भारत के किस शहर को कहा जाता है ‘City of Music’? जाने किस महान संगीतकार का था यहां से नाता
- Authored by: Nilesh Dwivedi
- Updated Dec 4, 2025, 01:53 PM IST
City of Music: भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 4000 से अधिक शहर हैं, जिनमें हर शहर की अपनी खास पहचान और इतिहास है। कुछ शहर अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं और खास उपनामों से जाने जाते हैं। इसी कड़ी में एक शहर है, जिसे संगीत की विरासत के कारण ‘City of Music’ कहा जाता है। तो आइए जानें इसके बारे में।
भारत के किस शहर को कहा जाता है सिटी ऑफ म्यूजिक?
City of Music: भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिनमें 4000 से अधिक शहर बसा हुआ है। देश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण पूरी दुनिया में मशहूर है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भारत की यात्रा करते हैं और अपने साथ यहां की यादें लेकर लौटते हैं। प्रत्येक शहर की अपनी अलग कहानी और ऐतिहासिक महत्व है, जो वर्षों से उसकी पहचान का हिस्सा बनी हुई है। इसके अलावा, इन शहरों की अनूठी विशेषताएं उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाती हैं। भारत के कई शहरों को उनके मूल नाम के अलावा खास उपनामों से भी जाना जाता है। इसी क्रम में क्या आप जानते हैं कि भारत का कौन सा शहर ‘City of Music’ के नाम से प्रसिद्ध है? अगर नहीं, तो चलिए आज हम आपको इस रोचक शहर के बारे में बताते हैं।
भारत में संगीत का शहर कहां है?
भारत के हर शहर की अपनी खास पहचान है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश का ग्वालियर शहर अपनी समृद्ध संगीत संस्कृति के कारण ‘City of Music’ के रूप में प्रसिद्ध है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि UNESCO ने 31 अक्टूबर 2025 को विश्व शहर दिवस के अवसर पर 55 शहरों को अपनी सूची में शामिल किया, जिनमें भारत के कुछ शहर भी शामिल हैं। ग्वालियर ने अपनी विशिष्ट संगीत विरासत के चलते इस वैश्विक मान्यता को हासिल किया है।किस संगीतकार का था ग्वालियर से नाता?
अब सवाल उठता है कि ग्वालियर को ‘संगीत का शहर’ क्यों कहा जाता है। इसका उत्तर ग्वालियर के प्रसिद्ध संगीत घराने में छिपा है, जिसे संगीत जगत में “ग्वालियर घराना” के नाम से जाना जाता है। इसी घराने से तानसेन जैसे महान कलाकार उत्पन्न हुए, जो अकबर के नवरत्नों में शामिल थे। इसके अलावा, इस घराने का एक और चमकता सितारा था संगीत सम्राट बैजू बावरा, जो प्रमुख ध्रुपद गायक थे। बैजू बावरा ग्वालियर के राजा मानसिंह के दरबार में गायक रहे और अपनी मधुर आवाज के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध थे। एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, बैजू बावरा ने तानसेन को एक संगीत प्रतियोगिता में पराजित किया था, जिसके बाद अकबर ने उन्हें अपने दरबार में संगीतज्ञ बनने का प्रस्ताव दिया। इसके बावजूद, बैजू बावरा अंततः ग्वालियर लौट आए और यहीं अपनी कला के लिए अमर हो गए।
तानसेन और ग्वालियर
तानसेन और ग्वालियर का इतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध गहरा है, क्योंकि तानसेन का जन्म ग्वालियर के बेहट गांव में हुआ था। आज भी ग्वालियर को 'संगीत नगरी' के रूप में जाना जाता है और यहां हर साल तानसेन की याद में आयोजित ‘तानसेन समारोह’ इसे एक प्रमुख संगीत केंद्र बनाता है। ग्वालियर में स्थित तानसेन स्मारक, जो मुगल स्थापत्य शैली में निर्मित है, महान संगीतकार और अकबर के नवरत्नों में से एक तानसेन की याद में बनाया गया है। इस स्मारक में हर साल नवम्बर में अखिल भारतीय संगीत समारोह का आयोजन होता है। तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास थे, जो एक संत और महान संगीतकार थे। उन्होंने तानसेन को संगीत की शिक्षा दी और उनकी अद्वितीय प्रतिभा को निखारा।