At The Wheel Of Research Book Review: 30 नवंबर 2022, वह तारीख है जब डॉ. सौम्या स्वामीनाथन एक बार और जेनेवा के वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन पहुंचीं। हालांकि ये दिन कुछ अलग ही थी। वह अपने अंदर उन हवाओं को उन मीठी यादों को, उन ढेर सारी बातों को समेट रही थीं जो उन्होंने यहां पर बतौर चीफ साइंटिस्ट रहते हुए कमाई थीं। दरअसल 30 नवंबर 2022 को वह डब्ल्यूएचओ के चीफ साइंटिस्ट के पद से रिटायर हो रही थीं।
जब साल 2019 में डॉ. सौम्या ने WHO में बतौर चीफ साइंटिस्ट जॉइन किया था था तब उन्हें करना क्या है इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। अभी वह वहां के माहौल को समझ ही रही थीं कि दुनिया के खतरनाक कोविड-19 महामारी की चपेट में आ गई। यह महामारी अपने साथ अजीब से डर, संदेह, अफवाहें और अनिश्चितताएं लेकर आई।
कई तरह के अनिश्चितताओं के बावजूद, जिस चीज ने स्वामीनाथन को आगे बढ़ने और कोविड की चुनौती से लड़ने में मदद की, वह थी विज्ञान में उनका विश्वास। “चाहे कितना भी विरोध हो, विज्ञान से जुड़े रहें। विज्ञान की समझ और शोध के बाद आपका जो हासिल है उसपर विश्वास रखें और उनका बचाव करें। अंत में यह विज्ञान ही था जिसने कोविड जैसी खतरनाक महामारी से इस दुनिया को बचाया। " डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने यह बातें खुद बताई हैं अपनी बायोग्राफी 'एट द व्हील ऑफ रिसर्च' में। उनकी इस बायोग्राफी को लिखा है वरिष्ठ पत्रकार अनुराधा मैस्करेनहास ने और पब्लिश किया है Bloomsbury Publishing ने।
इस बायोग्राफी में अनुराधा मैस्करेनहास ने सौम्या स्वामीनाथन के प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ पर बड़ी बारीकी से चीजें सामने रखी हैं। कोविड 19 के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहली चीफ साइंटिस्ट रहीं डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का करियर बेहद शानदार रहा है। उनके काम से जुड़े लोगों से बात कर कई ऐसी जानकारियां किताब में परोसी गई हैं जो किसी को भी प्रेरित करने का काम कर सकती हैं। किताब की राइटर अनुराधा ने डॉ. सौम्या के परिजनों, खासतौर पर उनके पिता डॉ. एमएस स्वामीनाथन, साइंटिस्ट, रिसर्चर्स और उनके दोस्तों से कई मुद्दों पर बात कर उसका निचोड़ सामने रखा है।
इस किताब में कई ऐसे सवालों का जवाब मिलेगा जो लोग डॉ.सौम्या स्वामीनाथन से जानना चाहते हैं। जैसे, आखिर क्यों उन्होंने पहले वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का प्रस्ताव ठुकरा दिया था दोबारा उस प्रस्ताव को क्यों मान लिया? वो कौन था जिसने उन्हें इस प्रस्ताव को मानने के लिए मनाया या प्रेरित किया? जानलेवा कोविड महामारी के दौरान उन्होंने कैसे दुनिया तो यह भरोसा दिलाया कि सब ठीक हो जाएगा? कैसे उन्होंने इस महामारी की चुनौतियों को ना सिर्फ संभाला बल्कि दुनिया भर की आबादी को इससे बचाया भी। अनुराधा मैस्करेनहास की इस किताब से आप समझ पाएंगे कि कैसे स्वामीनाथन के अडिग और दयालु स्वभाव, लोगों से जुड़ने की उनकी क्षमता और दूसरों के साथ काम करने की उनकी इच्छा ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। यह किताब यंग रिसर्चर्स को जरूर पढ़नी चाहिए, खासतौर पर उनको जो पब्लिक हेल्थ जैसे चैलेंजिंग फील्ड में करियर बनाने की सोच रहे हैं।
