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गाली या कामयाबी की चाबी है कॉकरोच? खास गुणों में छिपा है सफल जीवन का खजाना

Cockroach Motivational Qualities: क्या कठिन से कठिन परिस्थितियों में खुद को ढालने की अद्भुत क्षमता रखने वाला यह जीव इतना बुरा है कि किसी को नीचा दिखाने के लिए इसकी संज्ञा दी जाए?

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कॉकरोच से सीखें कौन से खास गुण

पिछले कई दिनों से कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ लोग इसे किसी बड़ी क्रांति की सुगबुगाहट मान रहे तो कुछ लोग महज मसखरी। लेकिन जो भी हो, 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से बने एक्स प्रोफाइल ने अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी नाम का ये प्लेटफॉर्म चीफ जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान के बाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी।

सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।

चीफ जस्टिस का यह बयान जैसे ही मीडिया में आया उसपर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। इसी प्रतिक्रिया में 30 साल के अभिजीत दीपके ने कॉकरोज जनता पार्टी नाम से एक ऑनलाइन मुहिम शुरू कर दी जिसमें अब तक करीब डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। बड़े-बड़े राजनेता भी इसकी बातें कर रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (Photo: CJP_2029@X)

कॉकरोच जनता पार्टी (Photo: CJP_2029@X)

कॉकरोच के खास गुण

इन सारे मुद्दों से इतर यहां सवाल तो बनता है कि क्या करोड़ों सालों से धरती पर जीवित रहने वाला कॉकरोच सही में कोई अपमानित शब्द है? क्या कठिन से कठिन परिस्थितियों में खुद को ढालने की अद्भुत क्षमता रखने वाला यह जीव इतना बुरा है कि किसी को नीचा दिखाने के लिए इसकी संज्ञा दी जाए? यहां हम आपको कॉकरोच के कुछ बेहद खास गुण बता रहे हैं। इन गुणों को पढ़िये और फिर ऊपर के सवालों के जवाब तलाशिये:

1. परिस्थितियों से लड़ना

कॉकरोच के बारे में कहा जाता है कि ये इंसानों की तुलना में 10 गुना ज्यादा रेडिएशन झेल सकते हैं और अत्यधिक ठंडे या गर्म माहौल में भी खुद को ढाल लेते है। कॉकरोच किसी भी विषम परिस्थिति से लड़ते हैं और खुद को जीवित रखते हैं। कॉकरोच का यह गुण हमें सिखाता है कि हालात कितने भी कठिन हों, हार नहीं माननी चाहिए।

2. आखिरी सांस तक हार ना मानना

कॉकरोच सिर कटने के बाद भी करीब महीने भर जिंदा रह सकते हैं। हम इंसानों को सीखना चाहिए कि चाहे हालात कितने भी बदतर क्यों ना हो जाए हमें आखिरी सांस तक लड़ना चाहिए। इंसान की मौत तभी होती जब वह हार मान लेता है। कॉकरोच हारता नहीं है। वह सिर कटने के बाद भी महीने भर जिंदा रहता है।

3. विषम परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार करना

कॉकरोच पानी में 40 मिनट तक सांस रोके रख सकता है। इतनी देर में वह पानी से निकल आसानी से सुरक्षित जगह पर पहुंच जाता है। हमें भी खुद को विषम परिस्थितियों के लिए तैयार रखना चाहिए। अगर कोई संकट आए तो उससे निपटने का हुनर विकसित करना चाहिए। यह आदत हमें कभी हारने नहीं देंगी।

4. खतरे को भांप लेना

कॉकरोच अपने पैरों में मौजूद सेंसरी हेयर्स के कारण हवा के दबाव को महसूस करते हैं और महज 0.05 सेकंड के भीतर खतरे से बच जाते हैं। हमें भी सतर्क रहना चाहिए। सतर्कता हमें किसी भी तरह की परेशानी से दूर रख सकती है।

5. शानदार सर्वाइवर है कॉकरोच

कॉकरोच खाने पर आए तो सब कुछ खा सकते हैं। गोंद से ग्रीस तक, साबुन से चमड़ा और किताबों का कवर तक। यहां तक कि वो आपके बाल भी खा सकते हैं। इसके विपरीत वह महीने भर बिना खाए भी रह सकता है। कॉकरोच का यह गुण हमें सिखाता है कि हमें खुद में हर हालात में सर्वाइव करने की क्षमता डेवलप करनी चाहिए।

क्या सच में गाली है कॉकरोच?

कॉकरोच के इन गुणों को एक बार फिर से पढ़ लिजिए। इसके बाद ये आप पर निर्भर करता है कि आप कॉकरोच को कैसे लेते हैं। इसके गुणों से सीखकर खुद को बेहतर बनाते हैं या फिर आगे भी कॉकरोच को गाली या अपमान के तौर पर लेते-देते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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