Indian Navy Motto: 'शं नो वरुणः' कैसे बना भारतीय नौसेना का मोटो, जानिए क्यों खास है यह मंत्र
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Dec 4, 2025, 11:25 AM IST
Indian Navy Day 2025: शं नो वरुणः को तैत्तिरीय उपनिषद (भृगु वल्ली) से लिया गया है। मूल श्लोक है: 'ऊं शं नो मित्रः शं वरुणः, शं भवत्वर्यमा। शं नो इन्द्रः बृहस्पतिः, शं नो विष्णुरुरुक्रमः'। इसका अर्थ है- देवता ‘मित्र’ हमारे लिए कल्याणकारी हों, वरुण कल्याणकारी हों। ‘अर्यमा’हमारा कल्याण करें। हमारे लिए इन्द्र एवं बृहस्पति कल्याणप्रद हों। ‘उरुक्रम’ (विशाल डगों वाले) विष्णु हमारे प्रति कल्याणप्रद हों।
इडियन नेवी का मोटो: शं नो वरुण: (Photo: Freepik)
Indian Navy Day 2025: भारतीय नौसेना का मोटो है- शं नो वरुणः। संस्कृत का यह मंत्र समुद्र की विशालता, प्राचीन वैभव और आधुनिक सैन्य शक्ति को दर्शाता है। इसका अर्थ है - जल एवं महासागरों के देव वरुण, हमारे लिये कल्याणकारी हों। यह मोटो नौसेना के चिन्ह(Logo) पर अंकित है और समुद्री सीमाओं की रक्षा करने वाले नौसेना के वीर जवानों के लिए प्रेरणा स्रोत है। यह मोटो इस बात की भी तस्दीक करता है कि वैदिक काल से चली आ रही परंपरा आज भी नौसेना को अपनी जड़ों से जोड़ती है। आइए जानते हैं आखिर कैसे संस्कृत का यह मंत्र बन गया नौसेना का मोटो।
समुद्र के देवता वरुण
हिंदू धर्मग्रंथों में वरुण को जल और महासागरों का देवता माना गया है। ऋग्वेद (1500 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व) में वरुण का पहला उल्लेख मिलता है, जहां उन्हें समुद्री मार्गों का ज्ञाता और तूफानों का नियंत्रक कहा गया है। ऋग्वेद (1.25.7) में वर्णन है कि वरुण देव नाविकों और समुद्र से जीविका चलाने वाले लोगों की रक्षा करते। समुद्र में उतरने से पहले नाविक वरुण देव के स्तुति मंत्र का जाप करते थे। कौन जानता था वही जप मंत्र आगे चलकर नौसेना के मोटो का आधार बनेगा।

इंडियन नेवी का ध्वज (Photo: PIB)
वरुण देव का स्तुति मंत्र
शं नो वरुणः को मुख्य रूप से तैत्तिरीय उपनिषद (भृगु वल्ली) से लिया गया है। मूल श्लोक है: 'ऊं शं नो मित्रः शं वरुणः, शं भवत्वर्यमा। शं नो इन्द्रः बृहस्पतिः, शं नो विष्णुरुरुक्रमः'। इसका अर्थ है- देवता ‘मित्र’ हमारे लिए कल्याणकारी हों, वरुण कल्याणकारी हों। ‘अर्यमा’हमारा कल्याण करें। हमारे लिए इन्द्र एवं बृहस्पति कल्याणप्रद हों। ‘उरुक्रम’ (विशाल डगों वाले) विष्णु हमारे प्रति कल्याणप्रद हों।
कुछ विद्वानों का मानना है कि तैत्तिरीय उपनिषद का यह मंत्र ऋग्वेद से प्रेरित है, जहां वरुण की स्तुति में समान मंत्र हैं। भगवद्गीता (अध्याय 11, श्लोक 39) में भी वरुण को विष्णु के रूपों में गिना गया है। आज यह मंत्र नौसेना के लिए शुभकामना और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है।

भारतीय नौसेना के मोटो का अर्थ
कैसे वरुण स्तुति मंत्र बना Indian Navy का मोटो
ब्रिटिश हुकूमत की जंजीरें तोड़ भारत 1947 में आजाद हुआ। उसी साल ब्रिटिश काल की रॉयल इंडियन नेवी से अलग होकर भारत सरकार ने भारतीय नौसेना की स्थापना की। 1950 में गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने यह मोटो सुझाया। उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद से लिया गया यह मंत्र चुना, ताकि नौसेना प्राचीन वैभव से जुड़े। संसद में आम सहमति के बाद इसे आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना का मोटो बना दिया गया।

शं नो वरुण: का महत्व
शं नो वरुणः का महत्व
नौसेना के चिन्ह में राज्य चिन्ह के नीचे सत्यमेव जयते के साथ यह अंकित है। 'शं नो वरुणः' समुद्र की रक्षा, शांति और शक्ति का संदेश देता है। आज विश्व की सबसे बड़ी नौसेनाओं में शुमार भारतीय नौसेना फ्रांस के साथ 'वरुण' अभ्यास करती है, जो मोटो से प्रेरित है। यह मोटो वैदिक बुद्धिमत्ता और आधुनिक शक्ति का संगम है। यह नौसेना को प्रेरित करता है कि वरुण की कृपा से भारत की समुद्री सीमाएं सुरक्षित रहें।