Dosti Shayari in Hindi 2 line: लोग कहते हैं कि दोस्ती के एहसास को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर अल्फाजों का चुनाव सही से हो तो दोस्ती के हर पहलू को बेहद खूबसूरती से बयां किया जा सकता है। ऐसा हुआ भी है। बहुत से शायरों ने दोस्ती के जज्बात को शब्दों में पिरोकर शायरी के तौर पर पेश किया है। इन शायरियों में आपको दोस्ती के हर रंग मिल जाएंगे। आइए पढ़ते हैं दोस्ती पर लिखे कई मशहूर शायरों के चंद शानदार सेर:
Dosti Shayari Attitude | Dosti SHayari 2 line | Dosti Shayari sad
1. दोस्त दो-चार निकलते हैं कहीं लाखों में
जितने होते हैं सिवा उतने ही कम होते हैं
- लाला माधव राम जौहर
2. दोस्ती और किसी ग़रज़ के लिए
वो तिजारत है दोस्ती ही नहीं
- इस्माइल मेरठी
3. मैं हैरां हूं कि क्यूं उस से हुई थी दोस्ती अपनी
मुझे कैसे गवारा हो गई थी दुश्मनी अपनी
- एहसान दानिश
4. सुना है ऐसे भी होते हैं लोग दुनिया में
कि जिन से मिलिए तो तन्हाई ख़त्म होती है
- इफ्तिखार शफ़ी
5. तोड़ कर आज ग़लत-फ़हमी की दीवारों को
दोस्तो अपने तअ'ल्लुक़ को संवारा जाए
- संतोष खिरवड़कर
6. दोस्ती को बुरा समझते हैं
क्या समझ है वो क्या समझते हैं
- नूह नारवी
7. फ़ाएदा क्या सोच आख़िर तू भी दाना है 'असद'
दोस्ती नादां की है जी का ज़ियां हो जाएगा
- मिर्ज़ा ग़ालिब
8. दोस्त दिल रखने को करते हैं बहाने क्या क्या
रोज़ झूटी ख़बर-ए-वस्ल सुना जाते हैं
- लाला माधव राम जौहर
9. दुश्मनी ने सुना न होवेगा
जो हमें दोस्ती ने दिखलाया
- ख़्वाजा मीर दर्द
10. निगाह-ए-नाज़ की पहली सी बरहमी भी गई
मैं दोस्ती को ही रोता था दुश्मनी भी गई
- माइल लखनवी
11. दोस्ती की तुम ने दुश्मन से अजब तुम दोस्त हो
मैं तुम्हारी दोस्ती में मेहरबां मारा गया
- इम्दाद इमाम असर
12. दोस्ती बंदगी वफ़ा-ओ-ख़ुलूस
हम ये शम्अ' जलाना भूल गए
- अंजुम लुधियानवी
13. जब दोस्ती होती है तो दोस्ती होती है
और दोस्ती में कोई एहसान नहीं होता
- गुलज़ार
14. गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन
ऐसा लगा बसर हुए जन्नत में चार दिन
- ए जी जोश
15. 'शाइर' उन की दोस्ती का अब भी दम भरते हैं आप
ठोकरें खा कर तो सुनते हैं संभल जाते हैं लोग
- हिमायत अली शाएर
16. आ गया 'जौहर' अजब उल्टा ज़माना क्या कहें
दोस्त वो करते हैं बातें जो अदू करते नहीं
- लाला माधव राम जौहर
17. मुझे जो दोस्ती है उस को दुश्मनी मुझ से
न इख़्तियार है उस का न मेरा चारा है
- ग़मगीन देहलवी
18. मुझे दुश्मन से अपने इश्क़ सा है
मैं तन्हा आदमी की दोस्ती हूँ
- बाक़र मेहदी
19. दुश्मन से ऐसे कौन भला जीत पाएगा
जो दोस्ती के भेस में छुप कर दग़ा करे
- सलीम सिद्दीक़ी
20. ज़िक्र मेरा आएगा महफ़िल में जब जब दोस्तो
रो पड़ेंगे याद कर के यार सब यारी मिरी
- सदा अम्बालवी
21. कुछ समझ कर उस मह-ए-ख़ूबी से की थी दोस्ती
ये न समझे थे कि दुश्मन आसमाँ हो जाएगा
- इम्दाद इमाम असर
22. सौ बार तार तार किया तो भी अब तलक
साबित वही है दस्त ओ गरेबाँ की दोस्ती
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
23. मिरी वहशत मिरे सहरा में उन को ढूँढती है
जो थे दो-चार चेहरे जाने पहचाने से पहले
- अक़ील नोमानी
उम्मीद करते हैं कि दोस्ती पर लिखे ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। आप चाहें तो इन शायरियों का इस्तेमाल अपने दोस्तों से गिले शिकवे दूर करने के लिए भी कर सकते हैं।
