते थे। उनके राजमहल में 11 रसोइयां थीं। इनमें डेली सैकड़ों लोगों के लिए खाना बनाया जाता था। भूपिंदर सिंह के पैलेस में दीवान रहे जरमनी दास के मुताबिक भूपिंदर सिंह उस जमाने में करोड़ों के डाइनिंग सेट में खाना खाया करते थे। महाराजा को रत्नों जड़ी सोने की थाली में खाना परोसा जाता था। उनके परोसे गए व्यंजनों की संख्या 150 से कम नहीं होती थी।
भूपिंदर सिंह का डाइनिंग सेट
भूपिंदर सिंह के अव्वल दर्जे के इस नायाब डाइनिंग सेट में 166 कांटे, डेजर्ट के 111 कांटे, 111 चम्मचें, 21 बड़ी चम्मचें, सूप के लिए उपयोग में लाई जाने वाली 37 चम्मचें, सलाद परोसने के छह जोड़े बर्तन, चिमटों के छह जोड़े, सब्जियां काटने वाली कैंचियों के तीन जोड़े, 107 स्टील ब्लेड चाकू, फल तथा अन्य कार्यों को करने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले 111 चाकू शामिल थे।
बता दें कि भूपिंदर सिंह का नाम भारत के सबसे रंगीन मिजाज शासक के तौर पर भी लिया जाता है। साल में जितने दिन होते हैं उतनी उन्होंने रानियां रखी थीं। इन 365 रानियों में से 10 प्रमुख थीं। भूपिंदर सिंह के महल में रानियों के नाम लिखी 365 लालटेनें थीं। जो लालटेन पहले बुझती थी, उस पर लिखे रानी के साथ महाराजा रात गुजारते थे।
