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क्या केमिकल से पकाया गया होता है अंदर से सख्त आम, इन 7 तरीकों से जानें बाजार से लाया आम खाने लायक है भी या नहीं

How to know mango is artificially ripened: बाजार से जो आम लेकर आए हैं कहीं वो केमिकल से तो नहीं पका। जानिए 7 आसान तरीके जो केमिकल और नेचुरल तरीके से पके आम के अंतर को समझने में मदद करेंगे।

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आम कैसे पका है, खाना है या नहीं- कैसे जानें

How to know mango is artificially ripened: गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आमों की बहार दिखाई देने लगती है। कोई दशहरी ढूंढ रहा होता है, तो किसी की नजर अल्फांसो पर टिक जाती है। रसदार, मीठे और खुशबूदार आम भारती में गर्मी के मौसम की पहचान हैं। तो गर्मी में आम का स्वाद तो आप भी लेना चाहते होंगे लेकिन पहले के मुद्दे पर सावधान हो जाएं। आम को खाने से पहले ये देख लें कि कहीं ये केमिकल से तो नहीं पकाया गया। इसकी पिछले कुछ वर्षों में एक चिंता भी तेजी से बढ़ी है - क्या जो आम हम खा रहे हैं, वह प्राकृतिक तरीके से पका है या केमिकल की मदद से।

केमिकल से पके आम कैसे पहचानें

दरअसल, बाजार में जल्दी सप्लाई और ज्यादा मुनाफे के लिए कई जगहों पर कच्चे आमों को केमिकल की मदद से पकाया जाता है। FSSAI की ओर से इस बारे में लगातार चेतावनी भी दी जाती है। FSSAI ने खासतौर पर बताया है कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे पदार्थों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है। और इससे पके फल सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि कुछ आसान संकेतों की मदद से आप पहचान सकते हैं कि आम प्राकृतिक तरीके से पका है या नहीं। जानें इनके बारे में। गाजियाबाद के एक अस्पताल के साथ जुड़े ENT स्पेशलिस्ट प्रफेसर डॉ. बीपीएस त्यागी ने अपनी पोस्ट में इसकी विस्तार से जानकारी दी है।

1. रंग देखकर ही सब तय मत करिए

अक्सर लोग चमकदार पीले आम को देखकर मान लेते हैं कि फल पूरी तरह पका हुआ है। लेकिन यहां आपको जानना जरूरी है कि प्राकृतिक तरीके से पके आमों का रंग एक जैसा नहीं होता। पेड़ पर पके आम कहीं हल्का हरे होंगे तो इन पर कहीं पीलेपन की झलक ज्यादा होगी।

जैसे लंगड़ा आम पूरी तरह हरा दिखते हुए भी अंदर से मीठा और पका हो सकता है। वहीं केमिकल से पकाए गए आमों में अक्सर पूरा रंग एकसमान चमकीला पीला दिखता है। अगर आपको देखने में ही नेचुरल ना लगे तो इसे ना खरीदें।

2.खुशबू सबसे बड़ा संकेत देती है

एक पका हुआ आम अपनी खुशबू से ही पहचान में आ जाता है। खासतौर पर डंठल के पास से मीठी, हल्की फ्रूटी स्मेल और ताजगी भरी महक आनी चाहिए।

अगर आम में कोई खास खुशबू नहीं आ रही या उसमें हल्की केमिकल जैसी गंध महसूस हो रही है, तो ऐसे आम को ना खरीदें। कई बार कृत्रिम रूप से पकाए गए आमों में अल्कोहल जैसी अजीब गंध भी महसूस होती है।

खुशबू बताती है कि आम कैसे पका होगा

खुशबू बताती है कि आम कैसे पका होगा

3. डंठल को देखकर पहचानें

आम के डंठल वाले हिस्से को ध्यान से देखें। प्राकृतिक तरीके से पके आमों में यह हिस्सा थोड़ा मुलायम और हल्का धंसा हुआ दिखाई दे सकता है।

वहीं कृत्रिम रूप से पकाए गए आमों में डंठल का हिस्सा अक्सर सख्त और बिल्कुल ताजा लगता है, क्योंकि फल वास्तव में पेड़ पर पूरी तरह पका ही नहीं होता।

4. काट कर पता चलेगा सच

कई बार आम बाहर से बेहद आकर्षक दिखता है, लेकिन अंदर का गूदा उसकी असलियत बता देता है। प्राकृतिक रूप से पके आम का गूदा एक समान पीला या सुनहरा होता है और बीज से आसानी से अलग हो जाता है।

अगर आम काटने पर बीज के पास से यह सफेद दिखे, गूदा कहीं ज्यादा नरम और कहीं कच्चा लगे या स्वाद फीका महसूस हो, तो यह केमिकल के जरिए पका हो सकता है।

काटने पर पता चलेगा आम का 'सच'

काटने पर पता चलेगा आम का 'सच'

5. हाथ से दबाकर जरूर जांचें

आम खरीदते समय उसे हल्के हाथ से दबाकर महसूस करें। प्राकृतिक रूप से पका आम थोड़ा नरम महसूस होता है और उसकी इसका छिलका भी टाइट नहीं लगता।

वहीं केमिकल से पकाया गया आम ऊपर से पीला जरूर दिखेगा, लेकिन दबाने पर सख्त या कड़ा महसूस हो सकता है। दरअसल केमिकल से पकाया फल बाहर बाहर से ज्यादा पकता है और अंदर का का गूदा पूरी तरह तैयार नहीं होता। इस वजह से यह अंतर आता है।

6. सीजन और कीमत पर भी ध्यान दें

अगर मार्च की शुरुआत में ही बाजार में बड़े पैमाने पर पके आम दिखने लगें या महंगे किस्म के आम बहुत सस्ते दाम पर मिल रहे हों, तो थोड़ा सतर्क रहना जरूरी है।

कई बार जल्दी बाजार में उतारने के लिए कच्चे आमों को तोड़कर केमिकल से पकाया जाता है ताकि बाजार में इनको समय से पहले बेचकर मुनाफा कमाया जा सके।

7. बहुत जल्दी खराब होना भी चेतावनी है

प्राकृतिक रूप से पका आम सामान्य तापमान पर कई दिनों तक ठीक रह सकता है। लेकिन केमिकल से पकाए गए आम अक्सर जल्दी खराब होने लगते हैं। उन पर काले धब्बे पड़ सकते हैं, फल ऊपर से गलना शुरू हो जाएगा या एक-दो दिन में ही सड़ने लगेगा। दूसरी तरफ अगर आम कई दिनों तक बिल्कुल नहीं पक रहा, तब भी हो सकता है कि इस पर केमिकल लगा हो।

कैल्शियम कार्बाइड क्यों माना जाता है खतरनाक

विशेषज्ञों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली गैस शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इससे सिरदर्द, चक्कर, सांस से जुड़ी परेशानियां और लंबे समय में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

इसी वजह से फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने ऐसे केमिकल्स के इस्तेमाल पर बैन लगा रखा है।

इसलिए हम आपको यही सलाह देंगे कि आम खरीदते समय सिर्फ उसका रंग देखकर फैसला न करें। उसे सूंघें, हल्का दबाकर देखें, डंठल जांचें और जरूरत पड़े तो काटकर भी देखें। गर्मी के इस सीजन में आम का मजा जरूर लें, लेकिन थोड़ी सावधानी के साथ।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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