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लैंडिंग के बाद चाह कर भी घर क्यों नहीं जा सकते Artemis II के अंतरिक्षयात्री? रहना होगा 'कैद'

Artemis II Astronauts Isolation: आर्टेमिस 2 के अंतरिक्षयात्री लैंडिंग के बाद आइसोलेशन में रहेंगे। जिसका उद्देश्य उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी और वैज्ञानिक रिसर्च है।

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आर्टेमिस 2 के अंतरिक्ष यात्री USS जॉन पी. मुर्था पर (फोटो NASA)

Artemis II Astronauts Isolation: आर्टेमिस-2 घरवापसी कर चुका है, यानि चांद की यात्रा पूरी करके धरती पर लैंड कर चुका है। आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित हैं और स्वस्थ हैं। नासा के वैज्ञानिक और डॉक्टर उनकी जांच कर रहे हैं। स्वस्थ होने के बावजूद आर्टेमिस-2 के अंतरिक्षयात्री अपने घर नहीं जा सकते, उन्हें कुछ दिन एक तरह से कैद में रहना ही पड़ेगा। वो भी एक नहीं बल्कि सभी चारों अंतरिक्षयात्रियों को कैद में रहना पड़ेगा, इसे आइसोलेशन कहा जाता है। ये कुछ वैसा ही होता है, जैसे कोविड के दौरान कोरोना के मरीजों को अलग रखा जाता था।

आर्टेमिस-2 के अंतरिक्षयात्री आइसोलेशन में क्यों? Why are the Artemis II astronauts in isolation?

Artemis II की लैंडिंग के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को कुछ दिन के लिए आइसोलेशन (क्वारंटीन) में रखा जाएगा। इसका उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी जांच भी है। सबसे पहला कारण स्वास्थ्य जांच है। अंतरिक्ष से लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जैसे कमजोरी, चक्कर आना, मांसपेशियों की ताकत कम होना और संतुलन में समस्या। इसलिए NASA डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सामान्य स्थिति में सुरक्षित रूप से लौट रहे हैं।

जैविक जोखिम को कम करना

दूसरा कारण संभावित जैविक जोखिम (Biological Risk) से बचाव है। भले ही चंद्रमा पर जीवन के संकेत नहीं मिले हैं, फिर भी अंतरिक्ष एजेंसियां एहतियात के तौर पर यह सुनिश्चित करती हैं कि कोई अज्ञात सूक्ष्म जीव या हानिकारक तत्व पृथ्वी के वातावरण में न आए। यह प्रक्रिया पहले भी अपनाई गई थी, जब Apollo 11 और Apollo 17 मिशनों के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को कुछ समय तक क्वारंटीन में रखा गया था।

नील आर्मस्ट्रांग, माइक कॉलिन्स और बज एल्ड्रिन, आइसोलेशन के दौरान (फोटो- NASA)

नील आर्मस्ट्रांग, माइक कॉलिन्स और बज एल्ड्रिन, आइसोलेशन के दौरान (फोटो- NASA)

अंतरिक्षयात्रियों का वैज्ञानिक अध्ययन

तीसरा कारण वैज्ञानिक अध्ययन है। अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के बाद शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों-जैसे हड्डियों की घनत्व में कमी, मांसपेशियों का कमजोर होना और प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव- का अध्ययन किया जाता है। इससे भविष्य के लंबे मिशनों, खासकर चंद्रमा और मंगल ग्रह की यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण डेटा मिलता है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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