मोटापा और मेटाबोलिक बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली GLP-1 दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच भारत की दवा नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बड़ा कदम उठाया है। हाल के समय में इन दवाओं को 'फास्ट वेट लॉस' का आसान तरीका बताकर ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर प्रमोट किया जा रहा था, जिससे इनके गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ गया। इसी को देखते हुए CDSCO ने सख्त एडवाइजरी जारी कर साफ किया है कि ऐसी प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का आम जनता के बीच प्रचार-प्रसार कानून का उल्लंघन माना जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई हो सकती है।
GLP-1 दवाओं के गलत प्रचार पर सख्त निगरानी
CDSCO ने GLP-1 श्रेणी की दवाओं जैसे Semaglutide और Ozempic के गलत उपयोग और अवैध बिक्री पर सख्ती बढ़ा दी है। जांच के दौरान 49 ऑनलाइन फार्मेसी और क्लिनिक्स का निरीक्षण किया गया, जिनमें कई को नोटिस जारी किए गए। नियामक संस्था ने स्पष्ट किया है कि ये दवाएं केवल डॉक्टर की सलाह पर ही ली जा सकती हैं और इन्हें सीधे जनता को प्रमोट करना नियमों के खिलाफ है।
‘डिजीज अवेयरनेस’ के नाम पर छिपा प्रमोशन भी गलत
एडवाइजरी में बताया गया है कि कुछ कंपनियां “डिजीज अवेयरनेस” या डिजिटल कैंपेन के नाम पर इन दवाओं का अप्रत्यक्ष प्रचार कर रही थीं। CDSCO ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। संस्था का कहना है कि ऐसा कोई भी प्रचार, जो दवा को आसान या गारंटीड वजन घटाने का तरीका बताता है, भ्रामक माना जाएगा और उस पर कार्रवाई हो सकती है।
लाइफस्टाइल बदलाव को नजरअंदाज करना भी नियमों के खिलाफ
CDSCO ने जोर देकर कहा है कि मोटापा एक जटिल और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। इसका इलाज केवल दवाओं से संभव नहीं है। संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। यदि किसी विज्ञापन में इन जरूरी उपायों की अहमियत को कम करके दिखाया जाता है, तो यह भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
कानून का पालन और Risk Management Plan जरूरी
नियामक संस्था ने सभी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) का पूरी तरह पालन करें। प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी में अधिकृत अधिकारी का विवरण, हेल्पलाइन नंबर और शिकायत दर्ज करने की सुविधा देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही कंपनियों को एक मजबूत रिस्क मैनेजमेंट प्लान (RMP) तैयार करना होगा, ताकि दवाओं के सुरक्षित उपयोग और संभावित जोखिमों पर नजर रखी जा सके।
सोशल मीडिया और इंफ्लुएंसर मार्केटिंग पर भी रोक
एडवाइजरी में स्पष्ट कहा गया है कि सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन प्रतिबंधित रहेगा। यहां तक कि इंफ्लुएंसर मार्केटिंग या कॉर्पोरेट कैंपेन के जरिए किया गया प्रमोशन भी नियमों के खिलाफ माना जाएगा। इस दिशा में भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) को भी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
