लाइफस्टाइल

Cycle Shayari: विश्व साइकिल दिवस पर पढ़ें साइकिल पर कुछ चुनिंदा शेर

Cycle Shayari in Hindi: 3 जून को पूरी दुनिया में विश्व साइकिल दिवस (World Bicycle Day 2025) मनाया जा रहा है। साइकिल एक सरल, सस्ता और टिकाऊ परिवहन साधन है जो हमें स्वस्थ जीवनशैली और स्वच्छ पर्यावरण की ओर ले जाता है। इसी साइकिल पर कई शायरों ने बेहतरीन शेर लिखे हैं। यहां पढ़ें विश्व साइकिल दिवस पर मशहूर शेर।

Image

साइकिल पर शायरी (Cycle Shayari, Shayari on Cycle)

Cycle Shayari in Hindi: हर साल की तरह इस साल भी 3 जून यानी आज विश्व साइकिल दिवस (World Bicycle Day) मनाया जा रहा है। साइकिल एक मानव-शक्ति से चलने वाला, पैडल से चलने वाला वाहन है जिसमें दो पहिए होते हैं। यह दुनिया भर में परिवहन का एक लोकप्रिय, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती साधन है। साइकिल न केवल एक साधारण वाहन है, बल्कि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है। यह दुनिया के सबसे पुराने और किफायती यातायात साधनों में से एक है, जिसे बच्चे से लेकर बूढ़े तक आसानी से चला सकते हैं। साइकिल चलाना एक बेहतरीन व्यायाम है। यह हृदय, फेफड़ों और मांसपेशियों को मजबूत करता है, वजन घटाने में मदद करता है और मानसिक तनाव को कम करता है। साइकिल नुकसान से परे है। पर्यावरण की दृष्टि से यह शून्य प्रदूषण वाला साधन है। साइकिल एक सरल, सस्ता और टिकाऊ परिवहन साधन है जो हमें स्वस्थ जीवनशैली और स्वच्छ पर्यावरण की ओर ले जाता है। इसी साइकिल पर कई शायरों ने बेहतरीन शेर लिखे हैं। विश्व साइकिल दिवस पर यहां पढ़ें साइकिल पर लिखे मशहूर शेर:

4

Cycle Wali Shayari

Cycle Wali Shayari, Cycle Ki Shayari, साइकिल पर शायरी

1. इक रोज़ जा रहे थे कहीं साइकल से हम

पहुंचे जो एक मोड़ पे नाज़िल हुआ सितम

- आदिल लखनवी

2. मेरी साइकल से जो तू जान के टकराई थी

एक दिन आड़ थे कुछ बाल तिरे सर पे मगर

- ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी

3. वही शिकस्ता साइकल वही उदास ज़िंदगी

तिरे लिए तो कुछ नहीं हमारे पास ज़िंदगी

- सुहैल आज़ाद

3

Cycle Shayari in Hindi

4. कार स्कूटर कहां ईमान-दारी में हुज़ूर

की बहुत कोशिश तो बस इक साइकल हो जाएगी

- अब्ब्दुर्रऊफ़ अन्जुम

5. तन के ढकने के लिए मोर्रिस का बॉनेट छा गया

हां हमारी साइकल ने भी किया ये कार-ए-नेक

- ज़रीफ़ जबलपूरी

6. जब साइकल पर चल दिए, कुल फैमली अपनी लिए

दो टोकरी में हैं निहां दो का है डंडे पर मकां

- फ़ुर्क़त काकोरवी

5

Cycle Ki Shayari

7. साइकल थोड़ी चौबीस इंची ऊंट चलाया करते थे

वो भी तीन चरण में भय्या क़ैंची डंडा फिर गद्दी

- शारिक़ क़मर

8. एवन की वो साइकल छत पर पड़ी जंग खा रही है

अब कोई उस को ढोने वाला चाहिए

- सचिन देव वर्मा

9. पापा ने साइकल तो बिल्कुल नई दिलाई

अब क्या है इस का हुलिया कैसे हुआ ये भाई

- बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

2

Shayari on Cycle

10. कि मेरी मानिंद हम सभी वक़्त की खड़ी साइकल का

गर्दिश-पज़ीर पहिया हैं ना-मसाफ़त-ए-नौ रू-गर्दां

- इक़बाल कौसर

11. डाल कर जल्दी से ख़त या पार्सल

भाग कर देखे कि उसकी साईकल

- कन्हैया लाल कपूर

विश्व साइकिल दिवस के मौके पर आप इन शायरियों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट कर सकते हैं। आप चाहें तो अपने किसी करीबी को ये शायरी भेज भी सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article