Atal Bihari Vajpayee Motivational Quotes in Hindi: आज अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती है। भारतीय राजनीति के एक महान नेता औऱ विचारक अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन प्रेरणा से भरा हुआ है। एक बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश का प्रधानमंत्री बनने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने ना सिर्फ अपनी राजनीतिक क्षमता से लोगों को प्रभावित किया बल्कि वह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। साल 2015 में अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 16 अगस्त 2018 को अटल बिहारी वाजपेयी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। हालांकि आज भी उनके प्रेरक विचार लोगों को सफल और खुशहाल जीवन का रास्ता दिखा रहे हैं। यहां देखें अटल बिहारी वाजपेयी के कुछ अनमोल विचार:
Atal Bihari Vajpayee Prerak Vichar ( अटल बिहारी वाजपेयी के प्रेरक विचार)
- जलना होगा, गलना होगा और हमें कदम मिलाकर एक साथ चलना होगा।
- छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।
- इंसान बनो। केवल नाम से नहीं, रूप से नहीं, शक्ल से नहीं। हृदय से, बुद्धि से, संस्कार से, ज्ञान से।
- मनुष्य को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लड़ें, एक स्वप्न टूटे, तो दूसरा गढ़े।
Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi (अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार)
- मन हारकर मैदान नहीं जीते जाते, न मैदान जीतने से मन जीते जाते हैं।
- जीतना और हारना जीवन का एक मुख्य हिस्सा है, जिसे हमें समानता के साथ देखना चाहिए।
- जीवन को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता, उसका ‘पूर्णता’ में ही विचार किया जाना चाहिए।
- आप मित्र बदल सकते हैं, पर पड़ोसी नहीं।
- मै मरने से नही डरता हूँ, बल्कि बदनामी होने से डरता हूँ।
Atal Bihari Vajpayee Famous Quotes
- निरक्षरता और निर्धनता का बड़ा गहरा संबंध है।
- अगर किसी देश में हलचल नजर आए तो समझिये कि वहां का राजा ईमानदार है।
- कोई हथियार नहीं बल्कि आपसी भाईचारा ही सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है।
- परमात्मा भी आकर कहे कि छुआछूत मानो, तो मैं ऐसे परमात्मा को भी मानने को तेयार नहीं लेकिन परमात्मा ऐसा कर ही नहीं सकता।
- हमारे पड़ोसी कहते हैं कि एक हाथ से ताली नहीं बजती, हमने कहा कि चुटकी तो बज सकती है।
- जीवन एक फूल के समान है, इसे पूरी ताक़त के साथ खिलाओ।
बता दें कि भारत के 10वें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में 3 बार सेवाएं दीं। बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के लिए चुने गए। वह आजादी की लड़ाई में भी शामिल थे और 1942 के असहयोग आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी लिया था।
