Hanuman ji ka Meethi Boondi ke Bhog ki Recipe: हनुमान जयंती का पावन अवसर भक्ति, ऊर्जा और उल्लास से भरा होता है। इस दिन भगवान हनुमान को प्रसन्न करने के लिए घरों में खास प्रसाद बनाया जाता है, जिसमें मिठाइयों का विशेष महत्व होता है। अगर आप इस बार कुछ पारंपरिक और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो रसीली बूंदी आपके लिए एक परफेक्ट ऑपशन है। इसकी मीठी चाशनी में डूबी नरम-नरम बूंदी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि प्रसाद के रूप में भी बेहद शुभ मानी जाती है। खास बात यह है कि इसे आप आसानी से घर पर ही बना सकते हैं और अपने त्योहार को और भी खास बना सकते हैं। आइए जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी ।
प्रसाद बनाने के लिए जरूरी सामग्री
बूंदी के लिए:
बेसन: 1 कप (छानकर इस्तेमाल करें)
केसरिया फूड कलर: 1/4 छोटी चम्मच
बेकिंग सोडा: 1/4 छोटी चम्मच
देसी घी: तलने के लिए (प्रसाद के लिए घी उत्तम है)
पानी: जरूरत के अनुसार
चाशनी (Sugar Syrup) के लिए:
चीनी: 1.5 कप
पानी: सवा कप
इलायची: 2 (कुटी हुई)
केसरिया फूड कलर: 1/4 छोटी चम्मच
बूंदी बनाने की विधि
सबसे पहले एक कड़ाही या गहरे बर्तन में डेढ़ कप चीनी और सवा कप पानी डालें। इसमें खुशबू के लिए कुटी हुई इलायची मिला दें। अब गैस की मीडियम आंच पर इसे तब तक चलाएं जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए। चीनी घुलने के बाद इसे 5 मिनट तक और उबालें ताकि चाशनी थोड़ी चिपचिपी (शहद जैसी) हो जाए। अंत में थोड़ा केसरिया रंग डालकर मिक्स करें और गैस बंद कर दें। चाशनी को हल्का गर्म ही रहने दें।
बूंदी का घोल बनाएं
एक बड़े बर्तन में बेसन और केसरिया रंग डालें। अब इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए एक स्मूद घोल तैयार करें। ध्यान रहे कि घोल में गुठलियां न पड़ें। अब इसमें बेकिंग सोडा डालें और करीब 5 मिनट तक अच्छी तरह फेंटें। घोल ऐसा होना चाहिए जो चम्मच से गिराने पर एक धार में गिरे।
बूंदी तलने का तरीका
कड़ाही में देसी घी गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब एक छेद वाला बड़ा झारा लें और उसे कड़ाही से थोड़ा ऊपर पकड़ें। झारे पर बेसन का घोल डालें। बेसन की बूंदें अपने आप नीचे गिरकर गोल आकार लेने लगेंगी। इन्हें सुनहरा और कुरकुरा होने तक मध्यम आंच पर तलें।
चाशनी में भिगो दें
तली हुई कुरकुरी बूंदी को घी से निकालकर सीधे तैयार की गई हल्की गर्म चाशनी में डाल दें। फिर बूंदी को चाशनी में अच्छी तरह डुबोकर कम से कम 1 घंटे के लिए छोड़ दें। इससे बूंदी अंदर तक चाशनी सोख लेगी और एकदम रसीली हो जाएगी। इसे एक छलनी में निकालें ताकि अतिरिक्त चाशनी अलग हो जाए और फिर श्रद्धा के साथ बजरंगबली को बूंदी का भोग लगाएं।
Written By- Gaurangi Yadav
