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History Of Harmonium: भारत में क्यों 30 साल तक बैन था हारमोनियम? चाचा नेहरू से रवींद्रनाथ टैगोर तक, सब थे इस 'सुरदर्पण' के खिलाफ

History Of Harmonium In Hindi: क्या आप जानते हैं कि हारमोनियम को 30 साल तक भारत में बैन रखा गया। क्या आप ये जानते हैं कि जिस हारमोनियम के बिना आज कोई शास्त्रीय संगीत पूरा नहीं होता वो भारत का है ही नहीं। इतना ही नहीं, पंडित जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर भी इसके सख्त खिलाफ थे। आइये आज हारमोनियम की पूरी कहानी डिटेल में जानते हैं।

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Why Jawaharlal Nehru Rabindranath Tagore Turned Against Harmonium All India Radio Banned It In India For Thirty Years

History Of Harmonium In Hindi: हारमोनियम, यानी भारतीय शास्त्रीय संगीत की जान। हारमोनियम के बिना कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरा नहीं लगता और ना ही किसी म्यूजिकल कॉम्पिटिशन में जान आती है। हारमोनियम की एक आवाज लोगों के मन को शांत कर देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हारमोनियम शब्द हिंदी तो नहीं है फिर ये शब्द आया कहां से? क्या आपको ये पता है कि हारमोनियम को 30 साल के लिए भारत में बैन कर दिया गया था। इतना ही नहीं, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर भी इसके खिलाफ थे। हारमोनियम का इतिहास जितना पुराना है, उससे भी खूबसूरत है उसकी कहानी। आइये इसके बारे में डिटेल में जानते हैं।

कहां हुआ था हारमोनियम का आविष्कार?

1700 के दशक में हारमोनियम का आविष्कार यूरोप में हुआ था। लेकिन इसमें कई सारे बदलाव होते रहे। फाइनली, सन 1840 में हारमोनियम को फ्रांस में बनाया गया और 1842 में एलेक्जेंडर डेबेन ने इसके डिजाइन का पेटेंट करवा लिया और इसे हारमोनियम नाम दिया। जिसके बाद 19वीं शताब्दी में ये भारत आया।

नेहरू और टैगोर क्यों थे हारमोनियम के खिलाफ?

हारमोनियम भारत तो आया लेकिन 1900 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभर में इसे लेकर बहस छिड़ गई। एक विदेशी संगीत वाद्य यंत्र होने की वजह से पंडित जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर भी इसके खिलाफ थे। इतना ही नहीं, ये आंदोलन के निशाने पर भी आ गया था। रवींद्रनाथ टैगोर ने तो हारमोनियम को अपने आश्रम में पूरी तरह बैन भी कर दिया था। तब भारतीय लोगों का मानना था कि हारमोनियम भारतीय संगीत की शुद्धता को नुकसान पहुंचा रहा है और हमारे पारंपरिक यंत्र जैसे सितार और सारंगी के लिए खतरा बन रहा है।

भारत में क्यों 30 साल तक बैन रहा हारमोनियम?

हारमोनियम को लेकर देशभर में इस कदर विवाद छिड़ा कि ऑल इंडिया रेडियो ने वेस्टर्न म्यूजिक विंग के प्रमुख जॉन फोल्ड्स को पत्र लिखकर बताया कि हारमोनियम में माइक्रोटोन पर मौन है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की खास विशेषता है। इसके बाद जब रवींद्रनाथ टैगोर ने भी आकाशवाणी कोलकाता को पत्र लिखकर इसे बंद करने की मांग तो 1 मार्च, 1940 को आकाशवाणी ने हारमोनियम पर बैन लगा दिया। ये बैन 30 साल तक रहा और 1970 में हटाया गया।

क्या है हारमोनियम का हिंदी नाम?

क्या आपको हारमोनियम का हिंदी नाम पता है? अगर नहीं तो बता दें कि यूं तो हिंदी में हारमोनियम को खरज कहते हैं। लेकिन कई सारे लोग इसे पेटी बाजा भी कहते हैं। जब नेहरू और टैगोर इसके खिलाफ थे तब इसे सुरदर्पण और सुरमनोहर नाम भी दिया गया, लेकिन जब इन नामों का भी कोई असर नहीं हुआ तो ये हिंदी नाम भी बंद हो गए। आज के समय में हर कोई इसे हारमोनियम के नाम से ही जानता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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