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बंगाल का 'कोहिनूर' कहलाता है हिमसागर, यह आम जितना खास उतना ही रोचक है इतिहास

Himsagar Mango: हिमसागर आम को जीआई टैग प्राप्त है, जो इसकी शुद्धता और भौगोलिक विशिष्टता की पुष्टि करता है। पश्चिम बंगाल के लोग इसे अपने मेहमानों को परोसना गर्व की बात मानते हैं।

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बंगाल की शान है यह हिमसागर आम (AI Image)

Himsagar Mango: आम का सीजन चल रहा है। जब भी फलों के राजा आम की बात होती है, तो पश्चिम बंगाल के 'हिमसागर' का नाम प्रमुखता के साथ लिया जाता है। अपनी खास मिठास, मखमली बनावट और मनमोहक सुगंध के कारण इसे आमों की दुनिया का 'कोहिनूर' कहा जाता है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, नदिया, हुगली और मालदा जिलों में पैदा होने वाला यह आम महज फल नहीं है। यह पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है।

हिमसागर आम क्यों है इतना खास?

हिमसागर की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से रेशारहित होना है। जहां दूसरे आमों में रेशे होते हैं वहीं हिमसागर में आपको रेश नहीं मिलेंगे। जब आप इसे खाते हैं, तो इसका गूदा मक्खन की तरह मुंह में घुल जाता है। अन्य खासियतों में शामिल हैं:

गजब की मिठास: इसमें मीठे की मात्रा अन्य आमों की तुलना में काफी संतुलित और अधिक होती है, जो इसे प्राकृतिक रूप से बहुत मीठा बनाती है।

सुनहरा गूदा: छिलका पतला और हरा होने के बावजूद, इसके अंदर का गूदा गहरा पीला और केसरिया रंग का होता है।

सुगंध: इसकी खुशबू इतनी मदिरा जैसी और तीखी होती है कि एक कमरे में रखा एक आम पूरे घर को महका सकता है।

हिमसागर आम क्यों हैं इतना खास (AI Image)

हिमसागर आम क्यों हैं इतना खास (AI Image)

अगर आप इस आम को खाना चाहते हैं तो यह आम बाजार में बहुत कम समय, आमतौर पर मई के अंत से जून के अंत तक, के लिए उपलब्ध होता है।

हिमसागर आम और इसके नाम का इतिहास

हिमसागर आम जितना खास है इसका इतिहास भी दिलचस्प है। इसकी जड़ें पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से जुड़ी हैं। माना जाता है कि इसकी खेती की शुरुआत नवाबों के दौर में हुई थी। मुर्शिदाबाद के नवाबों को बागवानी का बहुत शौक था और उन्होंने ही बेहतरीन किस्मों के क्रॉस-ब्रीडिंग से हिमसागर जैसी वैरायटी की खोज की।

इसके नाम 'हिमसागर' के पीछे भी एक रोचक तर्क है। 'हिम' का अर्थ है बर्फ या ठंडा और 'सागर' का अर्थ है समुद्र। बंगाल की भीषण गर्मी में जब यह आम पककर तैयार होता है, तो इसकी मिठास और ठंडक देने वाली प्रकृति के कारण इसे यह नाम दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसकी तासीर अन्य आमों की तुलना में शरीर को अधिक शीतलता प्रदान करने वाली मानी जाती है, इसलिए इसे 'ठंडक का महासागर' यानी हिमसागर कहा गया।

आज हिमसागर को जीआई टैग (Geographical Indication) प्राप्त है, जो इसकी शुद्धता और भौगोलिक विशिष्टता की पुष्टि करता है। पश्चिम बंगाल के लोग इसे अपने मेहमानों को परोसना गर्व की बात मानते हैं। यदि आपने अब तक हिमसागर का स्वाद नहीं चखा है, तो समझिए कि आपने आम के असली वैभव का अनुभव अभी नहीं किया है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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