हिंसाग्रस्त इलाकों में जातीय संघर्ष के बीच उग्रवादी उन्नत हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें ड्रोन भी शामिल हैं। जिसकी मदद से दूरस्थ इलाकों में विस्फोटक गिरा रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों ने ड्रोन हमलों को विफल बनाने वाला हथियार तैनात किया गया है। बता दें कि सीआरपीएफ ने मणिपुर पुलिस को एंटी ड्रोन सिस्टम मुहैया कराया है।
एंटी ड्रोन सिस्टम की हुई तैनाती
इस माह की शुरुआत में उग्रवादियों ने इंफाल वेस्ट जिले के कौत्रुक गांव में विस्फोट गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद सेंजाम चिरांग में भी ड्रोन से हमला हुआ था। इन हमलों को नाकाम करने के लिए इंफाल घाटी के दूरस्थ इलाकों में एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात किया है।
क्या है एंटी ड्रोन सिस्टम?
एंटी ड्रोन सिस्टम को ड्रोन रोधी प्रणाली भी कहा जाता है। इस सिस्टम को ड्रोन के जोखिमों को कम करने के लिए विकसित किया गया है। तेजी से विकसित हो रही ड्रोन तकनीक के दुरुपयोग की संभावनाओं को रोकने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल ड्रोन को ट्रैक और निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। एंटी ड्रोन सिस्टम कई प्रकार के हो सकते हैं। जैसे- रडार सिस्टम, लेजर सिस्टम, नेट सिस्टम इत्यादि।

एंटी ड्रोन सिस्टम
रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल गाजा युद्ध में आप लोगों ने बड़ी-बड़ी मिसाइलें और ड्रोनों को ट्रैक कर मार गिराने की खबरें पढ़ी होंगी। इसके लिए एयर डिफेंस, आयरन डोम इत्यादि तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह तकनीक नीचे उड़ाने भरने वाले छोटे ड्रोन के लिए कारगर नहीं हैं। ऐसे में एंटी ड्रोन सिस्टम को बनाया गया, जो छोटे ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें मार गिराने की क्षमता रखते हैं।
एंटी ड्रोन सिस्टम कैसे करता है काम?
मणिपुर पुलिस ने इंफाल घाटी के दूरस्थ इलाकों में एंटी ड्रोन सिस्टम को तैनात किया है। ऐसे में अगर एंटी ड्रोन सिस्टम के इलाके में कोई ड्रोन घुसपैठ करता है तो सिस्टम को चंद सेकंड में उसकी भनक लग जाएगी। जिसके बाद ऑपरेटर तय करेगा कि ड्रोन को नष्ट करना है या नहीं। यदि ऑपरेटर को सिस्टम से घातक ड्रोन की जानकारी मिली है तो फिर ड्रोन का या तो हवा में नष्ट कर दिया जाएगा या फिर उसे निष्क्रिय कर जमीन पर उतारा जा सकता है।
