नई दिल्ली: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर राजधानी दिल्ली में जारी सियासी घमासान के बीच संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र में सरकार जहां कई अहम विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष प्रश्नपत्र लीक, महंगाई, भ्रष्टाचार, विदेश नीति, राजनीतिक दलों में टूट और अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। हालांकि, परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक को अभी तक सरकार के आधिकारिक विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर बढ़ सकता है विवाद
परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की संभावना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संविधान संशोधन के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन के कई दल इसके खिलाफ रणनीति बना रहे हैं।विपक्ष के निशाने पर सरकार
कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह मानसून सत्र में सरकार को कई मुद्दों पर घेरेगी। इनमें संस्थाओं के कथित दुरुपयोग, राजनीतिक दलों में टूट, भ्रष्टाचार, महंगाई, विदेश नीति, पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण और विभिन्न परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दे शामिल हैं। विपक्ष अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को भी संसद में उठाने की तैयारी कर रहा है। वहीं, सरकार का रुख यह हो सकता है कि यह मामला राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है।संसद मार्च और विरोध प्रदर्शन भी बन सकते हैं मुद्दा
सत्र की शुरुआत ऐसे समय हो रही है जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने संसद तक मार्च का ऐलान किया है। पार्टी के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं और कथित नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
मानसून सत्र से पहले लोकसभा के राजनीतिक समीकरणों में भी बदलाव देखने को मिला है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति भी दी गई है। हालांकि, उन्हें अलग दल के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलने पर अभी फैसला नहीं हुआ है। तृणमूल कांग्रेस ने इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।सरकार की प्राथमिकता होगी विधेयक पारित कराना
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार का मुख्य फोकस मानसून सत्र के दौरान लंबित विधेयकों को पारित कराना रहेगा। सूचीबद्ध विधेयकों में एफसीआरए संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक भी शामिल हैं। सरकार भविष्य में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को भी फिर से संसद में लाने की तैयारी कर रही है।
दो-तिहाई बहुमत पर रहेगी नजर
लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। मौजूदा राजनीतिक स्थिति में एनडीए की संख्या बढ़ी है, लेकिन वह अभी भी पूर्ण दो-तिहाई बहुमत से कम है। राज्यसभा में भी सरकार को आवश्यक समर्थन जुटाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है।
