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'UPI कर दो' से बदल गया भारतीयों का खान-पान, जानिए डिजिटल पेमेंट ने कैसे बदली आदतें

UPI food habits: यूपीआई अब सिर्फ पैसे भेजने का माध्यम नहीं रह गया है। यह रोजमर्रा की जिंदगी और खासकर हमारे खाने-पीने के तरीके का भी हिस्सा बन चुका है।

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जानिए डिजिटल पेमेंट ने कैसे बदली आदतें

UPI food habits: बीते जमाने से तुलना करें तो पाएंगे कि यूपीआई (UPI) ने हमारी जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। पहले जहां छोटी-सी चीज खरीदने पर जेब में खुले पैसे तलाशने पड़ते थे, लेकिन अब फोन निकालिए, क्यूआर कोड स्कैन कीजिए और पेमेंट हो गया। इसका असर सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी खाने-पीने की आदतों में भी साफ नजर आने लगा है। आज सड़क किनारे मिलने वाली पानीपुरी हो या दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट का बड़ा बिल, हर जगह UPI का इस्तेमाल आम हो गया है। डिजिटल पेमेंट की इस सुविधा ने हमें छोटे खर्च करने, कभी भी खाना ऑर्डर करने और बिल आसानी से बांटने की आदत डाल दी है। आइए जानते हैं ऐसी ही 5 खान-पान की आदतों के बारे में, जिन पर यूपीआई का असर साफ दिखाई देता है।

छोटी कीमत की चीजें खरीदना हुआ आसान

पहले अगर किसी दुकान पर ₹10 या ₹20 की खरीदारी करनी होती थी, तो सबसे बड़ी चिंता खुले पैसों की होती थी। कई बार दुकानदार के पास छुट्टे नहीं होते थे जिससे ग्राहक को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब ऐसा झंझट काफी कम हो गया है। अब छोटी कीमत की चॉकलेट, आइसक्रीम, चाय, मिठाई या कोई स्नैक खरीदना पहले के मुकाबले ज्यादा आसान महसूस होता है। सीधे शब्दों में समझें तो कई बार तो हम सिर्फ इसलिए भी कोई छोटी खाने की चीज खरीद लेते हैं क्योंकि पेमेंट करना इतना आसान है कि ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती।

देर रात भूख लगे तो खाना मंगाना आसान

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और डिजिटल पेमेंट ने देर रात खाना मंगाने की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। कुछ साल पहले रात में अचानक भूख लगने पर विकल्प काफी सीमित होते थे। लेकिन अब रात के 12 या 1 बजे पिज्जा, बर्गर, नूडल्स या कोई दूसरा स्नैक ऑर्डर करना बेहद आसान हो गया है। ऑर्डर करने के बाद भुगतान के लिए कैश की जरूरत नहीं पड़ती। यूपीआई से कुछ सेकंड में पेमेंट हो जाता है।

दोस्तों के साथ बिल बांटना अब आसान

पहले दोस्तों के साथ बाहर खाने-पीने के दौरान बिल आने के बाद हिसाब-किताब करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। किसने क्या खाया, किसे कितना देना है और किसके पास खुले पैसे हैं इन छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा वक्त जाया होता था। अब स्थिति काफी बदल गई है। एक दोस्त पूरा बिल दे सकता है और बाकी लोग तुरंत अपना हिस्सा यूपीआई के जरिए भेज सकते हैं। चाहे चाय की दुकान हो, कैफे हो या रेस्टोरेंट, बिल बांटना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है।

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रेस्टोरेंट में मेन्यू से लेकर पेमेंट तक QR कोड

कई रेस्टोरेंट और कैफे में अब मेज पर ही क्यूआर कोड दिया जाता है। ग्राहक फोन से क्यूआर कोड स्कैन करके मेन्यू देख सकता है और कुछ जगहों पर वहीं से खाना भी ऑर्डर किया जा सकता है। इसके बाद भुगतान भी डिजिटल तरीके से हो जाता है। यानी खाने का पूरा अनुभव धीरे-धीरे मोबाइल स्क्रीन से जुड़ता जा रहा है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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