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Ghaat Shayari: सारी नफरतें बह जाएं, गंगा घाट पर अगर मन भी नहलाएं.., पढ़ें घाट पर शायरी

Ghaat Shayari in Hindi: नदी बदलती है, पानी बह जाता है, लेकिन घाट यादों और परंपराओं को शाश्वत बनाए रखते हैं। इन्हीं घाटों पर तमाम शायरों ने एक से बढ़कर एक लाजवाब शेर लिखे हैं। आइए पढ़ें घाट पर शायरी हिंदी में:

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घाट पर शायरी (Photo: iStock)

Ghaat Par Shayari (घाट पर शायरी): नदी के किनारे बने घाट सदियों से भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। घाटों पर पानी सिर्फ बहता नहीं है। यह लोगों की आस्था, थकान, सपने और उम्मीदें अपने आत्मसात करते हुए जाता है। नदी के घाट वो जगह हैं जहां लोग जीवन के बेहद सामान्य और बेहद खास पल जीते हैं। यहीं से जीवन की शुरुआत होती है और यहीं पर खत्म भी। जन्म के संस्कार से लेकर अंत की आखिरी यात्रा तक,ये घाट हर भावना के साक्षी बनते हैं। नदी बदलती है, पानी बह जाता है, लेकिन घाट यादों और परंपराओं को शाश्वत बनाए रखता है। इन्हीं घाटों पर तमाम शायरों ने एक से बढ़कर एक लाजवाब शेर लिखे हैं। आइए पढ़ें घाट पर शायरी हिंदी में:

1. या इलाहाबाद में रहिए जहां संगम भी हो

या बनारस में जहां हर घाट पर सैलाब है

- क़मर जमील

2. मग़रिब मुझे खींचे है तो रोके मुझे मशरिक़

धोबी का वो कुत्ता हूँ कि जो घाट न घर का

- अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

3. धारे से कभी कश्ती न हटी और सीधी घाट पर आ पहुँची

सब बहते हुए दरियाओं के क्या दो ही किनारे होते हैं

- आरज़ू लखनवी

4. घाट पर तलवार के नहलाईयो मय्यत मिरी

कुश्ता-ए-अबरू हूँ मैं क्या ग़ुस्ल-ख़ाना चाहिए

- असद अली ख़ान क़लक़

5. कश्ती है घाट पर तू चले क्यूं न दूर आज

कल बस चले चले न चले चल उठा तो ला

- नातिक़ गुलावठी

6. ये दो-दिली में रहा घर न घाट का 'अंजुम'

बुतों को कर न सका ख़ुश ख़ुदा को पा न सका

- अंजुम मानपुरी

7. इश्क़ के घाट पर सँभल कर चढ़

क्यों कि उस का चढ़ाओ मुश्किल है

- लुत्फ़ुन्निसा इम्तियाज़

8. ये मोहब्बत वो घाट है जिस पर

दाग़ लगते हैं कपड़े धोने से

- ज़िया मज़कूर

9. लोग कंधे बदल बदल के चले

घाट पहुंचे बड़े वसीलों से

- गुलज़ार

10. सारी नफ़रतें बह जाएं

गंगा घाट पर अगर मन भी नहलाएं

- फौज़िया मुग़ल

11. हो गई हर घाट पर पूरी व्यवस्था

शौक़ से डूबे जिसे भी डूबना है

- दुष्यंत कुमार

12. वाह रे अपनी सुब्ह-ए-बनारस

घाट के पत्थर जैसे पारस

- नज़ीर बनारसी

13. हर इक को भाती है दिल से फ़ज़ा बनारस की

वो घाट और वो ठंडी हवा बनारस की

- अख़्तर शीरानी

14. लौट आई हो वो शब जिस के गुज़र जाने पर

घाट से पायलें बजने की सदा आई हो

- परवीन शाकिर

15. ले के अंगड़ाई जो तू घाट पे बदले पहलू

चलता फिरता नज़र आ जाए नदी पर जादू

- जोश मलीहाबादी

घाटों पर लिखे ये शेर किसी का भी दिल जीतने का दम रखते हैं। अगर आप शायरी से अपने किसी खास का दिल जीतना चाहते हैं तो इनमें से कोई भी पसंद का शेर उसे भेज सकते हैं। उम्मीद करते हैं कि घाट पर शायरी आपको जरूर पसंद आई होगी।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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