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क्या है एंटी ड्रोन सिस्टम और कैसे करता है काम? मणिपुर में आखिर क्यों की गई इसकी तैनाती

Anti-Drone System: मणिपुर में जातीय संघर्ष के बीच उग्रवादी अब ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे निष्क्रिय करने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम की तैनाती की गई है। दरअसल, एंटी ड्रोन सिस्टम की मदद से घातक ड्रोन को हवा में ही नष्ट किया जा सकता है या फिर उसे निष्क्रिय कर जमीन में उतार भी सकते हैं तो चलिए समझते हैं कि आखिर एंटी ड्रोन सिस्टम है क्या? और उसकी जरूरत क्यों पड़ी?

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एंटी ड्रोन सिस्टम

Photo : Times Now Digital
KEY HIGHLIGHTS
  • मणिपुर में थम नहीं रही हिंसा।
  • ड्रोन के जरिए विस्फोटक छोड़ रहे उग्रवादी।
  • उग्रवादियों ने ड्रोन की मदद से कई हमले किए।

Anti-Drone System: मणिपुर में जारी हिंसा थमने का नाम ही नहीं ले रही है। जिसके बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है। केंद्र ने मणिपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के और 2000 जवानों की तैनाती की है। अधिकारियों का मानना है कि हालात तनावपूर्ण, लेकिन नियंत्रण में हैं।

हिंसाग्रस्त इलाकों में जातीय संघर्ष के बीच उग्रवादी उन्नत हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें ड्रोन भी शामिल हैं। जिसकी मदद से दूरस्थ इलाकों में विस्फोटक गिरा रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों ने ड्रोन हमलों को विफल बनाने वाला हथियार तैनात किया गया है। बता दें कि सीआरपीएफ ने मणिपुर पुलिस को एंटी ड्रोन सिस्टम मुहैया कराया है।

एंटी ड्रोन सिस्टम की हुई तैनाती

इस माह की शुरुआत में उग्रवादियों ने इंफाल वेस्ट जिले के कौत्रुक गांव में विस्फोट गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद सेंजाम चिरांग में भी ड्रोन से हमला हुआ था। इन हमलों को नाकाम करने के लिए इंफाल घाटी के दूरस्थ इलाकों में एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात किया है।

क्या है एंटी ड्रोन सिस्टम?

एंटी ड्रोन सिस्टम को ड्रोन रोधी प्रणाली भी कहा जाता है। इस सिस्टम को ड्रोन के जोखिमों को कम करने के लिए विकसित किया गया है। तेजी से विकसित हो रही ड्रोन तकनीक के दुरुपयोग की संभावनाओं को रोकने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल ड्रोन को ट्रैक और निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। एंटी ड्रोन सिस्टम कई प्रकार के हो सकते हैं। जैसे- रडार सिस्टम, लेजर सिस्टम, नेट सिस्टम इत्यादि।

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एंटी ड्रोन सिस्टम

रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल गाजा युद्ध में आप लोगों ने बड़ी-बड़ी मिसाइलें और ड्रोनों को ट्रैक कर मार गिराने की खबरें पढ़ी होंगी। इसके लिए एयर डिफेंस, आयरन डोम इत्यादि तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह तकनीक नीचे उड़ाने भरने वाले छोटे ड्रोन के लिए कारगर नहीं हैं। ऐसे में एंटी ड्रोन सिस्टम को बनाया गया, जो छोटे ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें मार गिराने की क्षमता रखते हैं।

एंटी ड्रोन सिस्टम कैसे करता है काम?

मणिपुर पुलिस ने इंफाल घाटी के दूरस्थ इलाकों में एंटी ड्रोन सिस्टम को तैनात किया है। ऐसे में अगर एंटी ड्रोन सिस्टम के इलाके में कोई ड्रोन घुसपैठ करता है तो सिस्टम को चंद सेकंड में उसकी भनक लग जाएगी। जिसके बाद ऑपरेटर तय करेगा कि ड्रोन को नष्ट करना है या नहीं। यदि ऑपरेटर को सिस्टम से घातक ड्रोन की जानकारी मिली है तो फिर ड्रोन का या तो हवा में नष्ट कर दिया जाएगा या फिर उसे निष्क्रिय कर जमीन पर उतारा जा सकता है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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