लाइफस्टाइल

क्या मछली के बाद गुड़ खा सकते हैं, मछली खाने के तुरंत बाद क्या नहीं खाना चाहिए?

Can we eat jaggery after eating Fish : आयुर्वेद के अनुसार, मछली और गुड़ का मेल 'विरुद्ध आहार' की श्रेणी में आता है। मछली की तासीर गर्म होती है और गुड़ भी तासीर में गर्म होता है।

Image

क्या मछली के साथ गुड़ खा सकते हैं (AI Image)

Can we eat jaggery after eating Fish: भोजन के भी कुछ नियम होते हैं। ये नियम धार्मिक मान्यताओं के साथ ही वैज्ञानिक और स्वास्थ्य के नजरिये से भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसा ही एक नियम है कि मछली खाने के बाद क्या खाना चाहिए या क्या नहीं खाना चाहिए। इससे जुड़े कुछ सवाल हैं जो लोग इंटरनेट पर खूब सर्च करते हैं। जैसे कि क्या मछली खाने के बाद गुड़ खा सकते हैं, क्या मछली के बाद दही खा सकते हैं या फिर मछली खाने के बाद क्या-क्या नहीं खाना चाहिए। यहां हम ऐसे ही सारे सवालों का जवाब एक साथ लेकर आए हैं:

क्या मछली के बाद गुड़ खा सकते हैं?

मछली खाने के तुरंत बाद गुड़ खाना उचित नहीं माना जाता है। भोजन के बाद मीठा खाने की आदत आम है, लेकिन मछली के साथ गुड़ का रासायनिक मेल शरीर में टॉक्सिन्स पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मछली के सेवन के कम से कम 2 से 3 घंटे बाद ही गुड़ या उससे बनी चीजों का सेवन करना चाहिए। तुरंत गुड़ खाने से मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे भारीपन या जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मछली के ऊपर गुड़ खाने से क्या होता है? (Can we eat jaggery and fish together?

आयुर्वेद के अनुसार, मछली और गुड़ का मेल 'विरुद्ध आहार' की श्रेणी में आता है। मछली की तासीर गर्म होती है और गुड़ भी तासीर में गर्म होता है। जब दो अत्यधिक गर्म तासीर वाली चीजें एक साथ ली जाती हैं, तो यह शरीर के 'पित्त' दोष को असंतुलित कर सकती हैं। इससे पाचन तंत्र में गड़बड़ी, पेट में जलन, एसिडिटी और त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे चकत्ते या खुजली होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, आधुनिक विज्ञान इसे केवल एलर्जी का मामला मानता है, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से इस मेल से बचना ही बेहतर है।

मछली खाने के तुरंत बाद क्या नहीं खाना चाहिए? (after eating fish what should not to eat

मछली खाने के बाद कुछ खास चीजों से परहेज करना अनिवार्य है। सबसे महत्वपूर्ण है दूध और डेयरी उत्पाद (दही, पनीर आदि)। इसके अलावा, अत्यधिक गर्म तासीर वाली चीजें (जैसे गुड़), शहद, और उड़द की दाल का सेवन भी मछली के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए। खट्टे फल या नींबू का अत्यधिक सेवन भी मछली के बाद पाचन में बाधा डाल सकता है। इन चीजों का एक साथ या तुरंत बाद सेवन करने से पाचन संबंधी विकार और सफेद दाग जैसी भ्रांतियां जुड़ी हैं, हालांकि वैज्ञानिक रूप से सफेद दाग का सीधा संबंध भोजन से सिद्ध नहीं है, फिर भी पेट की सुरक्षा के लिए इनसे बचना चाहिए।

क्या मछली खाने के बाद दवा खा सकते हैं

मछली खाने के बाद दवा लेनी चाहिए या नहीं, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन सी दवा खा रहे हैं। सामान्य तौर पर मछली और दवाओं के बीच कोई सीधा जानलेवा टकराव नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियों में सावधानी बरतनी जरूरी है। सामान्य बुखार, सिरदर्द या विटामिन की गोलियां मछली के बाद ली जा सकती हैं, लेकिन किसी भी विशेष उपचार वाली दवा के लिए थोड़ा अंतर रखना ही बेहतर है।

क्या मछली खाने के बाद दही खा सकते हैं? (After Eating can we eat curd

मछली और दही का मेल सबसे चर्चित 'विरुद्ध आहार' है। मछली मांसाहारी प्रोटीन है और दही एक डेयरी उत्पाद। इन दोनों के पाचन के लिए शरीर को अलग-अलग प्रकार के एंजाइम्स की आवश्यकता होती है। जब इन्हें एक साथ लिया जाता है, तो पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे पेट दर्द, गैस और अपच हो सकती है। इसके अलावा, दोनों की तासीर अलग-अलग होने के कारण यह शरीर के संचार तंत्र में बाधा डाल सकते हैं। बेहतर स्वास्थ्य के लिए मछली और दही के सेवन के बीच कम से कम 4-5 घंटे का अंतर रखना चाहिए।बिल बचेगा, बल्कि आपका बच्चा भी प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनेगा।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article