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चैत्र नवरात्रि के साथ शुरू हुआ हिंदू नववर्ष, इस बार 13 महीने क्यों पड़ रहे हैं, इस साल क्या है खास

Why 13 Months This Year: आज से चैत्र नवरात्रि के साथ हिंदू नववर्ष 2026 शुरू हो गया है। मगर क्या आप जानते हैं, इस बार एक खास बात यह है कि पूरे साल में 12 के बजाए 13 महीने पड़ेंगे। बता दें कि ऐसा अधिक मास की वजह से होता है। जानिए इस साल को क्यों कहा जा रहा 'रौद्र संवत्सर', क्या होता है इसका मतलब और क्यों माना जा रहा ये यह साल खास।

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हिंदू नववर्ष में क्यों पड़ रहे 12 के बजाए 13 महीने

Why 13 Months This Year: चैत्र नवरात्रि के साथ हिंदू नववर्ष 2026 की शुरुआत हो चुकी है। घर-घर में पूजा, नए संकल्प और एक नई शुरुआत का माहौल है। लेकिन इस बार नववर्ष सिर्फ शुरुआत की वजह से ही नहीं, बल्कि एक खास वजह से भी चर्चा में है, वह यह कि इस साल 13 महीने पड़ रहे हैं। सुनने में थोड़ा अलग लगता है, क्योंकि हम हमेशा 12 महीने ही जानते हैं। साथ ही इस साल को ‘रौद्र संवत्सर’ कहा जा रहा है। ऐसे में मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और इसका क्या मतलब है। चलिए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

चैत्र नवरात्रि से ही क्यों शुरू होता है नया साल

हिंदू पंचांग में साल की शुरुआत चैत्र महीने से मानी जाती है। खास तौर पर शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया संवत्सर शुरू होता है। यही वजह है कि चैत्र नवरात्रि का पहला दिन ही हिंदू नववर्ष का पहला दिन होता है। इस समय मौसम भी बदलता है, पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं, यानी प्रकृति भी जैसे नई शुरुआत करती है, इसीलिए इसे शुभ माना गया है।

13 महीने पड़ने की असली वजह क्या है

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस साल 13 महीने क्यों पड़ रहे हैं? दरअसल, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर चलता है, जबकि हमारा सामान्य साल सूरज के हिसाब से होता है। इन दोनों के बीच थोड़ा अंतर आ जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर कुछ साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं। इसी वजह से इस साल 12 की जगह 13 महीने हो रहे हैं।

अधिक मास का धार्मिक महत्व क्या है

अधिक मास को बेहद पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान लोग ज्यादा पूजा-पाठ, दान और भक्ति में समय बिताते हैं। हालांकि इस महीने में शादी-ब्याह जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते। इसे एक तरह से खुद को सुधारने और भगवान के करीब जाने का समय माना जाता है।

रौद्र संवत्सर क्या होता है

हर हिंदू साल का एक नाम होता है और इस बार का नाम ‘रौद्र संवत्सर’ है। नाम सुनकर थोड़ा सख्त लग सकता है, लेकिन इसका मतलब सिर्फ नकारात्मक नहीं होता। इसे बदलाव, ऊर्जा और नई चुनौतियों का संकेत माना जाता है। यानी यह साल हमें मजबूत बनने और हालात के अनुसार खुद को ढालने की सीख देता है।

इस साल क्या खास महसूस होगा

13 महीने होने की वजह से यह साल थोड़ा अलग अनुभव देगा। धार्मिक दृष्टि से भी यह समय ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाएगा, क्योंकि अधिक मास में पूजा-पाठ का महत्व बढ़ जाता है। साथ ही यह साल हमें धैर्य रखने, सोच-समझकर फैसले लेने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है।

यह हिंदू नववर्ष सिर्फ तारीख बदलने भर का मौका नहीं है, बल्कि खुद को बेहतर बनाने और नई शुरुआत करने का सही समय भी है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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