लाइफस्टाइल

हमारा दिमाग भी हमें देता है धोखा, रोज होते हैं इन साइकोलॉजिकल ट्रिक्स का शिकार

मनोविज्ञान मानता है कि अपने दिमाग के कारण ही कभी हम गलत लोगों पर भरोसा कर लेते हैं, कभी किसी अफवाह को सच मान लेते हैं और कभी अपनी ही राय को सबसे सही समझने लगते हैं।

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6 साइकोलॉजिकल ट्रिक्स, जिनका शिकार हम रोज होते हैं (Photo: iStock)

Psychological Tricks: हमें लगता है कि जो हम देखते, सुनते और समझते हैं, वही सच होता है। इसके उलट, साइकोलॉजी कहती है कि हमारा दिमाग हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष नहीं होता। कई बार वह चीजों को आसान बनाने के लिए ऐसे शॉर्टकट अपनाता है, जो हमारी सोच और फैसलों को प्रभावित कर देते हैं। इन्हें कॉग्निटिव बायस कहा जाता है।

मनोविज्ञान मानता है कि मेंटल शॉर्टकट हमें बिना एहसास हुए प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि कभी हम गलत लोगों पर भरोसा कर लेते हैं, कभी किसी अफवाह को सच मान लेते हैं और कभी अपनी ही राय को सबसे सही समझने लगते हैं। आइए जानते हैं ऐसी 6 साइकोलॉजिकल ट्रिक्स, जिनसे लगभग हर इंसान कभी न कभी जरूर रूबरू होता है:

कन्फर्मेशन बायस: वही सच लगता है, जो पहले से मानते हैं

क्या आपने कभी देखा है कि सोशल मीडिया पर लोग वही पोस्ट ज्यादा पढ़ते या शेयर करते हैं, जो उनकी सोच से मेल खाती हैं? इसे कन्फर्मेशन बायस कहते हैं। हमारा दिमाग उन जानकारियों को ज्यादा महत्व देता है, जो हमारी पहले से बनी राय का समर्थन करती हैं। जो बातें हमारी सोच के खिलाफ हों, उन्हें हम अकसर नजरंदाज कर देते हैं।

एंकरिंग इफेक्ट: पहली जानकारी का असर

मान लीजिए किसी शर्ट की कीमत पहले 5,000 रुपये दिखाई जाती है और फिर उस पर 2,999 रुपये का ऑफर लिखा होता है। आपको यह सौदा बहुत अच्छा लग सकता है। इसे एंकरिंग इफेक्ट कहा जाता है। मतलब जो पहली जानकारी हमारे सामने आती है, वही बाद के फैसलों को प्रभावित करने लगती है।

हेलो इफेक्ट: एक अच्छी बात से पूरी राय बना लेना

अगर कोई व्यक्ति दिखने में आकर्षक है या बहुत आत्मविश्वास से बात करता है, तो हम कई बार यह मान लेते हैं कि वह ईमानदार, बुद्धिमान या सक्षम भी होगा। इसे हेलो इफेक्ट कहते हैं। यानी किसी एक अच्छी विशेषता के आधार पर पूरे व्यक्तित्व के बारे में सकारात्मक धारणा बना लेना।

नेगेटिविटी बायस: बुरी बातें ज्यादा याद रहती हैं

अगर किसी ने आपकी 10 बार तारीफ की और एक बार आलोचना कर दी, तो रात तक आपके दिमाग में वही आलोचना घूमती रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारा दिमाग नकारात्मक अनुभवों को सकारात्मक अनुभवों की तुलना में ज्यादा गंभीरता से याद रखता है।

बैंडवैगन इफेक्ट: सब कर रहे हैं, तो हम भी

कई बार हम किसी चीज को इसलिए सही मान लेते हैं क्योंकि बहुत सारे लोग उसे सही मान रहे होते हैं। चाहे कोई वायरल ट्रेंड हो, निवेश का फैसला हो या किसी प्रोडक्ट की खरीदारी, भीड़ का असर हमारी सोच पर पड़ता है। इसे बैंडवैगन इफेक्ट कहा जाता है।

ओवरकॉन्फिडेंस बायस: खुद पर जरूरत से ज्यादा भरोसा

कई लोग बिना पूरी जानकारी के भी यह मान लेते हैं कि उनका फैसला बिल्कुल सही है। यही ओवरकॉन्फिडेंस बायस है। यह आदत गलत निवेश, गलत करियर फैसलों या रिश्तों में गलतफहमी जैसी समस्याओं की वजह बन सकती है।

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इन साइकोलॉजिकल ट्रिक्स से कैसे बचें?

हर मानसिक शॉर्टकट बुरा नहीं होता। कई बार ये हमें जल्दी फैसले लेने में मदद भी करते हैं। वैसे अगर हम इनके बारे में जागरूक रहें, तो गलत निर्णय लेने की संभावना कम हो सकती है:

- किसी भी जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें।

- अपनी राय से अलग विचार भी पढ़ें और सुनें।

- बड़े फैसले लेने से पहले थोड़ा समय लें।

- भावनाओं की बजाय तथ्यों पर ध्यान दें।

- अगर संभव हो, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति की राय भी जरूर लें।

हमेशा ध्यान रहे कि इन कॉग्निटिव बायस को पहचानना बेहतर फैसले लेने में मदद नहीं करता। इसके साथ ही हमें खुद को और दूसरों को ज्यादा समझने का मौका भी देता है। यही जागरूकता बेहतर सोच की पहली सीढ़ी है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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